हनुमानगढ़ जिले के संगरिया में सरहदों और संस्कृतियों की दूरियों को मिटाती हुई एक अनूठी शादी देखने को मिली। जब दिलों के तार आपस में जुड़ जाते हैं, तब भाषा, देश और संस्कृति की दीवारें स्वतः ही ढह जाती हैं। कुछ ऐसा ही नजारा इस कस्बे की गलियों में तब दिखाई दिया, जब फ्रांस से आए मेहमान राजस्थानी लोकगीतों और बैंड-बाजों की धुनों पर जमकर थिरकते नजर आए। फ्रांस से ब्याह रचाने आए दूल्हे रोमेन और स्थानीय बेटी दिव्या ज्योति का यह गठबंधन इस समय पूरे क्षेत्र में कौतुक और चर्चा का मुख्य केंद्र बना हुआ है।
न्यूजीलैंड में परवान चढ़ी प्रेम कहानी
इस अनूठी शादी के केंद्र में वार्ड 13 के रहने वाले सेवानिवृत्त शिक्षाकर्मी पुरुषोत्तम सिंह और शिक्षिका गीता गोयल की पुत्री दिव्या ज्योति हैं। ग्वालियर से बीटेक की डिग्री हासिल करने के बाद दिव्या ने गुरुग्राम और नोएडा की शीर्ष आईटी कंपनियों में अपनी सेवाएं दी थीं। इसके बाद पेशेवर सिलसिले में वे न्यूजीलैंड जा पहुंचीं, जहां उनकी मुलाकात फ्रांस के रहने वाले मैकेनिकल इंजीनियर रोमेन से हुई। शुरुआत में दोनों के बीच सामान्य जान-पहचान हुई, जो धीरे-धीरे गहरे स्नेह और आजीवन एक-दूसरे के साथ रहने के संकल्प में बदल गई। आज से करीब एक साल पहले इस जोड़े ने अपने-अपने परिजनों के सामने अपने रिश्ते की बात रखी। दोनों के परिवार बिल्कुल अलग-अलग संस्कृतियों और परिवेश से ताल्लुक रखते थे, इसके बावजूद आपसी बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने बच्चों के इस फैसले को सहर्ष स्वीकार कर लिया।
विदेशी मेहमानों ने उठाए देसी रीति-रिवाजों के लुत्फ
अपनी इस शादी के लिए रोमेन के साथ फ्रांस से लगभग 10 से 12 पारिवारिक सदस्य और रिश्तेदार विशेष तौर पर संगरिया पहुंचे थे। हनुमानगढ़ में रुके इन विदेशी मेहमानों ने भारतीय संस्कृति की गहराई को समझा और मेहंदी तथा अन्य मांगलिक रस्मों में पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। जब संगरिया के बाजारों से यह अनोखी बारात गुजरी, तो स्थानीय लोग विदेशी मेहमानों के इस पूरी तरह देसी अंदाज को देखकर हैरान रह गए और हर कोई इस पल को निहारता नजर आया।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूरे हुए सात फेरे
मुख्य समारोह का आयोजन एक स्थानीय पैलेस में किया गया, जहां सनातन धर्म की प्राचीन परंपराओं और वैदिक विधि-विधान के अनुसार दिव्या और रोमेन ने पाणिग्रहण संस्कार संपन्न किया और अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए। विदेश में आधुनिक माहौल में रहने के बावजूद इस जोड़े ने अपनी जन्मभूमि और पारंपरिक संस्कारों को नहीं छोड़ा। इस शादी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आधुनिकता के इस दौर में भी अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़ा रहना कितना महत्वपूर्ण है।


















