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महाराष्ट्र में 5 से 10 लाख रुपये में फर्जी मार्कशीट बेचने वाले गिरोह के मुख्य आरोपी परिमल गौरकर को पुलिस ने नागपुर से दबोचामहाराष्ट्र
28 अग॰ 2026, 10:19 pm (1 घंटे पहले)· 2

महाराष्ट्र में 5 से 10 लाख रुपये में फर्जी मार्कशीट बेचने वाले गिरोह के मुख्य आरोपी परिमल गौरकर को पुलिस ने नागपुर से दबोचा

महाराष्ट्र के चंद्रपुर की पुलिस ने प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों के नाम पर जाली शैक्षणिक दस्तावेज और डिग्रियां तैयार करने वाले गिरोह के मुख्य सरगना को गिरफ्तार किया है। 5 से 10 लाख रुपये में फर्जी प्रमाण पत्र बेचने वाले इस रैकेट में अब तक तीन लोग सलाखों के पीछे पहुँच चुके हैं।

महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले की दुर्गापुर पुलिस ने प्रसिद्ध और नामी विश्वविद्यालयों की बोगस डिग्रियां और मार्कशीट तैयार कर लाखों रुपये ऐंठने वाले एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस की विशेष टीम ने कार्रवाई करते हुए इस फर्जीवाड़ा गिरोह के मुख्य सरगना परिमल बाबूराव गौरकर और उसके प्रमुख सहयोगी अक्षय खोब्रागडे को नागपुर स्थित एक होटल से धर दबोचा। इस सनसनीखेज मामले में अब तक गिरफ्तार किए गए आरोपियों की कुल संख्या बढ़कर तीन हो गई है। पुलिस फिलहाल पकड़े गए दोनों आरोपियों से सघन पूछताछ कर रही है ताकि इस अवैध नेटवर्क से जुड़े अन्य दलालों और फर्जी दस्तावेज खरीदने वालों का पता लगाया जा सके।

नागपुर के होटल से पकड़े गए मुख्य आरोपी

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़ा मामले का सूत्रपात दो दिन पहले हुआ था जब पुलिस ने गिरोह के एक अन्य सदस्य और कथित एजेंट वैभव सोनुले को गिरफ्तार किया था। वैभव सोनुले से पुलिस कस्टडी के दौरान हुई कड़ी पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए, जिसके आधार पर मुख्य सरगना परिमल बाबूराव गौरकर और उसके साथी अक्षय खोब्रागडे की नागपुर में मौजूदगी का पता चला। दुर्गापुर पुलिस ने तुरंत नागपुर के संबंधित होटल में दबिश देकर दोनों को हिरासत में ले लिया। इस बीच, पहले गिरफ्तार किए गए एजेंट वैभव सोनुले की पुलिस रिमांड शुक्रवार को समाप्त हो गई, जिसके बाद उसे स्थानीय अदालत में पेश किया गया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए वैभव सोनुले को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दे दिया है।

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5 से 10 लाख रुपये में फर्जी डिग्रियों का सौदा

जांच अधिकारियों ने इस गिरोह के काम करने के तरीके का खुलासा करते हुए बताया कि नेटवर्क के एजेंट संभावित ग्राहकों की तलाश करते थे। नौकरी की तलाश कर रहे या शैक्षणिक दाखिला पाने की होड़ में लगे लोगों को निशाना बनाकर उन्हें मुख्य आरोपी परिमल गौरकर तक पहुंचाया जाता था। ग्राहक की जरूरत और मांग के अनुसार, नागपुर विश्वविद्यालय, अमरावती विश्वविद्यालय और गोंडवाना विश्वविद्यालय जैसे महाराष्ट्र के प्रमुख संस्थानों के अलावा कर्नाटक, राजस्थान तथा देश के अन्य राज्यों के नामी विश्वविद्यालयों के नाम से जाली डिग्रियां, मार्कशीट और शैक्षणिक प्रमाण पत्र तैयार किए जाते थे। इन नकली और अवैध दस्तावेजों को उपलब्ध कराने के एवज में गिरोह के सदस्य प्रत्येक ग्राहक से 5 से 10 लाख रुपये तक की भारी-भरकम राशि वसूलते थे।

नौकरी, दाखिले और पदोन्नति में इस्तेमाल का अंदेशा

चंद्रपुर पुलिस को गंभीर आशंका है कि इस गिरोह से खरीदी गई बोगस डिग्रियों और मार्कशीट का इस्तेमाल कई लोगों द्वारा विभिन्न संस्थानों में नौकरियां हासिल करने, उच्च शैक्षणिक संस्थानों में दाखिला लेने और सरकारी या निजी क्षेत्रों में पदोन्नति पाने के लिए किया जा चुका है। अब पुलिस जांच का सबसे महत्वपूर्ण और केंद्रीय बिंदु यही है कि आखिर इस विशाल नेटवर्क से किन-किन लोगों ने फर्जी दस्तावेज खरीदे हैं। पुलिस प्रशासन उन तमाम संस्थानों और विभागों की सूची तैयार करने में जुटा है जहां इन बोगस प्रमाणपत्रों को जमा कर अनुचित लाभ उठाया गया हो सकता है।

दलालों के तंत्र और अन्य राज्यों तक जांच का दायरा

मास्टरमाइंड परिमल बाबूराव गौरकर की गिरफ्तारी के बाद पुलिस उससे सिलसिलेवार पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश में हैं कि नकली डिग्रियों और मार्कशीट की छपाई कहां की जाती थी और इसके लिए किन तकनीकी साधनों या प्रिंटिंग प्रेसों का इस्तेमाल होता था। इसके साथ ही, गिरोह से जुड़े अन्य दलालों, बिचौलियों, खरीदारों और अन्य मददगारों के नेटवर्क को खंगाला जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे जांच का दायरा बढ़ेगा और आरोपियों से राज उगलवाए जाएंगे, इस शैक्षणिक फर्जीवाड़े में शामिल कई अन्य बड़े चेहरे बेनकाब होंगे। जांच टीम इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि इस बोगस शैक्षणिक रैकेट के तार महाराष्ट्र के बाहर किन-किन राज्यों और शहरों तक फैले हुए हैं।

सवाल-जवाब

चंद्रपुर में फर्जी डिग्री मामले में किसे गिरफ्तार किया गया है?
पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड परिमल बाबूराव गौरकर और उसके साथी अक्षय खोब्रागडे को नागपुर के एक होटल से गिरफ्तार किया है। इससे पहले एजेंट वैभव सोनुले को पकड़ा गया था।
बोगस डिग्री रैकेट में अब तक कितने आरोपी पकड़े जा चुके हैं?
इस मामले में अब तक कुल तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
फर्जी डिग्री और मार्कशीट के लिए गिरोह कितना पैसा वसूलता था?
आरोपी ग्राहकों की मांग के अनुसार विभिन्न विश्वविद्यालयों के फर्जी दस्तावेजों के बदले 5 से 10 लाख रुपये तक वसूलते थे।
किन-किन विश्वविद्यालयों के नाम पर फर्जी डिग्रियां बनाई जा रही थीं?
नागपुर, अमरावती और गोंडवाना विश्वविद्यालय के अलावा महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान और अन्य राज्यों के विश्वविद्यालयों के नाम से फर्जी डिग्रियां तैयार की जा रही थीं।
आरोपी वैभव सोनुले की वर्तमान स्थिति क्या है?
वैभव सोनुले की पुलिस रिमांड शुक्रवार को पूरी होने के बाद अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·58 मिनट पहले

यह मामला सिर्फ कागजी जालीसाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की शिक्षा और रोजगार व्यवस्था पर सीधा प्रहार है। 5 से 10 लाख रुपये देकर फर्जी डिग्रियां हासिल करने वाले लोगों ने जिन संस्थानों में नौकरियां या पदोन्नति पाई होगी, वहां सुरक्षा और योग्यता से बड़ा समझौता हुआ है। पुलिस की जांच का दायरा अब उन खरीदारों तक पहुंचना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि अयोग्य लोग किन संवेदनशील पदों पर बैठे हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·57 मिनट पहले

यह संगठित फर्जीवाड़ा केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं। इस रैकेट के खुलासे के बाद अब यह अत्यंत आवश्यक हो गया है कि पुलिस उन सभी लाभार्थियों की पहचान करे जिन्होंने इन जाली दस्तावेजों का उपयोग करके नौकरियां या पदोन्नतियां हासिल की हैं। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में भी पूर्व में ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अंतराज्यीय शैक्षणिक माफिया देश की पूरी प्रशासनिक और रोजगार प्रणाली के लिए एक गंभीर सुरक्षा और विश्वसनीयता का संकट पैदा कर रहा है।

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