निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और राहुल गांधी के खिलाफ जोरदार मोर्चा खोल दिया है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान विपक्षी पार्टी के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि जिस दल का देशव्यापी जनाधार पूरी तरह बिखर चुका है, वह अब अपनी विफलताएं छिपाने के लिए स्वतंत्र संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर लांछन लगा रहा है। राहुल गांधी के बयानों की आलोचना करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनावी हार के बाद इस तरह के बेतुके तर्क जनता के गले नहीं उतरने वाले हैं।
पश्चिम बंगाल चुनाव और वोट चोरी के दावों पर सवाल
संवाददाता सम्मेलन में सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी द्वारा लगाए गए वोट चोरी और लोकतांत्रिक संस्थाओं को प्रभावित करने के आरोपों का विस्तार से जवाब दिया। उन्होंने चुनावी नतीजों का ब्योरा पेश करते हुए याद दिलाया कि साल 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का पूरी तरह सफाया हो गया था और वह एक भी सीट जीतने में कामयाब नहीं रही थी। इतना ही नहीं, उस चुनाव में राज्य की 234 सीटों पर पार्टी के उम्मीदवारों की जमानत तक जब्त हो गई थी। बीजेपी प्रवक्ता ने तीखा सवाल पूछते हुए कहा कि जिस राज्य में किसी दल का खाता तक न खुला हो और चुनावी जमीन पूरी तरह खत्म हो चुकी हो, वहां वोट चोरी होने का दावा किस आधार पर किया जा सकता है।
1984 के चुनावी इतिहास और जनादेश की सहूलियत
विपक्षी रणनीति पर निशाना साधते हुए बीजेपी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस केवल अपनी सुविधा के अनुसार राजनीतिक विमर्श गढ़ने की कोशिश करती है। सुधांशु त्रिवेदी ने भारतीय लोकतंत्र के इतिहास से साल 1984 के लोकसभा चुनाव का संदर्भ दिया। उन्होंने बताया कि उस समय बीजेपी को संसद में भले ही केवल दो सीटें मिली थीं, लेकिन कुल मत प्रतिशत के लिहाज से वह कांग्रेस के बाद देश की दूसरी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी थी। त्रिवेदी ने आगे आरोप लगाया कि विपक्षी दल सत्ता में वापसी के लिए बाहरी ताकतों और विदेशी तत्वों के सहारे का सपना देख रहे थे, लेकिन देश की जनता के फैसले ने उनकी इन सभी उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फेर दिया है।
नेतृत्व शैली और जनविश्वास की तुलना
राजनीतिक जवाबदेही पर बात करते हुए बीजेपी प्रवक्ता ने सत्ता विरोधी माहौल और जनता के भरोसे के फर्क को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जो राजनीतिक दल जनता के बुनियादी मुद्दों, प्रगति और जनकल्याण की अनदेखी करते हैं, उन्हें चुनाव में जनता के स्वाभाविक विरोध का सामना करना ही पड़ता है। इसके विपरीत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बिना रुके जनहित के कार्यों में जुटी है, जिसकी वजह से मतदाताओं का भरोसा लगातार मजबूत बना हुआ है। अपने संबोधन के समापन पर उन्होंने दोनों नेताओं की कार्यशैली की तुलना करते हुए कहा कि जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरी तरह जमीन से जुड़े हुए नेता हैं, वहीं राहुल गांधी वास्तविकता से कटे हुए ऐसे नेता हैं जो जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं।





















