म्यांमार से जुड़े संदिग्ध ड्रोन प्रशिक्षण विवाद में फंसे विदेशी नागरिकों को दिल्ली स्थित विशेष अदालत ने बड़ी कानूनी राहत प्रदान की है। छह महीने तक सलाखों के पीछे रहने के बाद अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक समेत यूक्रेन के छह नागरिकों को अपने परिवारों से मिलने के लिए एक महीने की अवधि तक स्वदेश लौटने की मंजूरी मिल चुकी है। अदालत का यह आदेश संबंधित मुसाफिरों द्वारा भारत से अपनी-अपनी उड़ानों में सवार होने के दिन से ठीक एक माह के लिए प्रभावी माना जाएगा।
संवैधानिक स्वतंत्रता और यात्रा दस्तावेजों की वापसी का फैसला
राउज एवेन्यू परिसर में कार्यरत विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा की पीठ ने मामले की समीक्षा करते हुए स्पष्ट टिप्पणी की कि सीमाओं से परे यात्रा करने का अधिकार भारतीय संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों के दायरे का ही अभिन्न हिस्सा है। इसी आधार पर अदालत ने अभियुक्तों की याचिका को स्वीकार करते हुए उनके जब्त पासपोर्ट वापस सौंपने के निर्देश जारी किए। तिहाड़ जेल से रिहाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन सभी को अपने वतन रवाना होने का रास्ता साफ हुआ है, क्योंकि वे पहले ही वैधानिक डिफॉल्ट जमानत हासिल करने में सफल रहे थे।
वापसी की सख्त मियाद और अनिवार्य रिपोर्टिंग की समयसीमा
अदालत द्वारा दी गई यह छूट पूर्णतया अस्थायी है और इसके साथ कई कड़े कानूनी बंधन जोड़े गए हैं। आदेश के प्रावधानों के मुताबिक, निर्धारित तीस दिनों की अवधि समाप्त होते ही सभी सातों व्यक्तियों को भारत की धरती पर लौटना अनिवार्य होगा। दिल्ली लौटने के बाद ठीक 72 घंटों की तय मोहलत के भीतर उन्हें न्यायिक पीठ के समक्ष अपनी वापसी की आधिकारिक सूचना दर्ज करानी होगी, ताकि कानूनी रिकॉर्ड अद्यतन रह सके।
जांच एजेंसी के समक्ष हाजिरी और संपर्क साधनों का ब्योरा
मामले की पड़ताल कर रही केंद्रीय एजेंसी जब भी इन विदेशी नागरिकों को पूछताछ या साक्ष्य जुटाने के लिए तलब करेगी, तब उन्हें अनिवार्य रूप से उपस्थित होना पड़ेगा। यह उपस्थिति स्थिति की गंभीरता के अनुसार सशरीर अथवा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनिश्चित की जा सकती है। इसके अलावा, आदेश पारित होने के 24 घंटों के भीतर प्रत्येक अभियुक्त को अपना मौजूदा ठिकाना, सक्रिय मोबाइल नंबर और ई-मेल पता जांच अधिकारियों को साझा करना होगा। यदि किसी के पास तुरंत चालू सिम कार्ड उपलब्ध न हो, तो वे परिवार के किसी सदस्य का संपर्क सूत्र दे सकते हैं, लेकिन अपने मुल्क पहुंचने के सात दिनों के भीतर उन्हें अपना निजी सक्रिय नंबर अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराना होगा।
अभियोजन पक्ष का रुख और जांच की मौजूदा स्थिति
अदालती सुनवाई के दौरान केंद्रीय जांच एजेंसी की ओर से विशेष लोक अभियोजक राहुल त्यागी और अधिवक्ता अमित रोहिला उपस्थित हुए। उन्होंने पीठ को अवगत कराया कि पूरे प्रकरण में छानबीन का काम अभी बंद नहीं हुआ है और अनुसंधान लगातार जारी है। हालांकि, जांच टीम ने अदालत में यह भी स्वीकार किया कि वर्तमान चरण में इन सातों व्यक्तियों की भौतिक उपस्थिति तुरंत अपेक्षित नहीं है। एजेंसी के वकीलों ने सुझाव दिया कि आरोपियों से आवश्यक औपचारिक वचनपत्र और लिखित आश्वासन लेकर उन्हें जाने दिया जा सकता है, जिसके बाद कोर्ट ने आवेदन स्वीकार कर लिया।
इमिग्रेशन कानून के तहत वैनडाइक को मिली अतिरिक्त रियायत
अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक के पक्ष में अलग से पैरवी करते हुए अधिवक्ता रोहित दंडरियाल और रोहित गौर ने आव्रजन तथा विदेशी नागरिक कानून से जुड़े विशिष्ट आरोपों से राहत देने के लिए एक प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। बचाव पक्ष के वकीलों ने 18 सितंबर को संपन्न हुए निपटारे की विधिक स्थिति सामने रखी, जिसके आधार पर अदालत ने उन आरोपों को समाप्त करने की अर्जी को भी स्वीकृति दे दी। विदेशी नागरिकों को अपने गृह देश जाने की अनुमति देने वाला यह व्यापक न्यायिक आदेश 24 सितंबर को जारी किया गया था।



















