राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुई एक गंभीर दुर्घटना के बाद नगर निगम यानी एमसीडी पूरी तरह हरकत में आ गई है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में अब कमर्शियल और रिहायशी इमारतों की सघन जांच की जा रही है, और नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का दौर शुरू हो गया है। अवैध निर्माणों पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली नगर निगम ने एक व्यापक और अनिवार्य चेकलिस्ट भी जारी कर दी है, जिसके नियमों पर खरा न उतरने वाली इमारतों को सीधे सील किया जा रहा है।
नई चेकलिस्ट और कड़े मानक
अवैध निर्माणों के साथ-साथ अग्नि सुरक्षा मानकों के गंभीर उल्लंघनों को रोकने के लिए नगर निगम दिल्ली ने बिल्डिंग प्लान की मंजूरी और फायर एनओसी यानी नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट देने की प्रक्रिया के वास्ते एक विस्तृत चेकलिस्ट को अनिवार्य बना दिया है। सत्य निकेतन हादसे के बाद उठाया गया यह कदम एमसीडी द्वारा छेड़े गए व्यापक सुरक्षा अभियान का एक अहम हिस्सा है। इस नई चेकलिस्ट में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल किया गया है, जैसे कि बिल्डिंग का संरचनात्मक स्थिरता प्रमाण-पत्र, आग से सुरक्षा के लिए जरूरी उपकरणों की स्थापना, आपातकालीन निकास मार्गों की उपलब्धता, नेशनल बिल्डिंग कोड के नियमों का पूरी तरह पालन, पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था, और यह सुनिश्चित करना कि निर्माण कार्य पूरी तरह स्वीकृत नक्शे के अनुसार ही किया गया हो।
अनियमितताओं पर निगम की कार्रवाई
एमसीडी के अधिकारियों का स्पष्ट रूप से कहना है कि इस चेकलिस्ट के लागू होने से दिल्ली में तमाम इमारतों और चल रहे निर्माण कार्यों का सत्यापन बहुत व्यवस्थित हो जाएगा, जिससे किसी भी तरह की लापरवाही के कारण होने वाले हादसों की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी। हालिया निरीक्षण अभियानों के दौरान अधिकारियों ने पाया कि राजधानी में कई इमारतें बिना किसी वैध अग्नि मंजूरी के धड़ल्ले से चलाई जा रही थीं। इनमें से कई जगहों पर या तो पर्याप्त अग्निशमन यंत्र थे ही नहीं या फिर जो उपकरण लगे थे वे एक्सपायर हो चुके थे। इसी बात को ध्यान में रखते हुए निगम के सभी जोनों में चल रहे सर्वेक्षण और निरीक्षण के दौरान इसी नई चेकलिस्ट का सख्ती से इस्तेमाल करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं। जिन संपत्तियों के पास फायर एनओसी नहीं है, उन्हें सील करने के साथ-साथ उनके व्यापार लाइसेंस भी रद्द किए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
सत्य निकेतन की घटना के बाद से ही एमसीडी की अलग-अलग टीमें शहर के विभिन्न जिलों में लगातार निरीक्षण अभियान चला रही हैं। इस दौरान निगम का विशेष ध्यान चार से पांच मंजिला ऊंची उन इमारतों पर है जहां पीजी यानी पैइंग गेस्ट आवास चल रहे हैं या फिर जहां भारी संख्या में किराएदार रहते हैं, और ऐसी जगहों की विशेष रूप से जांच की जा रही है। हाल ही में दिल्ली के पूर्वी जोन में इस पूरी कार्रवाई और चेकलिस्ट के क्रियान्वयन को लेकर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें अधिकारियों ने अब तक की प्रगति का जायजा लिया। इस बैठक के दौरान संपत्ति मालिकों को सख्त सलाह दी गई है कि वे समय रहते सभी नियमों का पालन करना सुनिश्चित करें, अन्यथा उन्हें कड़ी सीलिंग और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। हालांकि, इस प्रशासनिक सख्ती को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, जहां कुछ बिल्डरों ने मंजूरी प्रक्रिया में देरी होने की आशंका जताई है, वहीं दूसरी ओर आम नागरिकों और स्थानीय लोगों ने इस सुरक्षात्मक कदम का जोरदार स्वागत किया है।


















