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मणिपुर में शांति बहाली के लिए आगे आएं कलाकार, मुख्यमंत्री यूम्नाम खेमचंद सिंह ने दिया 'बड़े भाई' का संदेशमणिपुर
19 अग॰ 2026, 3:59 pm (1 घंटे पहले)· 2

मणिपुर में शांति बहाली के लिए आगे आएं कलाकार, मुख्यमंत्री यूम्नाम खेमचंद सिंह ने दिया 'बड़े भाई' का संदेश

इम्फाल में आयोजित एक विशेष बैठक के दौरान मणिपुर के मुख्यमंत्री यूम्नाम खेमचंद सिंह ने विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास बढ़ाने और जातीय तनाव समाप्त करने के लिए कला को माध्यम बनाने का आह्वान किया।

मणिपुर में पिछले कई महीनों से जारी जातीय संघर्ष के बीच राज्य सरकार ने सांस्कृतिक मंचों के जरिए शांति स्थापित करने की पहल की है। इम्फाल स्थित बाबुपाड़ा में अपने आधिकारिक आवास पर आयोजित एक विशेष सभा में मुख्यमंत्री यूम्नाम खेमचंद सिंह ने प्रख्यात सांस्कृतिक हस्तियों और कलाकारों के साथ विस्तृत चर्चा की। इस दौरान उन्होंने जोर देकर कहा कि कला और संस्कृति की विधाओं में समाज को जोड़ने और टूटे हुए रिश्तों को दोबारा बहाल करने की अद्भुत क्षमता है।

जातीय तनाव के समाधान में 'बड़े भाई' की भूमिका की अपील

बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने चिंता व्यक्त की कि शुरुआत में दो समुदायों के बीच भड़का यह विवाद अब बढ़कर तीन समुदायों के संघर्ष में तब्दील हो चुका है। इस कठिन परिस्थिति से उबरने के लिए उन्होंने मेइतेइ समुदाय से आगे बढ़कर नेतृत्व करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बहुसंख्यक होने के नाते मेइतेइ समुदाय को 'बड़े भाई और बड़ी बहन' की जिम्मेदारी निभानी चाहिए और संकट के समाधान के लिए पहला कदम बढ़ाना चाहिए।

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अपने कैबिनेट मंत्री पद के कार्यकाल को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने एक महत्वपूर्ण वाकया साझा किया। उन्होंने बताया कि हिंसा के शुरुआती दौर में जब चुराचांदपुर जिले में मेइतेइ समुदाय के लगभग 120 मजदूर फंस गए थे, तब उन्होंने हेंगलेप विधानसभा क्षेत्र के विधायक लेत्ज़ामांग हाओकिप से मदद मांगी थी। विधायक ने त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए उन सभी मजदूरों की जान बचाई थी। यूम्नाम खेमचंद सिंह ने कहा कि यह घटना इस बात की मिसाल है कि कुछ उपद्रवियों की हरकतों के कारण पूरे समुदाय को दोषी ठहराना अनैतिक है।

जिरीबाम का उदाहरण और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर पर समर्थन

राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए मुख्यमंत्री ने दीवारों को गिराने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने जिरीबाम जिले की वर्तमान स्थिति का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां विभिन्न समुदायों के लोग बिना किसी अविश्वास के शांतिपूर्वक एक साथ रह रहे हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने राज्य में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) लागू करने की मांग का समर्थन किया और इस मुद्दे को उठाने के लिए उपस्थित कलाकारों का आभार व्यक्त किया।

सांस्कृतिक पहलों और नाटकों के जरिए एकजुटता का प्रस्ताव

संस्कृति मंत्री खुराइजाम लोकेन सिंह द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख कलाकारों ने अपने सुझाव रखे। रंगमंच कलाकार शौग्राकपाम हेमंत ने कहा कि पारंपरिक सामाजिक रिश्तों को दोबारा जीवित करने के लिए 'ई मणिपुरी नी' (मैं मणिपुरी हूं) शीर्षक से शुमांग लीला नाटक तैयार किया जाना चाहिए। वहीं प्रसिद्ध अभिनेता गोकुल अथोकपाम ने राष्ट्रीय राजमार्ग 2 के आसपास के इलाकों में यात्रा कर लोगों से संवाद साधने की इच्छा जताई। उन्होंने सरकार से कलाकारों के लिए सुरक्षा व्यवस्था और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए रियायती दरों की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की।

साझा पहचान और सोशल मीडिया के सही इस्तेमाल पर जोर

तंगखुल नागा लोकगायक गुरु रेवबेन माशांगवा ने कहा कि यदि सभी कलाकार आपसी मतभेद भुलाकर स्वयं को केवल मणिपुरी के रूप में स्वीकार करें, तो एकता का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। गायक कोन्थाउजाम बोबिन ने सभी समुदायों के कलाकारों से एकजुट रहने का आह्वान किया। इसके अलावा अभिनेत्री चनाम लीलाबती ने युवाओं को शांति प्रक्रिया से जोड़ने के लिए सोशल मीडिया के सकारात्मक उपयोग पर बल दिया। इस उच्चस्तरीय बैठक में कला एवं संस्कृति सचिव नाओरेम प्रवीन सिंह और मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार ओइनम सुनील सिंह भी मौजूद रहे।

सवाल-जवाब

मणिपुर के मुख्यमंत्री ने कलाकारों की बैठक कहां आयोजित की?
यह बैठक इम्फाल के बाबुपाड़ा स्थित मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास पर आयोजित की गई थी।
मुख्यमंत्री ने मेइतेइ समुदाय से क्या अपील की?
मुख्यमंत्री यूम्नाम खेमचंद सिंह ने मेइतेइ समुदाय से 'बड़े भाई और बड़ी बहन' की भूमिका निभाकर संघर्ष समाधान का नेतृत्व करने की अपील की।
चुराचांदपुर जिले की किस घटना का उल्लेख किया गया?
पूर्व में कैबिनेट मंत्री रहते हुए मुख्यमंत्री की अपील पर हेंगलेप के विधायक लेत्ज़ामांग हाओकिप ने चुराचांदपुर में फंसे लगभग 120 मेइतेइ मजदूरों की जान बचाई थी।
मणिपुर के किस जिले को शांतिपूर्ण सहअस्तित्व का उदाहरण बताया गया?
मुख्यमंत्री ने जिरीबाम जिले का उदाहरण दिया, जहां स्थिति सामान्य हो चुकी है और विभिन्न समुदाय बिना किसी अविश्वास के साथ रह रहे हैं।
कलाकारों ने शांति संदेश फैलाने के लिए क्या सुझाव दिए?
कलाकारों ने 'ई मणिपुरी नी' नामक नाटक बनाने, राष्ट्रीय राजमार्ग 2 के क्षेत्रों में सांस्कृतिक यात्राएं करने और सोशल मीडिया पर युवाओं को जोड़ने का सुझाव दिया।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·41 मिनट पहले

मणिपुर के मुख्यमंत्री का कलाकारों और सांस्कृतिक मंचों को शांति का माध्यम बनाना एक अनूठी और व्यावहारिक रणनीति है, क्योंकि जमीनी स्तर पर विश्वास बहाली के लिए कला और नाटक सबसे प्रभावी साबित होते हैं। विशेषकर मेइतेइ समुदाय से बड़े भाई की भूमिका निभाने की अपील करना और जिरीबाम का उदाहरण देना यह दर्शाता है कि प्रशासनिक उपायों के साथ-साथ सामाजिक संवाद कितना आवश्यक है। आगे चलकर यदि एनआरसी की मांग और सांस्कृतिक दलों की यह जमीनी यात्राएं प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो यह राज्य के बहु-जातीय ताने-बाने को पुनर्जीवित करने में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·40 मिनट पहले

मुख्यमंत्री का यह दृष्टिकोण कूटनीतिक और सामाजिक दोनों मोर्चों पर महत्वपूर्ण है। जब प्रशासनिक मशीनरी अकेले अविश्वास की खाई को पाटने में संघर्ष कर रही हो, तब 'शुमांग लीला' जैसे स्थानीय माध्यमों और 'बड़े भाई' वाली जिम्मेदारी के जरिए जन-संवाद स्थापित करना एक दूरदर्शी कदम है। हालांकि, जिरीबाम के मॉडल को पूरे राज्य में दोहराने के लिए सुरक्षा बलों और नागरिक समाज के बीच बेहतर समन्वय अनिवार्य होगा, ताकि एनआरसी जैसे संवेदनशील मुद्दों पर किसी भी प्रकार का नया गतिरोध उत्पन्न न हो।

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