सुबह की ताजगी के लिए ज्यादातर लोग सबसे पहले चाय की चुस्की लेना पसंद करते हैं, लेकिन सही तरीका न पता होने पर अक्सर कप का स्वाद फीका रह जाता है। चाय प्रेमियों के बीच अक्सर यह सवाल बना रहता है कि बर्तन में शुरुआत में पानी चढ़ाना चाहिए या सीधा दूध डालना सही रहता है। इसका जवाब चाय तैयार करने की पारम्परिक पद्धतियों में छिपा हुआ है। अगर आप भी एकदम कड़क और सोंधी चाय पीना पसंद करते हैं, तो सामग्री मिलाने के सही क्रम का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
चाय तैयार करने का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका
बेहतरीन चाय तैयार करने के लिए सबसे पहला कदम बर्तन में पानी डालना है। जब पानी हल्का गरम होने लगे, तब इसमें कुटी हुई अदरक, इलायची, लौंग या पसंदीदा चाय मसाला मिलाएं। मसालों को पानी के साथ लगभग 2 से 3 मिनट तक अच्छी तरह उबलने दें। ऐसा करने से मसालों की महक और उनका असली अर्क पानी के भीतर पूरी तरह से घुलमिल जाता है।
इसके बाद उबलते पानी में चाय पत्ती डालें और गैस की आंच को धीमा कर दें। चाय पत्ती को पानी में पकने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए, जिससे वह अपना गहरा रंग और असली कड़कपन छोड़ सके। जब पानी, मसालों और पत्ती का यह काढ़ा अच्छी तरह पककर तैयार हो जाए, तब इसमें दूध मिलाया जाता है। दूध डालने के बाद धीमी आंच पर चाय को 2 से 3 बार अच्छी तरह उबालें, ताकि दूध और मसालों का स्वाद एक-दूसरे में पूरी तरह समा जाए।
मीठे के लिए चीनी का इस्तेमाल सबसे अंत में या दूध के अच्छे से पक जाने के बाद ही करना चाहिए। अगर चीनी शुरुआत में ही डाल दी जाएगी, तो चाय पत्ती का रंग और कड़क स्वाद सही तरीके से उभरकर बाहर नहीं आ पाएगा।
शुरुआत में दूध डालने से क्यों खराब होता है स्वाद?
अगर आप बर्तन में पानी से पहले दूध डाल देते हैं, तो चाय का स्वाद बिगड़ने का खतरा रहता है। दूध में मौजूद फैट और प्रोटीन के कण चाय पत्ती के दानों के चारों तरफ एक पतली परत बना लेते हैं। इस परत के कारण चाय पत्ती अपना कड़कपन और रंग सही से पानी में नहीं छोड़ पाती।
इसके अलावा, मसालों का रस भी दूध के साथ उस तरह नहीं घुल पाता जैसा पानी में घुलता है। नतीजा यह होता है कि चाय में वह खास सोंधापन नहीं आ पाता जिसकी उम्मीद की जाती है। इतना ही नहीं, चाय पत्ती को दूध के साथ बहुत ज्यादा देर तक उबालने से चाय का स्वाद अजीब भी हो सकता है।


















