सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स यानी सीआरपीएफ में जल्द ही बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सब कुछ योजना के अनुसार चला तो बल में पुरानी व्यवस्था फिर से लौट आएगी, जिससे सिपाहियों को प्रमोशन के लिए दो दशकों से अधिक का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। बल ने अपने जवानों को एक निश्चित समय सीमा के भीतर पदोन्नति का लाभ देने के लिए लांस नायक और नायक के पदों को दोबारा शुरू करने की एक रूपरेखा तैयार की है। इस नए बदलाव से बल के भीतर करियर की रफ्तार तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है।
प्रस्ताव के मुताबिक यदि यह व्यवस्था मूर्त रूप लेती है, तो सिपाहियों को 5 साल की सेवा पूरी करने पर लांस नायक, 10 साल की नौकरी के बाद नायक और 15 साल की सर्विस होने पर हवलदार के पद पर प्रमोशन मिल सकेगा। सीआरपीएफ महानिदेशालय ने इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को बल की सभी यूनिटों के पास भेज दिया है। यूनिटों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ इस मसले पर खुद सिपाहियों और हवलदारों से भी उनके विचार मांगे गए हैं। सभी संबंधित पक्षों को 48 घंटे के भीतर अपने सुझाव और प्रतिक्रिया भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
प्राप्त सुझावों पर विचार करने के लिए सैनिक सम्मेलनों, बैठकों और रोल कॉल के दौरान जवानों के साथ व्यापक चर्चा की जाएगी। इस दौरान जो भी व्यावहारिक सुझाव सामने आएंगे, उन्हें संकलित करके बल मुख्यालय भेजा जाएगा। इन सभी प्रतिक्रियाओं का बारीकी से अध्ययन करने के बाद ही इस पूरे प्रस्ताव पर कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि जमीनी स्तर की राय जानने के बाद ही यह नीति पूरी तरह प्रभावी बन सकेगी।
लगभग तीन दशक पहले समाप्त कर दिए गए थे ये दोनों रैंक
गौर करने वाली बात यह है कि सीआरपीएफ में पहले भी लांस नायक और नायक के पद हुआ करते थे। आज से करीब तीन दशक पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय की औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद 10 अक्टूबर 1997 को इन दोनों ही रैंकों को समाप्त कर दिया गया था। उस समय इन पदों को सिपाही और हवलदार के रैंक में मर्ज कर दिया गया था। इस प्रशासनिक बदलाव का सीधा और गहरा असर सिपाहियों की करियर प्रगति पर पड़ा था। मौजूदा व्यवस्था यह है कि एक सिपाही को अपनी पहली पदोन्नति यानी हेड कांस्टेबल बनने के लिए करीब 20 से 22 साल तक लंबा इंतजार करना पड़ता है। इतने लंबे समय तक एक ही पद पर बने रहने के कारण जवानों के मनोबल पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा था।
अब मात्र 10 साल की नौकरी में मिलेंगे दो महत्वपूर्ण प्रमोशन
सीआरपीएफ के जनरल ड्यूटी कैडर में प्रमोशन के अवसरों में इजाफा करने के मकसद से ही इन पुरानी रैंकों को समयबद्ध तरीके से दोबारा शुरू करने का विचार किया गया है। प्रस्तावित ढांचे के तहत 5 साल की सेवा पूरी करने के बाद सिपाही को लांस नायक के रूप में पदोन्नत किया जाएगा। इसके बाद 10 साल की नौकरी पूरी होने पर लांस नायक को नायक बनाया जाएगा। वहीं, 15 साल की सर्विस पूरी होने पर वे हवलदार के पद पर प्रमोट होंगे। खास बात यह है कि प्रस्ताव में इन दोनों रैंकों को शुरुआती चरण में एड-हॉक यानी अस्थायी आधार पर बहाल करने का जिक्र किया गया है।
मैदानी इलाकों और अभियानों में बढ़ेगा नेतृत्व और अनुशासन
सीआरपीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, लांस नायक और नायक जैसे पद छोटी टुकड़ियों और टीमों का नेतृत्व करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। घने जंगलों में चलाए जा रहे अभियानों, गश्त और अत्यधिक संवेदनशील इलाकों में तैनाती के दौरान ऐसे अनुभवी जवानों की सख्त जरूरत होती है जो जरूरत पड़ने पर अपने साथियों की अगुवाई कर सकें और मौके पर तुरंत जिम्मेदारी संभाल सकें। इन रैंकों के फिर से शुरू होने से वरिष्ठ और कनिष्ठ कर्मियों के बीच कमान की एक मजबूत और अतिरिक्त कड़ी तैयार हो जाएगी। इससे दैनिक ड्यूटी का उचित बंटवारा करने, जवानों के काम की बेहतर निगरानी रखने और किसी भी ऑपरेशन के दौरान आपसी तालमेल को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।





















