घंघेरा गांव की सड़क पर घटिया निर्माण सामग्री के आरोप, ग्रामीणों में आक्रोशउत्तर प्रदेश
2 घंटे पहले· 2

घंघेरा गांव की सड़क पर घटिया निर्माण सामग्री के आरोप, ग्रामीणों में आक्रोश

चंदौली के मुगलसराय क्षेत्र स्थित घंघेरा गांव में चल रहे सड़क निर्माण कार्य में कमजोर ईंटों और लापरवाही के आरोप लगे हैं, ग्रामीणों ने तकनीकी जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।

चंदौली जिले के मुगलसराय विधानसभा क्षेत्र में आने वाले घंघेरा गांव में इन दिनों सड़क निर्माण का काम चल रहा है, लेकिन यह काम शुरू से ही विवादों में घिर गया है। मौके पर करीब 10 से 12 मजदूर सड़क बनाने में जुटे हैं, मगर गांव के लोगों का कहना है कि जिस तरह से यह सड़क बनाई जा रही है, उसमें तय मानकों का पालन नहीं हो रहा। ग्रामीणों के मुताबिक सड़क में जो ईंटें लगाई जा रही हैं, वे घटिया किस्म की हैं और पूरे निर्माण में लापरवाही साफ झलक रही है।

शिकायतों के बावजूद जारी है काम

गांव के निवासी लक्ष्मण गोंड ने बताया कि उन्होंने ठेकेदार और इससे जुड़े जिम्मेदार लोगों से कई बार निर्माण की गुणवत्ता को लेकर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि सड़क में एक नंबर की मजबूत ईंटों की जगह कमजोर और घटिया ईंटें लगाई जा रही हैं। लक्ष्मण गोंड ने आगे कहा कि गांव वालों ने यह मुद्दा एक-दो बार नहीं बल्कि बार-बार उठाया है, फिर भी निर्माण उसी ढर्रे पर चल रहा है। उन्होंने एक और गंभीर सवाल उठाया कि सड़क की जोड़ाई में कितनी मात्रा में सीमेंट डाला जा रहा है, इसकी कोई स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी किसी को नहीं दी जा रही। उनके मुताबिक पूरे निर्माण कार्य में पारदर्शिता की भारी कमी है और गुणवत्ता के मानकों को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है।

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सड़क किनारे मिट्टी से भराई का आरोप

गांव के ही एक युवा सूरज ने भी इस निर्माण कार्य पर सवाल खड़े किए। उनका आरोप है कि सड़क के दोनों किनारों पर जो सही सामग्री डाली जानी चाहिए, उसकी जगह सिर्फ मिट्टी भरकर काम पूरा किया जा रहा है। सूरज ने चेतावनी दी कि अगर निर्माण इसी लापरवाह तरीके से चलता रहा, तो बरसात के मौसम में यह सड़क ज्यादा दिन टिक नहीं पाएगी और किनारों के टूटने का खतरा बना रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सड़क में इस्तेमाल हो रही ईंटों और बाकी सामग्री की गुणवत्ता भी संतोषजनक नहीं दिखती। सूरज ने मांग की कि निर्माण में लगाई जा रही सामग्री की तकनीकी जांच कराई जाए, ताकि असली सच्चाई सामने आ सके और गांव वालों की आशंकाओं का समाधान हो।

सरकारी पैसे की जवाबदेही की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क सरकारी धन से बनाई जा रही है और यह पैसा आम जनता के टैक्स से ही आता है, इसलिए निर्माण कार्य में गुणवत्ता और तय मानकों का पूरी तरह पालन होना चाहिए। उनका तर्क है कि अगर निर्माण में लापरवाही हुई तो इसका सीधा नुकसान गांव वालों को ही झेलना पड़ेगा, क्योंकि थोड़े ही समय में सड़क खराब होने लगेगी। इसी वजह से ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से मांग की है कि निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराई जाए और अगर कहीं भी तय मानकों का उल्लंघन मिलता है, तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

जांच अब भी अधूरी, ठेकेदार खामोश

ग्रामीणों के लगातार आरोपों के बावजूद घंघेरा गांव में सड़क निर्माण का काम रुका नहीं है, बल्कि लगातार जारी है। हालांकि इन आरोपों को लेकर अभी तक ठेकेदार या संबंधित विभाग के किसी भी अधिकारी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे यह साफ नहीं हो पाया है कि निर्माण कार्य वाकई तय तकनीकी मानकों के अनुसार हो रहा है या नहीं। अगर आगे चलकर जांच में ग्रामीणों की शिकायतें सही साबित होती हैं, तो यह सरकारी निर्माण परियोजनाओं की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर देगा। वहीं दूसरी तरफ, अगर जांच में निर्माण कार्य पूरी तरह मानकों पर खरा उतरता है, तो इससे ग्रामीणों की आशंकाएं भी दूर हो जाएंगी। फिलहाल गांव के लोग सड़क निर्माण की गुणवत्ता की गहन जांच और संबंधित अधिकारियों के तुरंत हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं, ताकि आने वाले समय में इस सड़क को लेकर कोई बड़ी दिक्कत खड़ी न हो।

सवाल-जवाब

यह मामला कहां का है?
यह मामला चंदौली जिले के मुगलसराय विधानसभा क्षेत्र स्थित घंघेरा गांव का है, जहां सड़क निर्माण का काम चल रहा है।
ग्रामीणों का मुख्य आरोप क्या है?
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क में घटिया गुणवत्ता की ईंटें इस्तेमाल की जा रही हैं और निर्माण में लापरवाही बरती जा रही है।
लक्ष्मण गोंड ने क्या शिकायत की?
लक्ष्मण गोंड ने बताया कि उन्होंने कई बार ठेकेदार से शिकायत की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई, और सीमेंट मिश्रण में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया।
सूरज ने क्या दावा किया?
सूरज ने आरोप लगाया कि सड़क के किनारों पर उचित सामग्री की जगह मिट्टी से भराई की जा रही है, जिससे बरसात में सड़क टूटने का खतरा है।
ग्रामीण क्या मांग कर रहे हैं?
ग्रामीण निर्माण सामग्री की तकनीकी जांच और निष्पक्ष जांच के बाद जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
ठेकेदार या विभाग की क्या प्रतिक्रिया आई है?
अभी तक ठेकेदार या संबंधित विभाग के अधिकारियों की तरफ से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सड़क का निर्माण किस पैसे से हो रहा है?
यह सड़क सरकारी धन से बनाई जा रही है, जो जनता के टैक्स से आता है।
आगे क्या हो सकता है?
अगर जांच में ग्रामीणों की शिकायतें सही पाई जाती हैं तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो सकती है, वरना जांच सही मिलने पर ग्रामीणों की आशंकाएं दूर हो जाएंगी।

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