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देहरादून में टैटू का बदलता स्वरूप, जापानी समुराई से मिस्र के प्रतीकों तक युवाओं में चढ़ा नया रंगउत्तराखंड
24 सित॰ 2026, 10:02 pm (43 दिन पहले)· 0

देहरादून में टैटू का बदलता स्वरूप, जापानी समुराई से मिस्र के प्रतीकों तक युवाओं में चढ़ा नया रंग

देहरादून में टैटू अब महज फैशन नहीं बल्कि आस्था और जज्बातों की अभिव्यक्ति बन चुका है, जहां जापानी और मिस्र की प्राचीन कलाकृतियों की मांग सबसे ज्यादा देखी जा रही है।

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की आबोहवा में बॉडी आर्ट यानी टैटू बनवाने का चलन हर आयु वर्ग के नागरिकों में रफ्तार पकड़ रहा है। शरीर पर स्याही से आकृतियां उकेरना अब केवल दिखावे या स्टाइल तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह व्यक्तिगत भावनाओं, आत्मीय रिश्तों और धार्मिक निष्ठा को जाहिर करने का सशक्त जरिया बन गया है। शहर के लोग अपनी मां के प्रति कृतज्ञता जताने के लिए उनका चेहरा या नाम त्वचा पर खुदवा रहे हैं, तो वहीं कई लोग अपने साथी के प्रति लगाव प्रकट करने हेतु कलात्मक रूप से नाम लिखवा रहे हैं। नई पीढ़ी के लड़के-लड़कियों में अपने आदर्शों और प्रेरणास्रोत हस्तियों के हुबहू चेहरे बनवाने की ललक भी स्पष्ट रूप से नजर आ रही है।

देहरादून की टैटू कलाकार निशा गुरुंग के अनुसार इन दिनों चुने जा रहे पैटर्न्स में अंतरराष्ट्रीय संस्कृति और वैश्विक विरासत का गहरा प्रभाव दिखाई दे रहा है। दून के युवा विदेशी पारंपरिक कलाकृतियों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। इस क्रम में जापान की लोककथाओं और परंपराओं से जुड़े ड्रैगन तथा समुराई योद्धाओं के रेखाचित्रों को खूब तरजीह दी जा रही है। इसके साथ ही प्राचीन मिस्र की रहस्यमयी विरासत, जैसे कि ममीकरण और मृत्यु से जुड़े देवता एनुबिस और सुरक्षा का प्रतीक मानी जाने वाली आई ऑफ होरस की कलाकृतियों की भी खासी लोकप्रियता है। लोग इन सदियों पुराने सांस्कृतिक प्रतीकों के माध्यम से अपनी आंतरिक सोच और पहचान को बयां करने में गर्व महसूस कर रहे हैं।

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पीढ़ी और उम्र के अनुसार पसंद का दायरा

निशा गुरुंग का मानना है कि शरीर पर कलाकृतियां तराशने की पसंद समय के चक्र के साथ बदलती रहती है और विभिन्न पीढ़ियों की रुचि में बड़ा अंतर दिखता है। युवा तबका मुख्य रूप से वन्यजीवों, जापानी एनिमे किरदारों और विभिन्न दार्शनिक चिन्हों को अपने शरीर पर सजाना पसंद करता है। दूसरी ओर युवतियों और महिलाओं में बारीक और मिनिमल डिजाइंस की मांग सबसे ज्यादा है, जिनमें छोटे फूल, तितलियां और महीन कलात्मक रेखाएं शामिल हैं। इसके अलावा परिवार या जीवनसाथी के नाम को अक्षरों में ढालने का चलन हर पीढ़ी में सदाबहार बना हुआ है। उम्र बढ़ने के साथ लोगों की प्राथमिकताओं में अध्यात्म और आस्था का पुट साफ तौर पर गहराने लगता है।

आध्यात्मिक आस्था और सेलिब्रिटी टैटू का असर

चालीस वर्ष की उम्र पार कर चुके लोग मुख्य रूप से धार्मिक विषयों पर आधारित टैटू बनवाना पसंद करते हैं। ऐसे ग्राहकों की पहली पसंद 'ॐ', भगवान शिव का त्रिशूल और विभिन्न देवी-देवताओं के विग्रह होते हैं, जिन्हें वे अपनी भक्ति और श्रद्धा के प्रतीक के तौर पर धारण करते हैं। इसके समानांतर, प्रसिद्ध गायकों, फिल्मी अभिनेताओं और हस्तियों के शरीर पर बने टैटू की नकल करने का क्रेज भी प्रशंसकों में बना रहता है, भले ही कई बार उन चिन्हों का गूढ़ अर्थ उन्हें स्पष्ट न हो।

स्थायी रूप देने से पहले अस्थाई टैटू का परीक्षण

त्वचा पर हमेशा रहने वाली स्याही लगवाने को लेकर कई लोग हिचकिचाते भी हैं, इसलिए वे शुरुआत में अस्थाई टैटू बनवाकर उसके प्रभाव और रूप को जांचते हैं। जब चर्चित फिल्म 'चक दे इंडिया' की अभिनेत्री चित्रांशी रावत देहरादून में शूटिंग के सिलसिले में पहुंची थीं, तब निशा गुरुंग ने उनके लिए भी एक अस्थाई टैटू तैयार किया था। जो शौकीन इस बात को लेकर असमंजस में होते हैं कि कोई डिजाइन उनके व्यक्तित्व पर कैसा दिखेगा, वे पहले कुछ दिनों तक अस्थाई रूप से उसे अपनाते हैं और पूरी तरह आश्वस्त होने के बाद ही उसे स्थायी रूप में ढलवाते हैं।

सवाल-जवाब

देहरादून के युवाओं में कौन से अंतरराष्ट्रीय टैटू डिजाइन सबसे लोकप्रिय हैं?
युवाओं में जापान की पारंपरिक कला से जुड़े ड्रैगन और समुराई योद्धाओं के अलावा मिस्र की सभ्यता के एनुबिस और आई ऑफ होरस के प्रतीकों की मांग सबसे अधिक है।
40 वर्ष से अधिक उम्र के लोग किस तरह के टैटू बनवाना पसंद करते हैं?
इस आयु वर्ग के लोग मुख्य रूप से धार्मिक और आध्यात्मिक डिजाइन चुनते हैं, जिनमें 'ॐ', त्रिशूल और विभिन्न देवी-देवताओं की आकृतियां शामिल हैं।
युवतियों और महिलाओं में कौन से टैटू डिजाइंस ट्रेंड कर रहे हैं?
लड़कियों और महिलाओं के बीच छोटे फूल, नाजुक रेखाएं और बारीक मिनिमल डिजाइंस काफी पसंद किए जा रहे हैं।
क्या लोग सीधे स्थायी टैटू बनवाते हैं या पहले कोई ट्रायल लेते हैं?
कई लोग स्थायी टैटू बनवाने से पहले उसका लुक और प्रभाव देखने के लिए अस्थायी टैटू बनवाते हैं और संतुष्ट होने के बाद ही स्थायी करवाते हैं।
फिल्म चक दे इंडिया की किस अभिनेत्री ने देहरादून में अस्थायी टैटू बनवाया था?
अभिनेत्री चित्रांशी रावत जब देहरादून में शूटिंग के लिए आई थीं, तब टैटू कलाकार निशा गुरुंग ने उनके लिए एक अस्थायी टैटू तैयार किया था।
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टिप्पणियाँ 5

Dr. Aditya Sharma@aditya-sharma·42 दिन पहले

मिस्र या जापान के प्रतीक शरीर पर बनवाना महज़ शौक नहीं लगता, खगोलीय प्रभाव और ऊर्जा का मामला है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·42 दिन पहले

देहरादून में मिस्र और जापान के प्रतीकों का क्रेज देखकर हैरानी होती है कि ट्रेंड इतनी जल्दी कैसे बदल जाते हैं। वैसे क्या परमानेंट टैटू बनवाने से पहले लोग वाकई सोचते हैं कि उम्र बीतने पर ये कैसे लगेंगे?

Ravikash Gupta@ravikash·42 दिन पहले

अर्जुन, बात तो सही है। आज कल तो ग्लोबल ट्रेंड्स इतनी तेजी से आते हैं कि लोग बिना सोचे-समझ, सिर्फ फैशन में परमानेंट टैटू बनवा रहे हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·42 दिन पहले

देहरादून में अब टैटू सिर्फ फैशन नहीं बल्कि लोगों के जज्बात दिखाने का जरिया बन गया है। जापानी समुराई से लेकर मिस्र के प्रतीकों तक, हर उम्र के लोग अपनी पसंद के हिसाब से शरीर पर कला बनवा रहे हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·42 दिन पहले

रोहन भाई, देहरादून में टैटू का ये क्रेज तो ठीक है, पर कई बार ऐसे मामलों में बाद में पहचान छिपाने या मिटाने के चक्कर में विवाद भी बढ़ जाते हैं, पुलिस के पास ऐसे कई मामले आते हैं।

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