झुंझुनूं नगर परिषद ने पूरे शहर और हाल ही में इसमें शामिल किए गए 10 नए राजस्व गांवों को आधुनिक स्वच्छता तंत्र से जोड़ने के लिए 340.88 करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की है। राज्य सरकार से मंजूरी और बजट आवंटन मिलने के बाद इस तीसरे सीवरेज प्रोजेक्ट के तहत पूरे शहरी इलाके में 158 किलोमीटर लंबा नया पाइपलाइन नेटवर्क बिछाया जाएगा। इस बड़ी परियोजना का प्राथमिक उद्देश्य झुंझुनूं को 100 प्रतिशत सीवरेज कवरेज वाला शहर बनाना है, जिससे वर्षों से स्वच्छता सुविधाओं से वंचित रहे क्षेत्रों के निवासियों को बड़ी राहत मिल सकेगी।
वर्तमान अवसंरचना और कवरेज का अंतर
झुंझुनूं शहर में अब तक सीवरेज नेटवर्क के विकास के लिए दो अलग-अलग चरण स्वीकृत किए जा चुके हैं। योजना के प्रथम चरण में 194 किलोमीटर लंबी मुख्य तथा सहायक सीवर लाइनों का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा किया गया था। वहीं दूसरे चरण के तहत लगभग 45 किलोमीटर लंबी सीवरेज लाइन बिछाने का काम वर्तमान में मैदान पर चल रहा है। इन दोनों महत्वपूर्ण चरणों के क्रियान्वयन के बावजूद झुंझुनूं की लगभग 55 प्रतिशत शहरी आबादी अब भी केंद्रीय सीवरेज व्यवस्था से दूर बनी हुई है। इसके अतिरिक्त, नगर परिषद के हालिया परिसीमन के बाद शहर की सीमाओं में 10 नए ग्रामीण राजस्व क्षेत्र जुड़े हैं, जिससे नेटवर्क के व्यापक विस्तार की आवश्यकता बेहद जरूरी हो गई थी।
चार नए एसटीपी और दो पंपिंग स्टेशनों की योजना
प्रस्तावित नई डीपीआर के अनुसार तीसरे सीवरेज प्रोजेक्ट को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए शहर में चार नए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित किए जाएंगे। इनमें 2 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) क्षमता के दो प्लांट और 1 एमएलडी क्षमता के दो अन्य एसटीपी शामिल हैं। इसके साथ ही, गंदे पानी को बिना किसी रुकावट के ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाने के लिए शहर के प्रमुख स्थानों पर दो नए सीवरेज पंपिंग स्टेशन भी बनाए जाएंगे। इन पंपिंग स्टेशनों के निर्माण से सीवर पाइपों में गंदे पानी का प्रवाह सुगम होगा और नेटवर्क में रुकावट या ओवरफ्लो की समस्याओं पर प्रभावी अंकुश लग सकेगा।
कुल 25 एमएलडी होगी अपशिष्ट जल उपचार क्षमता
यह परियोजना पूर्ण होने के पश्चात झुंझुनूं शहर में क्रियाशील एसटीपी की कुल संख्या बढ़कर सात हो जाएगी। इन सभी सात संयंत्रों की संयुक्त अपशिष्ट जल प्रसंस्करण क्षमता बढ़कर करीब 25 एमएलडी तक पहुंच जाएगी। पूर्व में प्रथम चरण के अंतर्गत 8.5 एमएलडी और 7 एमएलडी क्षमता के दो बड़े एसटीपी निर्मित किए जा चुके हैं जो वर्तमान में चालू स्थिति में हैं। दूसरे चरण का 3.7 एमएलडी क्षमता वाला एसटीपी अभी निर्माणाधीन है और नगर परिषद को उम्मीद है कि यह इस वर्ष दिसंबर तक बनकर तैयार हो जाएगा। नगर परिषद के आधिकारिक अनुमान के मुताबिक झुंझुनूं में रोजाना लगभग 18 एमएलडी वेस्ट और ग्रे वाटर पैदा होता है, जिसके सुरक्षित निस्तारण के लिए नया नेटवर्क प्रतिदिन 24 एमएलडी पानी को ट्रीट करने की क्षमता विकसित करेगा।
घरेलू गंदे पानी का प्रबंधन और बीड़ क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण
तीसरे सीवरेज प्रोजेक्ट की कार्ययोजना में बरसाती पानी को छोड़कर घरों से निकलने वाले सभी प्रकार के गंदे पानी को सीवर लाइनों के जरिए एसटीपी तक पहुंचाने का खाका तैयार किया गया है। इसमें शौचालयों के सीवेज के साथ-साथ रसोई घर और स्नानघरों से निकलने वाला घरेलू वेस्ट वाटर (ग्रे वाटर) भी शामिल रहेगा। झुंझुनूं नगर परिषद के आयुक्त राकेश कुमार रंगा ने बताया कि घरेलू अपशिष्ट जल को बंद पाइपलाइनों में मोड़ने से शहर की गलियों, नालियों और बड़े नालों पर गंदे पानी का दबाव काफी कम हो जाएगा। इसके अलावा, ट्रीट किए गए जल के पुनरुयोग के लिए नगर परिषद ने बीड़ क्षेत्र में एक कृत्रिम तालाब तैयार करने का प्रस्ताव रखा है, जिसे साफ किए गए पानी से भरा जाएगा। इसी क्षेत्र में एक बायो-डायवर्सिटी फॉरेस्ट भी विकसित किया जाएगा ताकि उपचारित पानी का उपयोग पर्यावरणीय संवर्धन में किया जा सके।
बरसाती पानी का पृथक ड्रेनेज और राज्य सरकार की बजट प्रक्रिया
मानसून के दौरान जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए नगर परिषद बरसाती पानी के लिए एक पूरी तरह से अलग ड्रेनेज सिस्टम विकसित कर रही है। इसके लिए प्रारंभिक सर्वे का काम पूरा कर लिया गया है और विस्तृत डिजाइन तैयार करने की प्रक्रिया जारी है। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने अपने बजट घोषणा 2025-26 में झुंझुनूं समेत प्रदेश के प्रमुख शहरों में सीवरेज अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण की घोषणा की थी। इसी निर्देश के आलोक में नगर परिषद ने 340.88 करोड़ रुपये की यह विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपी है। राज्य सरकार से अंतिम प्रशासनिक स्वीकृति और वित्तीय आवंटन मिलते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।





















