पाली के भीतरी बाजार में प्रसिद्ध सोमनाथ महादेव मंदिर के पास एक ऐसी दुकान है, जिसे ग्राहक बिना नाम जाने भी पहचान लेते हैं। न कोई बोर्ड लगा है, न ही कोई आधिकारिक नाम रखा गया है, फिर भी मिर्चीबड़े और पकौड़ों के शौकीन दूर-दूर से वहां पहुंचते हैं। करीब 70 साल पुराने इस स्वाद को तीन पीढ़ियों ने संभाला है, और अभी यह काम कमलेश वैष्णव के हाथों से चल रहा है।
नाम की जगह स्वाद ने बनाई पहचान
दुकान का सफर 60 से 70 साल पुराना है और अब यह करीब 70 साल पुरानी दुकान मानी जाती है। समय के साथ जमाना बदला और लोगों की खान-पान की आदतों में बदलाव आए, लेकिन यहां मिर्चीबड़े और पकौड़ों की रेसिपी वही रखी गई। दशकों पुराना पारंपरिक जायका रत्ती भर नहीं बदला, इसलिए ग्राहकों के लिए दुकान का नाम कम और स्वाद अधिक मायने रखता है। सुबह और शाम दोनों वक्त ग्राहक पकौड़े और मिर्चीबड़े खाने लगातार जुटते रहते हैं।
तीन पीढ़ियों से वही भरोसा
फिलहाल दुकान कमलेश वैष्णव संभाल रहे हैं। उनके हाथों से बने मिर्चीबड़े और पकौड़े दशकों पुराने स्वाद को आगे बढ़ा रहे हैं। पीढ़ियों से चला आ रहा यह काम तीन पीढ़ियों का भरोसा बन चुका है। बाजार में खाने के विकल्प बदलते रहे, लेकिन दुकान ने अपनी रेसिपी और पारंपरिक जायके में बदलाव नहीं किया। यही लगातारपन शहर के लोगों और दूर के गांवों से पाली पहुंचने वालों को वापस यहां ले आता है। वे जानते हैं कि दुकान का कोई नाम नहीं है, फिर भी सीधे उसी ठिकाने पर पहुंचते हैं और हाजिरी लगाना नहीं भूलते।
पकौड़ों के साथ चटनी भी खास
यहां केवल मिर्चीबड़े और पकौड़े ही नहीं, बल्कि उनके साथ दी जाने वाली चटनी भी ग्राहकों की पसंद का हिस्सा है। चटनी का स्वाद अलग बताया जाता है और लोग इसे खूब पसंद करते हैं। गरमागरम पकौड़े और मिर्चीबड़े कड़ाही से छनकर बाहर आते ही मिनटों में खत्म हो जाते हैं। इसलिए यहां का आकर्षण केवल खाने तक सीमित नहीं है, बल्कि ताज़ा पकवानों की तुरंत बनने वाली मांग भी ग्राहकों को खींचती है।
मानसून में जगह भी कम पड़ती है
दुकान बिना नाम वाली होने के बावजूद लोकप्रिय है, और इसकी पकड़ यहां लगने वाली भीड़ से साफ दिखती है। आम दिनों में भी ग्राहकों का तांता हर वक्त चलता रहता है। मानसून या बारिश के मौसम में भीड़ इतनी बढ़ जाती है कि दुकान के बाहर खड़े रहने की जगह भी नहीं मिलती। ऐसे मौसम में कड़ाही से निकलते ही गरमागरम मिर्चीबड़े और चटपटे पकौड़े मिनटों में गायब हो जाते हैं।
नियमित ग्राहक क्या कहते हैं
सालों से इस दुकान पर आने वाले नियमित ग्राहक अजय सिंह के अनुसार, दुकान की सबसे बड़ी खासियत वही पुराना और शुद्ध स्वाद है। उनका कहना है कि पाली में मिर्चीबड़े की कई दुकानें होंगी, लेकिन कमलेश वैष्णव के हाथों से बने पकौड़ों और मिर्चीबड़े जैसा स्वाद कहीं और नहीं मिलता। अजय सिंह के लिए दुकान का नाम मायने नहीं रखता, क्योंकि यहां काम और स्वाद बोलते हैं। यह राय इस बात को साफ करती है कि ग्राहकों की नजर में पहचान का असली आधार साइनबोर्ड नहीं, बल्कि हर बार मिलने वाला वही स्वाद है।
मंदिर और बाजार के रास्ते की पहचान
प्रसिद्ध सोमनाथ महादेव मंदिर के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु हों या भीतरी बाजार में खरीदारी करने आए लोग, दोनों ही इस दुकान का जायका चखे बिना वापस नहीं लौटते। शहर से आने वाले ग्राहकों के साथ दूर के गांवों से पाली पहुंचने वाले लोग भी यहां रुकते हैं। पिछले 70 साल में यह लगातार ग्राहकों की पसंद बनी रही और अब पाली के खान-पान की धरोहर बन चुकी है। नाम और बोर्ड की अनुपस्थिति के बावजूद इसकी लोकप्रियता कम नहीं हुई है।



















