मणिपुर में पिछले कई महीनों से जारी जातीय संघर्ष के बीच राज्य सरकार ने सांस्कृतिक मंचों के जरिए शांति स्थापित करने की पहल की है। इम्फाल स्थित बाबुपाड़ा में अपने आधिकारिक आवास पर आयोजित एक विशेष सभा में मुख्यमंत्री यूम्नाम खेमचंद सिंह ने प्रख्यात सांस्कृतिक हस्तियों और कलाकारों के साथ विस्तृत चर्चा की। इस दौरान उन्होंने जोर देकर कहा कि कला और संस्कृति की विधाओं में समाज को जोड़ने और टूटे हुए रिश्तों को दोबारा बहाल करने की अद्भुत क्षमता है।
जातीय तनाव के समाधान में 'बड़े भाई' की भूमिका की अपील
बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने चिंता व्यक्त की कि शुरुआत में दो समुदायों के बीच भड़का यह विवाद अब बढ़कर तीन समुदायों के संघर्ष में तब्दील हो चुका है। इस कठिन परिस्थिति से उबरने के लिए उन्होंने मेइतेइ समुदाय से आगे बढ़कर नेतृत्व करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बहुसंख्यक होने के नाते मेइतेइ समुदाय को 'बड़े भाई और बड़ी बहन' की जिम्मेदारी निभानी चाहिए और संकट के समाधान के लिए पहला कदम बढ़ाना चाहिए।
चुराचांदपुर की घटना का जिक्र: चंद लोगों की गलती की सजा पूरे समुदाय को नहीं
अपने कैबिनेट मंत्री पद के कार्यकाल को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने एक महत्वपूर्ण वाकया साझा किया। उन्होंने बताया कि हिंसा के शुरुआती दौर में जब चुराचांदपुर जिले में मेइतेइ समुदाय के लगभग 120 मजदूर फंस गए थे, तब उन्होंने हेंगलेप विधानसभा क्षेत्र के विधायक लेत्ज़ामांग हाओकिप से मदद मांगी थी। विधायक ने त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए उन सभी मजदूरों की जान बचाई थी। यूम्नाम खेमचंद सिंह ने कहा कि यह घटना इस बात की मिसाल है कि कुछ उपद्रवियों की हरकतों के कारण पूरे समुदाय को दोषी ठहराना अनैतिक है।
जिरीबाम का उदाहरण और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर पर समर्थन
राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए मुख्यमंत्री ने दीवारों को गिराने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने जिरीबाम जिले की वर्तमान स्थिति का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां विभिन्न समुदायों के लोग बिना किसी अविश्वास के शांतिपूर्वक एक साथ रह रहे हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने राज्य में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) लागू करने की मांग का समर्थन किया और इस मुद्दे को उठाने के लिए उपस्थित कलाकारों का आभार व्यक्त किया।
सांस्कृतिक पहलों और नाटकों के जरिए एकजुटता का प्रस्ताव
संस्कृति मंत्री खुराइजाम लोकेन सिंह द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख कलाकारों ने अपने सुझाव रखे। रंगमंच कलाकार शौग्राकपाम हेमंत ने कहा कि पारंपरिक सामाजिक रिश्तों को दोबारा जीवित करने के लिए 'ई मणिपुरी नी' (मैं मणिपुरी हूं) शीर्षक से शुमांग लीला नाटक तैयार किया जाना चाहिए। वहीं प्रसिद्ध अभिनेता गोकुल अथोकपाम ने राष्ट्रीय राजमार्ग 2 के आसपास के इलाकों में यात्रा कर लोगों से संवाद साधने की इच्छा जताई। उन्होंने सरकार से कलाकारों के लिए सुरक्षा व्यवस्था और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए रियायती दरों की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की।
साझा पहचान और सोशल मीडिया के सही इस्तेमाल पर जोर
तंगखुल नागा लोकगायक गुरु रेवबेन माशांगवा ने कहा कि यदि सभी कलाकार आपसी मतभेद भुलाकर स्वयं को केवल मणिपुरी के रूप में स्वीकार करें, तो एकता का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। गायक कोन्थाउजाम बोबिन ने सभी समुदायों के कलाकारों से एकजुट रहने का आह्वान किया। इसके अलावा अभिनेत्री चनाम लीलाबती ने युवाओं को शांति प्रक्रिया से जोड़ने के लिए सोशल मीडिया के सकारात्मक उपयोग पर बल दिया। इस उच्चस्तरीय बैठक में कला एवं संस्कृति सचिव नाओरेम प्रवीन सिंह और मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार ओइनम सुनील सिंह भी मौजूद रहे।





















