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बरेली की ऐतिहासिक नकटिया नदी का कायाकल्प, कैंटोनमेंट बोर्ड ने तैयार किया 4 चरणों वाला पुनरुद्धार प्लानउत्तर प्रदेश
18 अग॰ 2026, 1:38 pm (25 दिन पहले)· 2

बरेली की ऐतिहासिक नकटिया नदी का कायाकल्प, कैंटोनमेंट बोर्ड ने तैयार किया 4 चरणों वाला पुनरुद्धार प्लान

1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की साक्षी रही 50 किलोमीटर लंबी नकटिया नदी को प्रदूषण और अतिक्रमण से बचाने के लिए बरेली छावनी परिषद ने वैज्ञानिक पुनरुद्धार योजना की शुरुआत की है। चार अलग-अलग चरणों में चलने वाले इस अभियान के तहत कचरा सफाई, साइंटिफिक मैपिंग, जल परीक्षण और बायो-रीमेडिएशन के जरिए नदी के पारिस्थितिक तंत्र को दोबारा संवारा जाएगा।

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में ऐतिहासिक पहचान रखने वाली नकटिया नदी को उसके पुराने स्वरूप में लौटाने की एक व्यापक वैज्ञानिक पहल शुरू की गई है। कभी 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की गवाह रही यह नदी आज गंभीर शहरी प्रदूषण, प्लास्टिक कचरे और बेतहाशा अतिक्रमण की वजह से अपना अस्तित्व खोने के कगार पर पहुंच चुकी है। इस बिगड़ती स्थिति को देखते हुए बरेली छावनी परिषद ने नदी को पुनर्जीवित करने के लिए एक महत्वाकांक्षी चार-चरण योजना तैयार की है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक अध्ययनों, सफाई अभियानों, मैपिंग और बायो-रीमेडिएशन तकनीकों के माध्यम से नदी के प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र को दोबारा बहाल करना है।

1857 की क्रांति और नकटिया नदी का ऐतिहासिक महत्व

लगभग 50 किलोमीटर के प्राकृतिक प्रवाह वाली नकटिया नदी सिर्फ एक जलधारा भर नहीं है, बल्कि यह बरेली के गौरवशाली और संघर्षपूर्ण इतिहास की एक अमर निशानी है। यह नदी बरेली के ग्रामीण और शहरी इलाकों से गुजरते हुए पड़ोस के शाहजहांपुर जिले में जाकर रामगंगा नदी में मिल जाती है। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बरेली अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा था। ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार, 5 मई 1858 को नकटिया नदी के तट और इसके पुल के आसपास स्वतंत्रता सेनानियों और ब्रिटिश सेना के बीच एक भीषण और ऐतिहासिक युद्ध लड़ा गया था। प्रसिद्ध क्रांतिकारी नेता खान बहादुर खान के कुशल नेतृत्व में भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजी हुकूमत के सैनिकों का डटकर मुकाबला किया था। इस ऐतिहासिक घटना के कारण नकटिया नदी को क्षेत्र की स्वतंत्रता संग्राम विरासत का एक अटूट हिस्सा माना जाता है।

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प्रदूषण और बेतहाशा अतिक्रमण के संकट में फंसी जलधारा

समय बीतने के साथ-साथ बरेली शहर का तेजी से विस्तार हुआ, लेकिन इस विकास की भारी कीमत नकटिया नदी को चुकानी पड़ी। अनियंत्रित शहरीकरण, औद्योगिक और घरेलू सीवर के गंदे पानी के सीधे बहाव, और बड़े पैमाने पर फेंके जाने वाले प्लास्टिक तथा ठोस कचरे ने नदी के पारिस्थिकीय संतुलन को पूरी तरह नष्ट कर दिया। इसके अलावा, नदी के किनारों पर हुए अवैध अतिक्रमणों के कारण इसका प्राकृतिक पाट लगातार सिकुड़ता चला गया। बरेली कैंटोनमेंट बोर्ड की सीईओ डॉ. तनु जैन के अनुसार, स्थिति इतनी चिंताजनक हो चुकी है कि कई स्थानों पर यह ऐतिहासिक नदी एक साधारण गंदे नाले के रूप में नजर आने लगी है। नदी के बहाव में रुकावट आने और पानी में विषाक्त तत्वों के जमा होने के कारण इसका प्राकृतिक जलीय जीवन पूरी तरह प्रभावित हुआ है।

चार प्रमुख चरणों में संचालित होगा पुनरुद्धार अभियान

नकटिया नदी के जीर्णोद्धार के लिए बरेली छावनी परिषद ने एक सुनियोजित और वैज्ञानिक तरीका अपनाया है, जिसे चार स्पष्ट चरणों में बांटा गया है।

पहले चरण के अंतर्गत नदी के चुनिंदा संवेदनशील हिस्सों और उसके आसपास के तटवर्ती क्षेत्रों में व्यापक सफाई अभियान चलाया जाएगा। इस प्रक्रिया में नदी में जमा प्लास्टिक कचरे, ठोस अपशिष्ट और मलबे को बाहर निकाला जाएगा। इसके साथ ही, निकाले जाने वाले कचरे की कुल मात्रा, उसके प्रकार और कचरे के मुख्य स्थानों का एक विस्तृत रिकॉर्ड भी तैयार किया जाएगा ताकि भविष्य के कचरा प्रबंधन में मदद मिल सके।

दूसरे चरण में संपूर्ण चिन्हित नदी क्षेत्र की आधुनिक वैज्ञानिक मैपिंग कराई जाएगी। इस मैपिंग प्रक्रिया के जरिए नदी के मुख्य प्रवाह मार्ग, उसमें आकर गिरने वाले गंदे नालों के प्रवेश बिंदुओं, कचरा इकट्ठा होने वाले हॉटस्पॉट, प्रदूषण के संभावित स्रोतों और जलभराव वाले क्षेत्रों की सटीक पहचान की जाएगी।

तीसरे चरण के तहत नदी के अलग-अलग हिस्सों और बहाव बिंदुओं से पानी के नमूने एकत्र किए जाएंगे। इन नमूनों की प्रयोगशालाओं में वैज्ञानिक जांच कराई जाएगी, जिससे पानी की मौजूदा जैविक और रासायनिक गुणवत्ता का सही आकलन हो सके और प्रदूषण फैलाने वाले मुख्य कारकों को पहचाना जा सके।

चौथे चरण में प्राप्त वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों और बायो-रीमेडिएशन प्रक्रिया को लागू किया जाएगा। इसके तहत प्राकृतिक फिल्ट्रेशन तरीकों और क्षेत्र की उपयुक्त देशज वनस्पतियों का उपयोग करके नदी के पारिस्थिकीय तंत्र और जल की गुणवत्ता में सुधार करने का प्रयास किया जाएगा।

जनभागीदारी और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट से मिलेगी नई जिंदगी

बरेली छावनी परिषद का मानना है कि नकटिया नदी को बचाने की यह मुहिम केवल एक सामान्य सफाई कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखने की एक बहुआयामी कोशिश है। पूरे वैज्ञानिक अध्ययन और मैपिंग का काम पूरा होने के बाद एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इस रिपोर्ट को आगे की तकनीकी विशेषज्ञता और आवश्यक वित्तीय सहयोग प्राप्त करने के लिए संबंधित सरकारी विभागों और संस्थाओं के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। अधिकारियों का यह भी मानना है कि इस योजना की वास्तविक सफलता प्रशासनिक प्रयासों के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों की सक्रिय जनभागीदारी पर निर्भर करेगी। यदि स्थानीय निवासी इस ऐतिहासिक नदी को स्वच्छ रखने में अपना सहयोग दें, तो नकटिया नदी एक बार फिर अपने पुराने गौरव को हासिल कर बरेली की प्राकृतिक और ऐतिहासिक पहचान बन सकती है।

सवाल-जवाब

नकटिया नदी का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह नदी संघर्ष का प्रमुख केंद्र थी। 5 मई 1858 को खान बहादुर खान के नेतृत्व में क्रांतिकारियों ने नकटिया के तट पर ब्रिटिश सेना का डटकर मुकाबला किया था।
नकटिया नदी का प्रवाह क्षेत्र कितना लंबा है और यह कहां मिलती है?
यह नदी लगभग 50 किलोमीटर लंबी है, जो बरेली के ग्रामीण और शहरी इलाकों से बहती हुई शाहजहांपुर जिले में रामगंगा नदी में मिल जाती है।
नकटिया नदी के अस्तित्व पर क्या खतरे मंडरा रहे हैं?
शहरी विस्तार, सीवर का गंदा पानी, प्लास्टिक कचरा और अतिक्रमण के कारण नदी का प्राकृतिक पाठ सिकुड़ गया है और यह एक नाले का रूप ले चुकी है।
कैंटोनमेंट बोर्ड के पुनरुद्धार प्लान में कौन से चार चरण शामिल हैं?
इस योजना में पहले चरण में प्लास्टिक सफाई, दूसरे में वैज्ञानिक मैपिंग, तीसरे में जल नमूनों की जांच और चौथे में बायो-रीमेडिएशन तथा देशी वनस्पतियों का रोपण शामिल है।
इस प्रोजेक्ट के आगे की रणनीति क्या है?
वैज्ञानिक अध्ययन के बाद एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी, जिसे वित्तीय और तकनीकी सहायता हासिल करने के लिए आगे भेजा जाएगा।
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