नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 की समाप्ति और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अपने देश लौटने के ठीक बाद, भारत के रणनीतिक और कूटनीतिक मोर्चे से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और सकारात्मक खबर सामने आई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के दौरान जो गर्मजोशी और सहजता दिखाई दी थी, उसका वास्तविक कारण अब रक्षा मंत्रालय की ताजा वार्षिक रिपोर्ट के जरिए देश के सामने आया है. इस रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 के दौरान उत्तरी सीमा पर वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के आसपास चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की सैन्य उपस्थिति में अप्रत्याशित और महत्वपूर्ण गिरावट दर्ज की गई है. चीनी राष्ट्रपति 12 सितंबर को इस सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत पहुंचे थे और 13 सितंबर को उनकी रवानगी के बाद सीमा पर तनाव कम होने की यह तस्वीर रणनीतिक विजय को दर्शाती है.
वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीनी सैन्य बलों की वर्तमान स्थिति
रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के निकटवर्ती इलाकों और चीनी सेना के पारंपरिक प्रशिक्षण शिविरों में अब ड्रैगन की उपस्थिति काफी सीमित हो गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी सेना की तैनाती घटकर अब केवल 10 कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड तक सिमट गई है. हालांकि, चीन की इस पीछे हटती सेना के बाद भी भारतीय सेना ने किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती है. भारतीय सुरक्षा बलों ने सीमा के सभी संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सेक्टरों में अपनी मजबूत, सतर्क और आक्रामक तैनाती को पूर्ववत बनाए रखा है ताकि किसी भी संभावित अप्रत्याशित गतिविधि का तुरंत जवाब दिया जा सके.
राजनयिक संवाद और सैन्य वार्ताओं की भूमिका
इस रिपोर्ट में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि भारत और चीन के बीच विभिन्न स्तरों पर जारी निरंतर संवाद ने सीमा पर स्थिति को स्थिर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. दोनों देशों के बीच राजनीतिक, राजनयिक और सैन्य स्तरों पर बैठकों का दौर लगातार चलता रहा. इस दौरान सीमा मामलों पर समन्वय और परामर्श के लिए स्थापित कार्यकारी तंत्र (WMCC) की बैठकें, विशेष प्रतिनिधियों की उच्च स्तरीय वार्ताएं, कोर कमांडर स्तर की सैन्य चर्चाएं और सीमा कार्मिक बैठकें (BPM) नियमित रूप से आयोजित की गईं. इन सभी मंचों पर दोनों पक्षों ने अपने साझा हितों और आपसी चिंताओं से जुड़े गंभीर मुद्दों को बेहद सौहार्दपूर्ण वातावरण में उठाया और चर्चाओं के जरिए समाधान खोजने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया.
नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ और युद्ध विराम उल्लंघन के नए आंकड़े
दूसरी ओर, भारत की पश्चिमी सीमा यानी नियंत्रण रेखा (LOC) पर सुरक्षा परिदृश्य में बदलाव देखने को मिला है. रक्षा मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2025 के दौरान आतंकियों द्वारा नियंत्रण रेखा के रास्ते भारतीय सीमा में घुसपैठ करने की कुल छह कोशिशें दर्ज की गईं. इन घुसपैठ रोधी अभियानों के दौरान भारतीय सेना ने मुस्तैदी दिखाते हुए कुल 12 पाकिस्तानी आतंकियों को मार गिराया. पिछले वर्षों की तुलना में नियंत्रण रेखा पर होने वाली सीधी घुसपैठ की घटनाओं में कमी आई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने पाया है कि आतंकी समूहों ने अब अपना ध्यान अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) वाले मैदानी क्षेत्रों की ओर स्थानांतरित कर दिया है, जहां वे मादक पदार्थों और हथियारों जैसी युद्ध सामग्री की तस्करी की कोशिशें कर रहे हैं.
इसके साथ ही, वर्ष 2025 के दौरान नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम उल्लंघन की घटनाओं में एक अप्रत्याशित उछाल देखा गया. इस वर्ष कुल 163 संघर्ष विराम उल्लंघन के मामले दर्ज किए गए, जबकि इसके विपरीत वर्ष 2024 में केवल दो ऐसे मामले सामने आए थे. 2025 में दर्ज किए गए इन 163 उल्लंघनों में से अधिकांश यानी 124 मामले अकेले ऑपरेशन सिंदूर की अवधि के दौरान अंजाम दिए गए, जिससे स्पष्ट होता है कि इस दौरान सीमा पर सुरक्षा स्थिति कितनी संवेदनशील बनी हुई थी.
जम्मू-कश्मीर के भीतरी क्षेत्रों में उग्रवाद रोधी अभियान
जम्मू-कश्मीर के आंतरिक इलाकों में भी वर्ष 2025 के दौरान सुरक्षा बलों का आतंकवाद विरोधी अभियान पूरी आक्रामकता के साथ जारी रहा. इन सैन्य अभियानों के दौरान भीतरी इलाकों में कुल 19 खूंखार आतंकवादियों को मार गिराया गया. विशेष रूप से, ढेर किए गए इन आतंकियों में से आठ आतंकी सीधे तौर पर पाकिस्तानी नागरिक थे. इसका अर्थ यह है कि आंतरिक सुरक्षा अभियानों में मारे गए आतंकियों का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा पाकिस्तान से सीमा पार करके आया था, जो जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से संचालित होने वाले छद्म युद्ध में पाकिस्तान की निरंतर संलिप्तता को स्पष्ट रूप से उजागर करता है.
ड्रोन घुसपैठ और तकनीकी काउंटर-सिस्टम का इस्तेमाल
सुरक्षा के मोर्चे पर एक और बड़ी चुनौती हवाई क्षेत्र से मिलने वाली घुसपैठ की रही है. वर्ष 2025 के दौरान भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ड्रोन घुसपैठ के कुल 863 मामले दर्ज किए गए. इनमें से जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती इलाकों में केवल नौ मामले सामने आए, जबकि पंजाब और राजस्थान की सीमाओं पर ड्रोन गतिविधियों के सर्वाधिक 854 मामले दर्ज किए गए. इस आधुनिक तकनीकी खतरे से निपटने के लिए भारतीय सुरक्षा बलों ने अत्यधिक प्रभावी ढंग से आधुनिक स्पूफर और जैमर तकनीकों का इस्तेमाल किया. सुरक्षा बलों की इस मुस्तैदी के कारण कुल 237 अवैध ड्रोनों को मार गिराने में सफलता हासिल हुई, जिनमें से पांच ड्रोन ऐसे थे जो घातक हथियारों और युद्ध जैसी अन्य सामग्री की तस्करी के लिए भेजे गए थे.



















