खरीफ फसल सीजन के दौरान भीलवाड़ा जिले में खेतों की बुवाई का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। जिन किसानों के खेत इस समय खाली पड़े हैं या जिनकी मुख्य फसल की बुवाई छूट गई है, वे अगस्त के महीने में दलहनी फसलों का विकल्प चुन सकते हैं। इस मौसम में उड़द, मूंग, अरहर और लोबिया जैसी दालों की खेती कम समय में बढ़िया पैदावार देने के साथ-साथ किसानों की कमाई बढ़ाने का एक शानदार अवसर प्रदान करती है।
उड़द की बेहतर किस्मों से बढ़ाएं पैदावार
अगस्त के महीने में उड़द की बुवाई करना किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित होता है। इस फसल के लिए बलुई दोमट या अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। अधिक पैदावार हासिल करने के लिए टी-9, पीयू-31 और पंत उड़द-30 जैसी उन्नत किस्मों के बीजों का चयन करना चाहिए। एक हेक्टेयर खेत के लिए लगभग 15 से 20 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है।
उड़द की बुवाई के समय कतार से कतार के बीच 30 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे के बीच 10 सेंटीमीटर की दूरी बनाकर रखनी चाहिए। बीजों को बोने से पहले उनका सही उपचार करना जरूरी है ताकि फसल बीमारियों से सुरक्षित रहे। इसके साथ ही खेत की तैयारी के समय अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद डालने से पौधों की बढ़वार तेजी से होती है। सही देखभाल और वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर प्रति हेक्टेयर 8 से 10 क्विंटल तक उड़द का उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
कम समय में तैयार होने वाली मूंग की खेती
अगर किसान कम समय में तैयार होने वाली फसल की तलाश में हैं, तो अगस्त में मूंग की बुवाई एक आदर्श विकल्प है। मूंग की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 12 से 15 किलोग्राम बीज की जरूरत होती है। इसकी बुवाई करते समय भी कतारों के बीच 30 सेंटीमीटर तथा पौधों के बीच 10 सेंटीमीटर का फासला रखना चाहिए। यह दूरी पौधों को पर्याप्त धूप और हवा प्रदान करती है जिससे फसल का विकास बेहतर होता है।
अगस्त तक बुवाई के लिए उपयुक्त अरहर की फसल
अरहर की खेती मुख्य रूप से जून से अगस्त के बीच की जाती है, इसलिए अगस्त का महीना इसकी बुवाई के लिए अंतिम अवसर होता है। अरहर की खेती के लिए उल्लास-120, आईसीपीएल-87039 और बहार-99 जैसी उन्नत किस्मों को प्राथमिकता दी जा सकती है। इसके लिए प्रति हेक्टेयर 12 से 15 किलोग्राम बीज की आवश्यकता पड़ती है। अरहर की बुवाई के दौरान कतार से कतार की दूरी 60 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 20 सेंटीमीटर बनाए रखने की सलाह दी जाती है।
मिट्टी का उपजाऊपन और सही कृषि तकनीक
दलहनी फसलों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये न केवल किसानों को बाजार में अच्छी कीमत दिलाती हैं, बल्कि खेत की मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाकर उसकी प्राकृतिक उर्वरता को भी सुधारती हैं। उड़द, मूंग, अरहर और लोबिया जैसी फसलों से अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए सही समय पर बुवाई, प्रमाणित बीजों का चुनाव, संतुलित खाद का प्रयोग और समय पर खरपतवार नियंत्रण बेहद आवश्यक है। इन बातों का ध्यान रखकर किसान कम लागत में अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।



















