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चावल के भूसे और दर्रे से घर पर बनेगा कम खर्च वाला पशु आहार, पूनम सोरेन ने बताया अनुपातझारखंड
16 सित॰ 2026, 11:15 am (9 दिन पहले)· 0

चावल के भूसे और दर्रे से घर पर बनेगा कम खर्च वाला पशु आहार, पूनम सोरेन ने बताया अनुपात

दूध देने वाली गायों और भैंसों के लिए दर्रा, चावल का भूसा, दलहन का छिलका और मिनरल मिक्सचर मिलाकर घर पर संतुलित आहार बनाया जा सकता है. पशु चिकित्सक पूनम सोरेन के अनुसार, यह मिश्रण दूध की मात्रा और गाढ़ेपन में सुधार में मदद कर सकता है, लेकिन मात्रा पशु की स्थिति के अनुसार तय करनी और इसे धीरे-धीरे शुरू करना चाहिए.

महंगे बाजार दाने पर आने वाला मासिक खर्च घटाने के लिए गाय और भैंस के पशुपालक घर पर उपलब्ध सामग्री से संतुलित आहार तैयार कर सकते हैं. देवघर कृषि विज्ञान केंद्र की प्रमुख सह पशु चिकित्सक डॉ. पूनम सोरेन ने दर्रे और चावल के भूसे के साथ दलहन का छिलका तथा मिनरल मिक्सचर मिलाने का तरीका बताया है. इससे दाने की लागत घटाने के साथ दुधारू पशु को जरूरी पोषण देने पर भी ध्यान दिया जा सकेगा.

महंगे तैयार दाने पर निर्भरता घटेगी

बाजार से महंगा दाना और पशु आहार खरीदने पर पशुपालकों का हर महीने काफी खर्च होता है. घर पर पहले से उपलब्ध चीजों का इस्तेमाल करके यह बोझ कम किया जा सकता है, लेकिन मिश्रण में सिर्फ सस्ती सामग्री भरना पर्याप्त नहीं है. पशु की जरूरत के अनुसार अलग-अलग घटकों को सही मात्रा में जोड़ना जरूरी है. पूनम सोरेन ने जो मिश्रण बताया है, उसे गाय और भैंस, दोनों दुधारू पशुओं के लिए घरेलू आहार के रूप में तैयार किया जा सकता है.

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सामग्री और उनका अनुपात

इस फॉर्मूले में चावल का भूसा करीब 25 प्रतिशत और दर्रा 10 प्रतिशत रखा जाए. मिनरल मिक्सचर की मात्रा करीब 20 प्रतिशत रखने के साथ दलहन का छिलका उचित मात्रा में लिया जाए. दलहन के छिलके के लिए अलग से कोई प्रतिशत मात्रा तय नहीं की गई है, इसलिए उसे बताए गए अनुपातों के अनुसार ही मिलाना है. जरूरत के अनुसार सेंधा नमक भी डाला जा सकता है.

  • चावल का भूसा: मिश्रण का करीब 25 प्रतिशत हिस्सा.
  • दर्रा: मिश्रण में 10 प्रतिशत.
  • मिनरल मिक्सचर: करीब 20 प्रतिशत.
  • दलहन का छिलका: उचित मात्रा में.

सभी घटकों को अच्छी तरह मिलाने के बाद ही आहार गाय या भैंस को दिया जाए. हालांकि ऊपर दिए गए अनुपात को हर पशु पर बिना बदले लागू नहीं करना चाहिए. आहार की कुल मात्रा तय करते समय पशु का स्वास्थ्य और दूध देने की क्षमता देखने के साथ उसकी उम्र व वजन भी ध्यान में रखना होगा.

दूध की मात्रा और गाढ़ेपन पर असर

इस आहार का मकसद पशु का पेट भरना ही नहीं है. दुधारू पशु को पर्याप्त पोषण मिलने से उसके स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर असर दिख सकता है. पूनम सोरेन के अनुसार, संतुलित आहार से दूध उत्पादन बढ़ने में मदद मिल सकती है. इसके अलावा दूध अधिक गाढ़ा हो सकता है, जिसे उसकी गुणवत्ता में सुधार के रूप में देखा जा सकता है. इसलिए केवल हरा चारा या भूसा देकर संतुलन पूरा मान लेना उचित नहीं है. पशु की जरूरत के अनुसार ही आहार का मिश्रण तैयार करना चाहिए.

नया आहार धीरे-धीरे शुरू करें

पशुपालकों के लिए सबसे जरूरी सावधानी यह है कि किसी नए आहार को शुरू में ही अधिक मात्रा में न दिया जाए. मात्रा थोड़ी-थोड़ी बढ़ाई जानी चाहिए. इस बीच दूध उत्पादन और पशु के स्वास्थ्य पर नजर रखनी चाहिए. ऐसा करने से परिवर्तन का असर देखा जा सकता है और पशु को नए मिश्रण से धीरे-धीरे परिचित कराया जा सकता है. नए आहार के साथ-साथ साफ पानी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराना भी जरूरी है.

हरा और सूखा चारा भी जरूरी

घर पर तैयार मिश्रण चारे की बुनियादी जरूरत को खत्म नहीं करता. पशु को पर्याप्त साफ पानी, हरा चारा और सूखा चारा देना जरूरी है. ये तीनों हिस्से दैनिक देखभाल का आधार हैं और संतुलित आहार पशु की पोषण जरूरतों को पूरा करने में मदद करता है.

किन स्थितियों में सलाह लेनी चाहिए

यदि पशु को पहले से कोई बीमारी है, या वह गर्भवती है, या वह बहुत अधिक दूध देता है, तो मात्रा और घटकों का मिश्रण तय करते समय पशु चिकित्सक या पशु पोषण विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है. इन तीनों स्थितियों में विशेषज्ञ सलाह की सिफारिश की गई है. सही मात्रा और संतुलन के साथ घर पर बनाया गया आहार पशु पोषण और दूध उत्पादन में सुधार का उपयोगी तरीका हो सकता है, लेकिन मात्रा हमेशा पशु की स्थिति के अनुसार ही रखी जानी चाहिए.

सवाल-जवाब

घर पर तैयार आहार में कौन सी सामग्री डालनी है?
दर्रे और चावल के भूसे के साथ दलहन का छिलका तथा मिनरल मिक्सचर मिलाया जाए. जरूरत के अनुसार सेंधा नमक भी डाला जा सकता है.
चावल के भूसे, दर्रे और मिनरल मिक्सचर का अनुपात क्या रखा जाए?
चावल का भूसा करीब 25 प्रतिशत, दर्रा 10 प्रतिशत और मिनरल मिक्सचर करीब 20 प्रतिशत रखा जा सकता है.
दलहन के छिलके की मात्रा कितनी हो?
दलहन का छिलका उचित मात्रा में लेना है. इसके लिए अलग से कोई प्रतिशत मात्रा तय नहीं की गई है.
क्या हर गाय और भैंस को आहार की एक जैसी मात्रा दी जाए?
नहीं. आहार की मात्रा तय करते समय पशु की उम्र, वजन, स्वास्थ्य और दूध देने की क्षमता को ध्यान में रखना चाहिए.
क्या नया आहार सीधे अधिक मात्रा में शुरू किया जा सकता है?
नया आहार अधिक मात्रा में अचानक शुरू नहीं करना चाहिए. मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाते हुए पशु के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर नजर रखनी चाहिए.
क्या इस मिश्रण के अलावा और क्या देना जरूरी है?
पशु को पर्याप्त साफ पानी, हरा चारा और सूखा चारा देना जरूरी है.
संतुलित आहार से दूध पर क्या असर हो सकता है?
संतुलित आहार दूध की मात्रा बढ़ाने में मदद कर सकता है. दूध के गाढ़ेपन यानी गुणवत्ता में भी सुधार हो सकता है.
किन पशुओं के मामले में विशेषज्ञ सलाह लेनी चाहिए?
बीमार, गर्भवती या बहुत अधिक दूध देने वाले पशु के लिए पशु चिकित्सक या पशु पोषण विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Meera Joshi@meera-joshi·8 दिन पहले

पशुपालकों के लिए पशु आहार की बढ़ती लागत सिर्फ़ आर्थिक बोझ ही नहीं, बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक सुख-शांति पर भी गहरा दबाव डालती है। घरेलू संसाधनों से संतुलित पशु आहार तैयार करने की यह पहल ग्रामीण परिवारों में वित्तीय चिंता को कम करने का व्यावहारिक ज़रिया बन सकती है। जब पशुपालक आत्मनिर्भर महसूस करते हैं और अपने मवेशियों की बेहतर देखभाल कर पाते हैं, तो इससे उनका मानसिक तनाव घटता है और जीवन की गुणवत्ता में सुधार आता है। देखभाल और पोषण का यह संतुलन ग्रामीण जीवन में सकारात्मकता और भावनात्मक स्थिरता को बढ़ावा देता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·8 दिन पहले

कृषि विज्ञान केंद्रों द्वारा स्थानीय स्तर पर पशु आहार के सस्ते विकल्पों का प्रसार ग्रामीण अर्थव्यवस्था और डेयरी नीति के लिहाज़ से एक महत्वपूर्ण पहल है। इनपुट कॉस्ट यानी चारा उत्पादन लागत में कमी सीधे तौर पर छोटे और सीमांत किसानों की घरेलू आय को सुरक्षा प्रदान करती है। सरकारी विस्तार सेवाओं (Agricultural Extension Services) का मुख्य उद्देश्य केवल वैज्ञानिक तकनीक देना नहीं, बल्कि बाज़ार पर बढ़ती निर्भरता को घटाना भी है। यदि ऐसे व्यावहारिक फॉर्मूलों को राज्य स्तरीय पशुपालन नीतियों में शामिल कर व्यापक स्तर पर लागू किया जाए, तो बिना अतिरिक्त वित्तीय बोझ के ग्रामीण आजीविका को मजबूत किया जा सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·8 दिन पहले

अर्जुन की बात से आगे बढ़ते हुए, वित्तीय और बाज़ार के दृष्टिकोण से देखा जाए तो पशु आहार की लागत डेयरी उद्योग की कुल परिचालन लागत का 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा होती है। कमर्शियल चारे की कीमतों में उतार-चढ़ाव और मुद्रास्फीति छोटे पशुपालकों के लाभ मार्जिन को सीधे प्रभावित करती है। चावल के भूसे और स्थानीय सामग्री आधारित फॉर्मूले से इनपुट कॉस्ट घटती है, जिससे किसानों को कमोडिटी बाज़ार के जोखिमों से सुरक्षा मिलती है। यदि ऐसे लागत-प्रभावी मॉडलों को व्यापक स्तर पर अपनाया जाए, तो यह न केवल दूध की उत्पादन लागत नियंत्रित करेगा बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में डिस्पोजेबल आय बढ़ाकर खाद्य मुद्रास्फीति को संतुलित करने में भी मददगार साबित होगा।

Rohan Verma@rohan-verma·8 दिन पहले

पशुपालकों के लिए दाने का मासिक खर्च घटाना सीधे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और डेयरी क्षेत्र की स्थिरता से जुड़ा विषय है। यदि कृषि विज्ञान केंद्रों के इस तरह के लागत-रोधी और व्यावहारिक फॉर्मूलों को जमीनी स्तर पर व्यापक प्रशिक्षण के माध्यम से छोटे पशुपालकों तक पहुँचाया जाए, तो बाजार के महंगे पशु आहार पर निर्भरता कम होगी। शासन और पशुपालन विभाग को इसे विस्तार सेवाओं का हिस्सा बनाकर गाँव-गाँव तक प्रचारित करना चाहिए ताकि दुग्ध उत्पादन की गुणवत्ता और किसानों की आय दोनों में सुधार हो सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·8 दिन पहले

रोहन की बात से सहमत होते हुए कानूनी और सार्वजनिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से देखें तो प्रामाणिक घरेलू पशु आहार को बढ़ावा देने से ग्रामीण क्षेत्रों में बिकने वाले मिलावटी और नकली व्यावसायिक पशु आहार के अवैध कारोबार पर भी लगाम लगेगी। बाजार में बिकने वाले घटिया पशु आहार से किसानों को होने वाले वित्तीय नुकसान को रोकने के लिए पशुपालन विभाग और स्थानीय प्रशासन को ऐसे व्यावहारिक अनुपातों का मानकीकरण करना चाहिए। जब किसानों के पास वैज्ञानिक और सुरक्षित विकल्प उपलब्ध होंगे, तो वे ठगी और असुरक्षित मिश्रणों के शिकार होने से बचेंगे, जिससे दुग्ध आपूर्ति श्रृंखला में जन-स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन भी सुनिश्चित हो सकेगा।

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