भारतीय सेना की युद्ध तत्परता और परिचालन क्षमताओं को अभूतपूर्व मजबूती देने के लिए भारत सरकार ने एक बड़ा रक्षा सौदा किया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, भारत ने अमेरिका से युद्ध में परखे जा चुके आधुनिक जैवलिन मिसाइल सिस्टम को खरीदने के समझौते को अंतिम रूप दे दिया है। भारत में तैनात अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस सौदे की आधिकारिक पुष्टि करते हुए इसे दोनों देशों के सैन्य संबंधों में एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम करार दिया है। इस रक्षा समझौते से भारतीय सेना की पैदल टुकड़ियों (इन्फैंट्री) की एंटी-आर्मर मारक क्षमता में भारी इजाफा होने की उम्मीद है।
भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंधों का नया अध्याय
इस द्विपक्षीय समझौते के महत्व को रेखांकित करते हुए अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच रक्षा सहयोग अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुका है। उन्होंने मई 2026 में संपन्न हुए शांगरी-ला डायलॉग का उल्लेख किया, जहां अमेरिकी युद्ध मंत्रीपीट हेगसेथ ने दोनों देशों के बीच बढ़ते सामरिक तालमेल की बात कही थी। राजदूत गोर के अनुसार, यह समझौता केवल मिसाइल प्रणालियों की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच भविष्य में सह-उत्पादन (co-production) के नए और संभावनाशील रास्ते भी खुलेंगे।
जैवलिन मिसाइल सिस्टम की तकनीकी खूबियां और मारक प्रभाव
जैवलिन सिस्टम की गिनती विश्व के सबसे सटीक और भरोसेमंद मध्यम दूरी के एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल हथियारों में की जाती है। इस उन्नत मिसाइल प्रणाली का निर्माण अमेरिका की नामचीन रक्षा निर्माता कंपनी लॉकहीड मार्टिन द्वारा किया जाता है। वर्तमान में अमेरिकी थल सेना, अमेरिकी मरीन कॉर्प्स और दुनिया के कई अन्य मित्र देशों की सेनाएं युद्ध क्षेत्र में इसका व्यापक इस्तेमाल करती हैं। इसे मुख्य रूप से दुश्मन के भारी बख्तरबंद वाहनों, मुख्य युद्धक टैंकों और कंक्रीट की मजबूत किलेबंदी वाली संरचनाओं को पूरी तरह ध्वस्त करने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है।
'फायर एंड फॉरगेट' तकनीक और थर्मल गाइडेंस की खासियत
जैवलिन मिसाइल प्रणाली का सबसे प्रमुख तकनीकी लाभ इसकी 'फायर-एंड-फॉरगेट' क्षमता है, जो अत्याधुनिक थर्मल गाइडेंस तकनीक पर काम करती है। इसके माध्यम से इन्फैंट्री सैनिक लक्ष्य को लॉक करके मिसाइल दागने के तुरंत बाद खुद को सुरक्षित स्थान पर ले जा सकते हैं, क्योंकि मिसाइल को उड़ान के दौरान मैन्युअल रूप से गाइड करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। अपनी उच्च मोबिलिटी (गतिशीलता) और सुगमता से ले जाने योग्य (पोर्टेबिलिटी) होने के कारण यह प्रणाली कठिन और विषम परिस्थितियों वाले युद्ध क्षेत्रों में भारतीय सैनिकों को दुश्मन के टैंकों के खिलाफ सटीक और त्वरित कार्रवाई करने में सक्षम बनाएगी।
सीमा सुरक्षा में मजबूती और 2025 की मंजूरी का घटनाक्रम
यह समझौता उस प्रक्रिया का अगला चरण है जिसकी शुरुआत साल 2025 के अंत में हुई थी, जब अमेरिका ने भारत को जैवलिन मिसाइल सिस्टम और एक्सकैलिबर प्रोजेक्टाइल्स की बिक्री के प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दी थी। भारत की सीमाओं पर उत्पन्न होने वाली सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए इस अत्याधुनिक हथियार का बेड़े में शामिल होना भारतीय थल सेना की आक्रामक और रक्षात्मक क्षमताओं को नई ऊंचाई प्रदान करेगा। दोनों देशों के प्रगाढ़ होते संबंधों पर अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने अपने बयान में कहा, "हमारे दोनों देशों के बीच सहयोग अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर है।"





















