जयपुर ग्रामीण के बधाल गांव में पले-बढ़े डॉ. भागचंद बधाल ने एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर देश की सर्वोच्च प्रशासनिक व्यवस्था तक का सफर तय किया है। एक किसान परिवार में जन्मे डॉ. बधाल को राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) से प्रमोट कर अब भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में शामिल कर लिया गया है। इस पदोन्नति की खबर पहुंचते ही बधाल गांव समेत आसपास के ग्रामीण इलाकों में उत्साह का माहौल बन गया और स्थानीय लोगों ने इस उपलब्धि को पूरे क्षेत्र के मान-सम्मान से जोड़ा।
साधारण पृष्ठभूमि और प्राथमिक शिक्षा की शुरुआत
डॉ. भागचंद बधाल की यह उपलब्धि उन युवाओं के लिए प्रेरक मानी जा रही है जो सीमित साधनों में बड़े लक्ष्य साधने की कोशिश करते हैं। उनका आरंभिक शैक्षणिक जीवन किसी महंगे निजी संस्थान या बड़े शहर के नामी स्कूल में नहीं बीता, बल्कि गांव की चौखट और सरकारी स्कूल के सामान्य माहौल में शुरू हुआ। रोजमर्रा के अभावों और सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने अपनी पढ़ाई कभी रुकने नहीं दी। कड़े अनुशासन, नियमित अध्ययन और अटूट लगन को अपनी मुख्य ताकत बनाते हुए उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की ओर कदम बढ़ाए और आखिरकार राज्य प्रशासनिक सेवा में चयनित होकर सेवा की राह पकड़ी।
प्रशासनिक करियर और अहम पदों की जिम्मेदारियां
राजस्थान प्रशासनिक सेवा में आने के बाद डॉ. भागचंद ने राज्य शासन के भीतर कई संवेदनशील और महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दीं। वे प्रदेश के मुख्यमंत्री के ओएसडी (विशेष कार्य अधिकारी) की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इसके अतिरिक्त, राज्य कर्मचारी चयन बोर्ड के सचिव के पद पर रहते हुए उन्होंने भर्ती प्रक्रियाओं का प्रबंधन देखा और कर्मचारी बीमा विभाग के निदेशक के तौर पर भी महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन किया। फील्ड पोस्टिंग के दौरान उन्होंने कई उपखंडों में उपखंड अधिकारी (एसडीओ) के रूप में कार्य करते हुए कानून-व्यवस्था और स्थानीय प्रशासन को संभाला। वर्तमान समय में डॉ. बधाल जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) में अतिरिक्त आयुक्त पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
अभ्यर्थियों के लिए पुस्तक और सामाजिक सहयोग
प्रशासनिक सेवा की मुश्किल डगर से खुद गुजरने के कारण डॉ. भागचंद बधाल उन चुनौतियों से भली-भांति वाकिफ रहे, जिनका सामना ग्रामीण पृष्ठभूमि के अभ्यर्थी करते हैं। इसी सोच के तहत उन्होंने 'कैसे बनते हैं आरएएस' शीर्षक से एक पुस्तक लिखी, ताकि प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने वाले अभ्यर्थियों को सही दिशा, स्पष्ट रणनीति और सटीक अध्ययन पद्धति समझ आ सके। इस पुस्तक के माध्यम से उन्होंने अभ्यर्थियों को व्यावहारिक सलाह और परीक्षा प्रबंधन के तौर-तरीके सुझाए।
प्रशासनिक दायित्वों के अलावा वे सामाजिक सरोकारों से भी जुड़े रहे हैं। गांव के लोगों के अनुसार, डॉ. बधाल जयपुर में उच्च शिक्षा या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे जरूरतमंद और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की लगातार सहायता करते हैं। वे ऐसे छात्र-छात्राओं को रहने के लिए आवास की सुविधा, पढ़ाई की फीस और जरूरी आर्थिक संसाधन जुटाने में प्रत्यक्ष सहयोग देते रहे हैं। एक किसान के बेटे का सरकारी स्कूल से निकलकर पहले RAS और फिर IAS तक का मुकाम पाना आज उन सभी युवाओं के लिए एक मजबूत नजीर बन चुका है जो सीमित संसाधनों के बावजूद प्रशासनिक सेवा में आने का सपना देखते हैं।



















