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बिहार लोकभवन की बड़ी कार्रवाई, दक्षता परीक्षा से दूर रहे 4 आशुलिपिकों को नौकरी से निकालाबिहार
20 अग॰ 2026, 8:41 pm (35 दिन पहले)· 5

बिहार लोकभवन की बड़ी कार्रवाई, दक्षता परीक्षा से दूर रहे 4 आशुलिपिकों को नौकरी से निकाला

बिहार राज्यपाल सचिवालय ने कार्यक्षमता में कमी और लगातार दक्षता परीक्षा में अनुपस्थित रहने पर 4 स्टेनोग्राफरों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं।

बिहार राजभवन (लोकभवन) में तैनात चार आशुलिपिकों (स्टेनोग्राफर) की सेवाएं तुरंत प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं। जिन कर्मचारियों के खिलाफ यह कड़ा कदम उठाया गया है, उनके नाम राजेश कुमार, अखिलेश कुमार मिश्र, सुशील कुमार और संगीता कुमारी हैं। बिहार लोकभवन द्वारा इस प्रशासनिक फैसले के संबंध में औपचारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इन कर्मियों को अपनी अनिवार्य व्यावसायिक दक्षता साबित करने के पर्याप्त अवसर दिए गए थे, लेकिन वे बार-बार दक्षता परीक्षा में शामिल होने से बचते रहे और नियुक्ति प्राधिकारी के निर्देशों की अवहेलना की।

नियुक्ति की प्रक्रिया और दक्षता में कमी

बिहार लोकभवन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इन चारों कर्मचारियों की नियुक्ति 23 जनवरी 2025 को आशुलिपिक के पद पर की गई थी। हालांकि, उनकी नियुक्ति के समय निर्धारित अनिवार्य लिखित परीक्षा तथा आशुलिपि (शॉर्टहैंड) और टाइपिंग दक्षता परीक्षा आयोजित नहीं की जा सकी थी। किसी भी आशुलिपिक के लिए अधिकारियों द्वारा दिए गए मौखिक डिक्टेशन को शॉर्टहैंड में दर्ज करना और उसका सटीक टाइप किया हुआ प्रतिलेख तैयार करना सबसे प्राथमिक और अनिवार्य दायित्व होता है। पदभार संभालने के बाद जब इन कर्मियों ने कामकाज शुरू किया, तो उनके दैनिक कार्य प्रदर्शन और क्षमता को लेकर संबंधित अधिकारियों से कई प्रतिकूल रिपोर्ट प्राप्त हुईं।

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जांच समिति का गठन और परीक्षा से दूरी

कर्मियों की कार्यकुशलता और मूलभूत दक्षताओं पर सवाल उठने के बाद बिहार के राज्यपाल के आदेश से एक उच्चस्तरीय कदम उठाया गया। कर्मचारियों की क्षमता का निष्पक्ष आकलन करने के उद्देश्य से तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया। इस समिति ने संबंधित कर्मियों की व्यावसायिक योग्यता जांचने के लिए 22 जुलाई 2026 को एक विशेष दक्षता परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया। हालांकि, निर्धारित तिथि पर चारों में से कोई भी कर्मचारी परीक्षा देने उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद प्रशासन ने उन्हें अपनी योग्यता साबित करने का एक और मौका देने का फैसला किया।

लोकभवन प्रशासन ने 6 अगस्त 2026 को पुनः दक्षता परीक्षा का आयोजन किया और इसे अंतिम अवसर घोषित किया। इसके बावजूद, चारों कर्मचारियों ने एक बार फिर परीक्षा में भाग लेने से परहेज किया। परीक्षा में शामिल होने के बजाय उन्होंने अपने पद के लिए आवश्यक मूलभूत व्यावसायिक दक्षताओं से छूट दिए जाने की मांग की। नियुक्ति प्राधिकारी के स्पष्ट निर्देशों का पालन न करना और प्रशासनिक प्रक्रिया से दूरी बनाए रखना उनके खिलाफ गंभीर अनुशासनहीनता माना गया।

परिवीक्षा अवधि के नियम और अंतिम कार्रवाई

बिहार लोकभवन ने स्पष्ट किया है कि 23 जनवरी 2025 को सेवा में शामिल हुए ये चारों कर्मचारी वर्तमान में परिवीक्षा अवधि (प्रोबेशन पीरियड) में चल रहे थे। संबंधित सेवा नियमों के तहत प्रोबेशन अवधि के दौरान यदि किसी कर्मचारी का कार्य प्रदर्शन संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो निर्धारित सेवा शर्तों के अनुसार उसकी सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं। प्रशासन ने कहा कि इन कर्मचारियों को अपनी क्षमता सिद्ध करने के लिए पर्याप्त अवसर प्रदान किए गए थे, लेकिन उन्होंने उन अवसरों का लाभ नहीं उठाया।

मामले से जुड़े सभी तथ्यों, वरिष्ठ अधिकारियों की प्रतिकूल रिपोर्ट, दो बार दक्षता परीक्षा से अनुपस्थित रहने और प्रशासनिक निर्देशों के उल्लंघन का गंभीरता से आकलन करने के बाद चारों स्टेनोग्राफर की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का अंतिम फैसला लागू कर दिया गया।

सवाल-जवाब

बिहार लोकभवन ने किन चार कर्मचारियों की सेवा समाप्त की है?
राजेश कुमार, अखिलेश कुमार मिश्र, सुशील कुमार और संगीता कुमारी की सेवाएं समाप्त की गई हैं।
इन स्टेनोग्राफरों को पद से हटाने की मुख्य वजह क्या थी?
अनिवार्य व्यावसायिक दक्षता की कमी, दक्षता परीक्षा से बार-बार अनुपस्थित रहना और प्रशासनिक निर्देशों की अवहेलना करने के कारण यह कार्रवाई की गई।
इन कर्मचारियों की नियुक्ति कब हुई थी?
इन चारों कर्मचारियों की नियुक्ति 23 जनवरी 2025 को हुई थी और वे परिवीक्षा (प्रोबेशन) अवधि में थे।
दक्षता परीक्षा के लिए कौन सी तारीखें तय की गई थीं?
प्रशासन ने 22 जुलाई 2026 और फिर अंतिम अवसर के रूप में 6 अगस्त 2026 की तारीखें तय की थीं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sandeep Yadav@sandeep-yadav·35 दिन पहले

यह प्रशासनिक कार्रवाई खेल संगठनों और अकादमियों के लिए भी एक बड़ा सबक है, जहाँ अक्सर चयन के बाद प्रदर्शन और फिटनेस के मूल्यांकन को नजरअंदाज कर दिया जाता है। जिस तरह खेल ट्रायल में विफल रहने या न आने पर खिलाड़ियों को बाहर का रास्ता दिखाया जाता है, उसी तरह किसी भी क्षेत्र में मूल योग्यताओं से समझौता नहीं किया जा सकता। परिवीक्षा अवधि के दौरान इस तरह की अनुशासनहीनता और परीक्षा से भागने की प्रवृत्ति यह दर्शाती है कि शुरुआती पारदर्शी चयन कितना आवश्यक है। आगे चलकर यदि अन्य विभाग भी इसी सख्त रुख को अपनाते हैं, तो प्रशासनिक और संस्थागत दक्षता में काफी सुधार देखने को मिलेगा।

Ravikash Gupta@ravikash·35 दिन पहले

बिहार राजभवन द्वारा परिवीक्षा अवधि के दौरान उठाई गई यह प्रशासनिक कार्रवाई सरकारी कामकाज में कार्यकुशलता और जवाबदेही तय करने की दिशा में एक सख्त संदेश है। बिना पूर्व दक्षता परीक्षा के नियुक्त किए गए कर्मचारियों को अपनी व्यावसायिक योग्यता साबित करने के पर्याप्त अवसर दिए जाने के बावजूद परीक्षा से बचना और छूट की मांग करना गंभीर अनुशासनहीनता के दायरे में आता है। भविष्य में इस प्रकार के मामलों से बचने के लिए सार्वजनिक संस्थानों को भर्ती के शुरुआती चरण में ही पारदर्शी और सख्त मूल्यांकन प्रक्रिया अपनानी होगी ताकि प्रशासनिक सुस्ती पर लगाम लगाई जा सके।

Arjun Mehta@arjun-mehta·35 दिन पहले

यह प्रकरण इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि जब प्रारंभिक भर्ती प्रक्रियाओं में शॉर्टहैंड जैसी बुनियादी योग्यताओं की जांच में कोताही बरती जाती है, तो आगे चलकर प्रशासनिक मशीनरी पर अनावश्यक दबाव बनता है। परिवीक्षा अवधि के नियमों का यह कड़ा उपयोग हालांकि पारदर्शिता और जवाबदेही स्थापित करता है, लेकिन भविष्य में ऐसे विवादों से बचने के लिए यह जरूरी है कि नियुक्ति से पूर्व ही चयन के सभी चरण पूरी कठोरता से पूरे किए जाएं, ताकि संस्थागत समय और संसाधनों की बर्बादी रोकी जा सके।

Rohan Verma@rohan-verma·35 दिन पहले

यह प्रशासनिक कार्रवाई दर्शाती है कि बिना पूरी चयन प्रक्रिया के हुई नियुक्तियों में किस तरह की कार्यक्षमता संबंधी चुनौतियाँ सामने आती हैं। परिवीक्षा अवधि के दौरान इस प्रकार की सख्ती से यह संदेश जाता है कि संवैधानिक और उच्च कार्यालयों में कामकाज की गुणवत्ता पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। भविष्य में ऐसे पदों पर भर्ती के समय प्रारंभिक स्क्रीनिंग और पारदर्शी परीक्षा प्रक्रिया को अनिवार्य रूप से कड़ाई से लागू किए जाने की आवश्यकता है ताकि इस तरह की प्रशासनिक जटिलताओं से बचा जा सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·35 दिन पहले

यह प्रशासनिक निर्णय सीधे तौर पर यह रेखांकित करता है कि जब नियुक्तियों के समय बुनियादी दक्षता परीक्षाओं को दरकिनार किया जाता है, तो अंततः प्रशासनिक और विधिक मोर्चे पर किस तरह के गंभीर संकट खड़े होते हैं। इन चारों कर्मचारियों द्वारा लगातार परीक्षा का बहिष्कार करना और छूट की मांग करना यह स्पष्ट संकेत देता है कि वे अपने पद की अनिवार्य अर्हता को पूरा करने में असमर्थ थे। ऐसे मामलों में यदि समय रहते सख्त कदम न उठाए जाएं, तो यह न केवल उच्च कार्यालयों की कार्यप्रणाली को प्रभावित करता है, बल्कि भविष्य में कानूनी विवादों और मुकदमों की लंबी श्रृंखला को भी जन्म दे सकता है, जिससे विभाग को अनावश्यक प्रशासनिक और न्यायिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

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