जुलाई 2026 के दौरान जंतर-मंतर समेत देश के विभिन्न इलाकों में भड़की हिंसक घटनाओं की तह तक जाने के लिए न्यायिक प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच के वास्ते उच्चतम न्यायालय द्वारा बनाई गई हाई पावर इन्क्वायरी कमेटी ने अब एक समर्पित वेब पोर्टल की शुरुआत की है। इस विशेष डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अब कोई भी पीड़ित व्यक्ति आसानी से अपनी बात सीधे समिति तक पहुंचा सकता है। जांच को पारदर्शी और सुलभ बनाने के उद्देश्य से यह पोर्टल शुरू किया गया है, जिसके माध्यम से शिकायतें और महत्वपूर्ण विवरण ऑनलाइन साझा किए जा सकते हैं।
यह नया डिजिटल माध्यम केवल आम जनता और प्रभावित नागरिकों के लिए ही नहीं है, बल्कि उन पुलिसकर्मियों के लिए भी खुला है जो इन हिंसक प्रदर्शनों के दौरान घायल हुए थे या जिन्हें ड्यूटी के दौरान नुकसान उठाना पड़ा था। सभी पक्षों को अपनी बात रखने का समान अवसर देने के लिए इस पोर्टल को तैयार किया गया है। वे सभी लोग जो इस हिंसा से किसी भी रूप में प्रभावित हुए हैं, वे आधिकारिक वेबसाइट http://hpec.nic.in पर जाकर अपने दस्तावेज या शिकायतें दर्ज करा सकते हैं, ताकि जांच में किसी भी तरह की कोई रुकावट न आए।
किन मामलों को मिलेगी जांच में प्राथमिकता
शीर्ष अदालत द्वारा 18 अगस्त 2026 और 10 सितंबर 2026 को दिए गए स्पष्ट आदेशों के आधार पर कुछ खास बिंदुओं को जांच के केंद्र में रखा गया है। हाई पावर इन्क्वायरी कमेटी इन सभी संवेदनशील मुद्दों की बेहद बारीकी से छानबीन कर रही है। इस पूरी जांच प्रक्रिया के दौरान सबसे ज्यादा जोर पैलेट गन के इस्तेमाल से जुड़े मामलों पर दिया जाएगा, जिन्हें सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा गया है। इसके अलावा प्रदर्शन के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों को खासतौर पर निशाना बनाकर की गई हिंसा और उनके उत्पीड़न के मामलों की भी गहराई से जांच की जा रही है।
इस जांच के दायरे में केवल एक पक्ष नहीं बल्कि दोनों तरफ के हालात को परखा जा रहा है। चाहे वह पुलिसकर्मी हों या फिर आम प्रदर्शनकारी, दोनों पक्षों की ओर से किए गए अत्यधिक बल प्रयोग और सरकारी या निजी संपत्ति को पहुंचे नुकसान के मामलों को बेहद गंभीरता के साथ परखा जा रहा है। कमेटी यह सुनिश्चित करने में लगी है कि हिंसा की जड़ तक पहुंचकर हर एक पहलू की सच्चाई सामने लाई जा सके, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
शिकायतकर्ताओं और गवाहों के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
इस तरह के संवेदनशील मामलों में अक्सर यह देखा गया है कि लोग बाहरी दबाव, डर या अन्य कारणों की वजह से खुलकर सामने आने से बचते हैं और गवाही देने से कतराते हैं। इसी बड़ी समस्या को ध्यान में रखते हुए इस नए पोर्टल को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इस्तेमाल करने वालों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो। जांच समिति ने यह बात बिल्कुल साफ कर दी है कि जो भी गवाह कमजोर स्थिति में हैं या जिन्हें किसी भी प्रकार के खतरे का सामना करना पड़ रहा है, उन्हें पूरी सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी ताकि वे बिना किसी डर के सच सामने रख सकें।
इसके साथ ही गोपनीयता का भी पूरा ख्याल रखा गया है। यदि कोई पीड़ित या गवाह यह चाहता है कि उसकी पहचान सार्वजनिक न हो और उसका नाम गुप्त रखा जाए, तो पोर्टल पर उसकी जानकारी को पूरी तरह से सुरक्षित और गोपनीय रखा जाएगा। कमेटी ने सभी संबंधित पक्षों और प्रभावित लोगों से यह अपील की है कि वे इस डिजिटल प्लेटफॉर्म का खुलकर उपयोग करें। पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने या अपना पक्ष रखने के लिए बहुत ही सरल फॉर्मेट दिए गए हैं, जिनकी मदद से कोई भी व्यक्ति आसानी से अपनी बात जांच समिति तक पहुंचा सकता है।



















