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असम में तीन अत्याधुनिक वन्यजीव पुनर्वास केंद्र बनाएगा अनंत अंबानी का वंतारा फाउंडेशन, खुद उठाएगा पूरा खर्चअसम
13 अग॰ 2026, 5:18 pm (4 दिन पहले)· 3

असम में तीन अत्याधुनिक वन्यजीव पुनर्वास केंद्र बनाएगा अनंत अंबानी का वंतारा फाउंडेशन, खुद उठाएगा पूरा खर्च

अनंत अंबानी के वंतारा फाउंडेशन ने असम में तीन fully funded वन्यजीव बचाव और पुनर्वास केंद्र स्थापित करने के लिए वन विभाग को प्रस्ताव दिया है, जिसमें एशियाई हाथियों के इलाज के लिए एक विशेष अस्पताल परिसर शामिल होगा।

असम में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए वंतारा फाउंडेशन ने राज्य में तीन जंगली जानवर बचाव और पुनर्वास केंद्र स्थापित करने की पेशकश की है। फाउंडेशन ने 12 अगस्त को असम वन विभाग को इस संबंध में एक विस्तृत प्रस्ताव सौंपा। इस पूरी परियोजना का वित्तीय बोझ फाउंडेशन स्वयं उठाएगा, जिससे राज्य के सरकारी खजाने पर कोई अतिरिक्त भार नहीं पड़ेगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य असम में संकटग्रस्त और घायल पशुओं को तुरंत बेहतर इलाज और सुरक्षित आश्रय प्रदान करना है।

आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं और एशियाई हाथियों के लिए विशेष केंद्र

प्रस्तावित योजना के तहत तीन केंद्रों में से एक केंद्र पूरी तरह से एशियाई हाथियों के संरक्षण, चिकित्सा और दीर्घकालिक देखभाल के लिए समर्पित होगा। असम में मानव-हाथी संघर्ष और प्राकृतिक आवास के सिमटने को देखते हुए हाथियों के लिए विशेष चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। यह समर्पित केंद्र हाथियों की शारीरिक और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के अनुसार विशेष रूप से तैयार किया जाएगा।

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इन तीनों केंद्रों में विभिन्न प्रजातियों की जरूरतों के अनुकूल विशेष आवास बनाए जाएंगे। इसके अलावा, परिसरों में उन्नत पशु चिकित्सा अस्पताल, आधुनिक नैदानिक प्रयोगशालाएं और पशु पोषण केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इन आधुनिक सुविधाओं की मदद से बीमार, घायल या संकट में फंसे जानवरों की सटीक जांच, त्वरित शल्य चिकित्सा और उचित खान-पान का प्रबंधन आसानी से किया जा सकेगा।

राज्य सरकार का मार्गदर्शन और बिना किसी शर्त के हस्तांतरण

यह पूरी परियोजना निजी स्तर पर वित्तपोषित होगी, लेकिन प्रत्येक केंद्र के स्थान, आकार और डिजाइन का अंतिम फैसला असम वन विभाग के साथ परामर्श के बाद ही तय किया जाएगा। तीनों केंद्र पूरी तरह से राज्य सरकार और वन विभाग की देखरेख और प्रशासनिक मार्गदर्शन में काम करेंगे, ताकि स्थानीय संरक्षण प्राथमिकताओं के अनुसार काम हो सके।

फाउंडेशन ने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया है कि निर्माण कार्य और उपकरण लगाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन सभी सुविधाओं को बिना किसी वित्तीय या कानूनी शर्त के राज्य सरकार को सौंप दिया जाएगा। इस व्यवस्था से असम सरकार को बिना किसी शुरुआती पूंजीगत लागत के अंतरराष्ट्रीय स्तर के वन्यजीव बचाव केंद्र मिल जाएंगे।

आधिकारिक पत्र और मुख्यमंत्री की सराहना

वंतारा के संस्थापक अनंत अंबानी की ओर से मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) विवान कराणी ने इस प्रस्ताव पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। पत्र में उल्लेख किया गया है कि यह कदम असम में वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था को मजबूत करने के इरादे से उठाया गया है। विवान कराणी ने लिखा,

"वंतारा राज्य वन विभाग के मार्गदर्शन और पर्यवेक्षण के तहत असम राज्य में तीन जंगली जानवर बचाव और पुनर्वास केंद्र स्थापित करने में सहायता करने का प्रस्ताव रखता है।"

इस पहल का स्वागत करते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने वंतारा फाउंडेशन और अनंत अंबानी के प्रति आभार जताया। मुख्यमंत्री ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में वन्यजीवों की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति फाउंडेशन की प्रतिबद्धता की सार्वजनिक रूप से सराहना की।

सवाल-जवाब

वंतारा फाउंडेशन ने असम में क्या प्रस्ताव रखा है?
वंतारा फाउंडेशन ने असम में अपने स्वयं के खर्च पर तीन जंगली जानवर बचाव और पुनर्वास केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव सौंपा है।
क्या इन केंद्रों में हाथियों के लिए कोई विशेष सुविधा होगी?
हां, तीनों में से एक केंद्र विशेष रूप से एशियाई हाथियों के संरक्षण, इलाज और देखभाल के लिए समर्पित रहेगा।
इन केंद्रों का निर्माण और संचालन किसकी देखरेख में होगा?
इन केंद्रों का निर्माण वंतारा फाउंडेशन अपने खर्च पर करेगा, लेकिन स्थान का चयन और संचालन असम वन विभाग के मार्गदर्शन में होगा।
निर्माण पूरा होने के बाद इन केंद्रों का मालिकाना हक किसके पास होगा?
काम पूरा होने के बाद वंतारा फाउंडेशन इन सभी केंद्रों को बिना किसी वित्तीय या कानूनी शर्त के असम सरकार को सौंप देगा।
यह प्रस्ताव कब और किसकी ओर से सौंपा गया था?
यह प्रस्ताव 12 अगस्त को वंतारा के सीईओ विवान कराणी द्वारा संस्थापक अनंत अंबानी की ओर से असम वन विभाग को भेजा गया था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 दिन पहले

असम में वंतारा फाउंडेशन द्वारा तीन वन्यजीव पुनर्वास केंद्रों और विशेष हाथी अस्पताल की यह पहल कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है। मानव-हाथी संघर्ष और वन्यजीव अपराधों से जुड़ी चुनौतियों के बीच, बिना किसी सरकारी लागत के इस तरह का अत्याधुनिक बुनियादी ढांचा तैयार होना और बाद में बिना शर्त राज्य को सौंपना वन्यजीव संरक्षण और प्रशासनिक व्यवस्था को एक नई मजबूती देगा।

Ravikash Gupta@ravikash·3 दिन पहले

यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और मानव-वन्यजीव संघर्ष से होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। जब बिना किसी राजकोषीय बोझ के इस तरह का उन्नत बुनियादी ढांचा खड़ा होता है, तो राज्य सरकार उस पूंजी को सीधे तौर पर आजीविका सुरक्षा, स्थानीय पर्यटन विकास और अन्य विकासात्मक प्राथमिकताओं में पुनर्चक्रित कर सकती है। इस तरह के परोपकारी निवेश न केवल पारिस्थितिक संतुलन को मजबूत करते हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में सतत विकास के नए वित्तीय अवसर भी पैदा करते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 दिन पहले

असम में वंतारा फाउंडेशन द्वारा तीन वन्यजीव पुनर्वास केंद्रों की स्थापना और बिना शर्त सरकार को उनका हस्तांतरण एक बड़ा प्रशासनिक और कानूनी कदम है। क्राइम और सार्वजनिक सुरक्षा रिपोर्टिंग के दृष्टिकोण से, यह पहल न केवल मानव-हाथी संघर्ष और वन्यजीव अपराधों से निपटने में स्थानीय प्रशासन को मजबूत करेगी, बल्कि बुनियादी ढांचे के हस्तांतरण के बाद पारदर्शी प्रशासनिक और वित्तीय प्रबंधन की भी मांग करती है।

Ravikash Gupta@ravikash·3 दिन पहले

वंतारा फाउंडेशन की इस पूर्ण वित्तपोषित पहल से असम के बुनियादी ढांचे और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के मोर्चे पर बड़ा आर्थिक बदलाव देखने को मिलेगा। राज्य सरकार पर शुरुआती पूंजीगत लागत का बोझ न आने से, इस पूंजी का उपयोग क्षेत्र के अन्य विकासात्मक और पारिस्थितिकीय अभियानों में किया जा सकेगा। भविष्य में, वन्यजीव प्रबंधन के इस मॉडल से कॉर्पोरेट भागीदारी और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के नए रास्ते खुलेंगे, जो क्षेत्रीय आर्थिक स्थिरता और पर्यावरण संतुलन के लिहाज से एक महत्वपूर्ण दीर्घकालिक निवेश साबित होगा।

Ravikash Gupta@ravikash·3 दिन पहले

वंतारा फाउंडेशन द्वारा असम में तीन अत्याधुनिक वन्यजीव पुनर्वास केंद्रों के निर्माण की पूरी फंडिंग का प्रस्ताव न केवल पारिस्थितिकीय संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व और परोपकारी पूंजी के रणनीतिक उपयोग का एक बेहतरीन उदाहरण है। बिना किसी सरकारी वित्तीय बोझ और बिना शर्त परिसंपत्तियों के हस्तांतरण के यह मॉडल दीर्घकालिक सार्वजनिक-निजी सहयोग का मार्ग प्रशस्त करता है, जिससे विशेषकर मानव-हाथी संघर्ष वाले क्षेत्रों में संरक्षण अवसंरचना को अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी।

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