उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में शादियों और त्योहारों का सीजन शुरू हो चुका है, जो अमूमन खरीदारी के लिए सबसे व्यस्त समय माना जाता है। इस दौरान लोग बड़े पैमाने पर सोने और चांदी की खरीदारी करते हैं, लेकिन इस बार हालात बिल्कुल उलट नजर आ रहे हैं। पिछले एक हफ्ते के दौरान कीमती धातुओं के दाम में कुछ कमी जरूर दर्ज की गई है, इसके बावजूद ग्राहकों का रुझान बाजार की तरफ नहीं बन पा रहा है। लोग अभी भी ऊंचे दामों के असर से उबर नहीं पाए हैं और इस उम्मीद में बैठे हैं कि आने वाले दिनों में कीमतें और ज्यादा नीचे आ सकती हैं।
आयात में भारी गिरावट की वजह
सरकारी और बाजार के आंकड़े बताते हैं कि सितंबर महीने में देश के भीतर सोने के आयात में 81.27 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है और यह घटकर मात्र 1.8 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। इसके साथ ही चांदी का आयात भी 49.11 प्रतिशत की सुस्ती के साथ 66.50 करोड़ डॉलर पर सिमट गया है। बाजार के जानकारों का कहना है कि सरकार द्वारा कीमती धातुओं पर सीमा शुल्क में की गई भारी बढ़ोतरी का सीधा असर इन आयात के आंकड़ों पर पड़ा है, जिससे पूरी सप्लाई चेन प्रभावित हुई है।
देहरादून के बाजार में सोने और चांदी के मौजूदा भाव
स्थानीय स्तर पर देहरादून के सर्राफा बाजार के व्यापारियों के अनुसार पिछले कुछ दिनों से सोने और आभूषणों की मांग में लगातार कमी दर्ज की जा रही है। कमल ज्वैलर्स के नवीन रस्तोगी बताते हैं कि बाजार में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,47,400 रुपए प्रति 10 ग्राम चल रही है। वहीं दूसरी ओर, 22 कैरेट सोना 1,35,350 रुपए, 18 कैरेट सोना 1,12,35 रुपए प्रति 10 ग्राम के भाव पर बिक रहा है। इसके अलावा 14 कैरेट सोने की कीमत 88,700 रुपए प्रति 10 ग्राम दर्ज की जा रही है। जहां तक चांदी का सवाल है, तो चांदी का भाव आसमान छूते हुए 2 लाख 15 हजार रुपए प्रति किलो तक पहुंच चुका है।
हल्के वजन के गहनों और चांदी की ओर बढ़ा रुझान
बाजार के मौजूदा हालात को देखते हुए सर्राफा व्यापारियों का कहना है कि खरीदारों की प्राथमिकता अब पूरी तरह बदल चुकी है। लोग भारी-भरकम गहनों की जगह अब चांदी और कम वजन वाले आभूषणों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। हालांकि पिछले कुछ दिनों के भीतर सोने और चांदी के दामों में 3 से 4 हजार रुपए तक की राहत भी मिली है, फिर भी ग्राहक खुलकर खरीदारी करने से बच रहे हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिवाली के मुख्य पर्व के दौरान बाजार की चाल कैसी रहती है और खरीदारी में कितना उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।



















