बारिश के मौसम में केले की फसल बचाने के लिए किसान अपनाएं ये जरूरी तरीके, कृषि वैज्ञानिक की सलाहभारत
2 घंटे पहले· 2

बारिश के मौसम में केले की फसल बचाने के लिए किसान अपनाएं ये जरूरी तरीके, कृषि वैज्ञानिक की सलाह

बारिश के मौसम में केले की फसल को जलभराव, पत्ती धब्बा, तना गलन और जड़ सड़न जैसी बीमारियों से बचाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र सुल्तानपुर के वैज्ञानिक डॉक्टर सूर्य प्रकाश मिश्र ने किसानों को जरूरी सुझाव दिए हैं।

मानसून का मौसम अभी पूरे जोरों पर है और इसी बारिश के बीच खेतों में केले के पौधे धीरे-धीरे बड़े हो रहे हैं. कई किसान अब भी अपने खेतों में केले की नई रोपाई कर रहे हैं. यही बारिश का मौसम केले की फसल के लिए फायदे के साथ-साथ कई खतरे भी लेकर आता है, क्योंकि नमी बढ़ते ही कीट और रोग तेजी से पनपने लगते हैं. ऐसे में सवाल यह है कि किसान अपने केले के पौधों को इन खतरों से कैसे बचाएं, ताकि पौधा तेजी से बढ़े और फल भी अच्छी क्वालिटी का मिले. इस बारे में कृषि विज्ञान केंद्र, सुल्तानपुर में तैनात कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर सूर्य प्रकाश मिश्र ने किसानों के लिए कुछ आसान लेकिन बेहद जरूरी सुझाव दिए हैं, जिन्हें अपनाकर केले की फसल को बारिश के मौसम में सुरक्षित रखा जा सकता है.

सबसे पहले खेत से पानी निकालने का इंतजाम करें

डॉक्टर सूर्य प्रकाश मिश्र के मुताबिक बारिश का मौसम वैसे तो केले की खेती के लिए अच्छा माना जाता है, लेकिन अगर बारिश लगातार होती रहे तो दिक्कतें भी शुरू हो जाती हैं. खेत में पानी भर जाने पर केले के पौधों की जड़ों तक ऑक्सीजन ठीक से नहीं पहुंच पाती और इसी वजह से पौधे धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगते हैं. जड़ों में ऑक्सीजन की कमी होते ही पौधे की बढ़वार रुक जाती है और इसका असर सीधे फल की सेहत पर भी पड़ता है. इसीलिए उन्होंने सलाह दी है कि केले की खेती में सबसे पहला काम जल निकासी का सही इंतजाम करना है, ताकि खेत में पानी ज्यादा देर तक जमा न रह सके और जड़ों को सांस लेने की जगह मिलती रहे.

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पौधों की नियमित जांच करें, लक्षण दिखते ही करें इलाज

किसानों को अपने खेत का नियमित रूप से निरीक्षण करते रहना चाहिए. अगर किसी पौधे की पत्तियां पीली पड़ने लगें, तना गलने लगे या पौधा मुरझाया हुआ नजर आए तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. ऐसे लक्षण दिखते ही तुरंत पहचान कर इलाज शुरू कर देना चाहिए. डॉक्टर मिश्र का कहना है कि अगर शुरुआती स्टेज में ही इन लक्षणों को पहचान लिया जाए तो बीमारी को आगे फैलने से रोका जा सकता है और पूरी फसल को बचाया जा सकता है. देरी होने पर यही छोटी सी बीमारी पूरे खेत में फैलकर बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है.

पत्ती धब्बा, तना गलन और जड़ सड़न जैसी बीमारियों से बचाव

बारिश के मौसम में केले की फसल पर मौसम के हिसाब से अलग-अलग रोग और कीट हमला करते हैं. इस दौरान पत्ती धब्बा रोग, तना गलन, जड़ सड़न के साथ-साथ कई तरह के कीटों का प्रकोप भी बढ़ जाता है. इससे बचने के लिए खेत को हमेशा साफ सुथरा रखना जरूरी है और खरपतवार को समय-समय पर हटाते रहना चाहिए, क्योंकि गंदगी और खरपतवार ही कीटों और रोगों के पनपने की सबसे बड़ी वजह बनते हैं. जो पत्तियां संक्रमित नजर आएं, उन्हें काटकर खेत से बाहर ले जाकर नष्ट कर देना चाहिए. जरूरत पड़ने पर ही फफूंदनाशी और कीटनाशी दवाओं का इस्तेमाल करना चाहिए और इनकी मात्रा भी हमेशा सीमित रखनी चाहिए, क्योंकि दवा की अधिक मात्रा पौधों को फायदे की जगह उल्टा नुकसान पहुंचा सकती है.

सवाल-जवाब

बारिश के मौसम में केले की फसल के लिए सबसे बड़ा खतरा क्या है?
खेत में पानी भर जाने से जड़ों को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती जिससे पौधे कमजोर पड़ने लगते हैं, इसके अलावा पत्ती धब्बा, तना गलन और जड़ सड़न जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है.
किसानों को जल निकासी पर सबसे पहले ध्यान क्यों देना चाहिए?
क्योंकि पानी जमा रहने से जड़ों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंचती और पौधे धीरे-धीरे कमजोर होकर मुरझाने लगते हैं.
पौधों में बीमारी के शुरुआती लक्षण क्या हो सकते हैं?
पत्तियों का पीला पड़ना, तने का गलना और पौधे का मुरझाया हुआ दिखना बीमारी के शुरुआती संकेत हैं.
संक्रमित पत्तियों का क्या करना चाहिए?
संक्रमित पत्तियों को काटकर खेत से बाहर ले जाकर नष्ट कर देना चाहिए, ताकि बीमारी दूसरे पौधों तक न फैले.
फफूंदनाशी और कीटनाशी दवाओं का इस्तेमाल कैसे करना चाहिए?
इनका इस्तेमाल जरूरत पड़ने पर ही और सीमित मात्रा में करना चाहिए, क्योंकि ज्यादा मात्रा पौधों को नुकसान पहुंचा सकती है.
यह सलाह किसने दी है?
यह सलाह कृषि विज्ञान केंद्र, सुल्तानपुर में तैनात कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर सूर्य प्रकाश मिश्र ने दी है.

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