राजधानी दिल्ली में राष्ट्रीय सुरक्षा और अति-संवेदनशील वीआईपी इलाके की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने एक बड़ा कानूनी और प्रशासनिक फैसला सुनाया है। अदालत ने प्रधानमंत्री आवास (7, लोक कल्याण मार्ग) के बेहद नजदीक स्थित तीन प्रमुख अवैध झुग्गी बस्तियों को हटाने के लिए 6 सप्ताह की अंतिम समयसीमा निर्धारित कर दी है। हाईकोर्ट के इस सख्त निर्देश के बाद वर्षों से पीएम आवास परिसर के आसपास बसी इन अवैध झुग्गियों को पूरी तरह साफ करने का रास्ता तैयार हो गया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि तय 6 हफ्ते की अवधि में कब्जेदारों ने खुद से बोरिया-बिस्तर नहीं समेटा, तो प्रशासनिक अधिकारी पुलिस बल के सहयोग से जमीन को पूरी तरह खाली कराएंगे।
सुरक्षा कारणों से लिया गया सख्त निर्णय
यह महत्वपूर्ण आदेश मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की दो सदस्यीय पीठ द्वारा सुनाया गया है। पीठ ने अपने निर्णय में रेखांकित किया कि लोक कल्याण मार्ग क्षेत्र स्थित भाई राम (बी.आर.) कैंप, मस्जिद कैंप और डीआईडी कॉलोनी अति-संवेदनशील सुरक्षा जोन के अंतर्गत आती हैं। यह पूरा क्षेत्र न केवल देश के प्रधानमंत्री के आधिकारिक निवास के ठीक पास है, बल्कि भारतीय वायु सेना के सक्रिय स्टेशन से भी बिल्कुल सटा हुआ है। रणनीतिक जरूरतों और राष्ट्रीय सुरक्षा के कड़े मानकों को देखते हुए इस इलाके में किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा या अनधिकृत बसावट एक बड़ा सुरक्षा जोखिम माना गया है।
सावदा घेवरा में विस्थापित परिवारों का पुनर्वास
उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकताओं के साथ-साथ प्रभावित निवासियों के मानवीय अधिकारों के बीच संतुलन साधने का प्रयास किया है। इस फैसले से लगभग 700 परिवार सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। अदालत के निर्देशों के मुताबिक, पात्र परिवारों को बेघर होने से बचाने के लिए दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) की सावदा घेवरा स्थित आवासीय कॉलोनी में फ्लैट आवंटित कर पुनर्वासित किया जाएगा। 6 सप्ताह की दी गई समयसीमा के भीतर इन परिवारों को अपने वर्तमान स्थान को खाली करके आवंटित नए आशियाने में शिफ्ट होने का अवसर मिलेगा।
अनुच्छेद 21 के तहत 7-सदस्यीय निगरानी समिति का गठन
प्रभावित परिवारों के भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्राप्त सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए हाईकोर्ट ने विशेष निगरानी तंत्र स्थापित किया है। अदालत ने एक सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी की अध्यक्षता में 7-सदस्यीय उच्चस्तरीय निगरानी समिति के गठन का आदेश दिया है। यह समिति पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया पर नजर रखेगी और अगले 6 महीनों तक लगातार इस बात की निगरानी करेगी कि विस्थापित परिवारों को सावदा घेवरा में किसी प्रकार की प्रशासनिक उपेक्षा या असुविधा का सामना न करना पड़े।
मूलभूत सुविधाओं और जन-सुविधाओं की गारंटी
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट तौर पर कहा कि केवल फ्लैट आवंटित कर देना ही पुनर्वास नहीं है, बल्कि वहां गरिमापूर्ण जीवन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा होना चाहिए। इसलिए सावदा घेवरा कॉलोनी में स्थानांतरित होने वाले निवासियों के लिए स्कूल, निर्बाध बिजली आपूर्ति, शुद्ध पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए डिस्पेंसरी, एलपीजी गैस कनेक्शन और आवागमन के लिए मुफ्त बस एवं मेट्रो पास जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का कड़ा निर्देश दिया गया है। निगरानी समिति इन तमाम नागरिक सुविधाओं की जमीनी उपलब्धता की समय-समय पर समीक्षा करेगी।





















