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मथुरा के महोली गांव में अटकी प्रधानमंत्री आवास की किस्तें, टीन शेड में रहने को मजबूर हुए लोगउत्तर प्रदेश
24 अग॰ 2026, 1:36 pm (1 घंटे पहले)· 1

मथुरा के महोली गांव में अटकी प्रधानमंत्री आवास की किस्तें, टीन शेड में रहने को मजबूर हुए लोग

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिला स्थित महोली गांव में पहली किस्त मिलने के बाद दूसरी किस्त न आने से आवास निर्माण ठप पड़ा है। लाभार्थी किराए के मकानों और टीन शेड में रहने को मजबूर हैं।

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिला अंतर्गत महोली गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थी गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत लोगों को मकान बनाने के लिए पहली किस्त के रूप में 1 लाख रुपये दिए गए थे। हालांकि, पहली किस्त जारी हुए 1 साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन दूसरी किस्त का अब तक कोई अता-पता नहीं है। इस वजह से कई गरीब परिवारों के मकानों का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। मौजूदा बारिश के मौसम में इन परिवारों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। कई लोग किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं, तो कई परिवार टीन शेड डालकर जैसे-तैसे अपना दिन काट रहे हैं।

डूडा विभाग की जिम्मेदारी और योजना की वर्तमान स्थिति

गरीब और बेघर परिवारों को पक्का आशियाना देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरुआत की गई थी। मथुरा जिले में इस योजना के सुचारू कार्यान्वयन और लाभार्थियों की सूची तैयार करने का जिम्मा जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) विभाग को सौंपा गया था। डूडा विभाग ने सर्वेक्षण के आधार पर पात्र लाभार्थियों की सूची तैयार की और मथुरा में हजारों पात्र परिवारों को इस योजना के तहत वित्तीय सहायता प्रदान की गई। कई लोगों के पक्के मकान बन भी चुके हैं। हालांकि, महोली गांव में स्थिति बिल्कुल अलग है, जहां वित्तीय सहायता अचानक रुक जाने से योजना का वास्तविक लाभ लोगों तक पूरा नहीं पहुंच सका है।

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अपनी बचत गंवाने के बाद भी अधूरा पड़ा आशियाना

महोली गांव के स्थानीय निवासी दिनेश ठाकुर ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि सरकार से 1 लाख रुपये की पहली किस्त मिलने के बाद उन्होंने अपनी बची-कुची जमापूंजी भी निर्माण कार्य में लगा दी थी। अपने खुद के पैसों के सहयोग से उन्होंने मकान की दीवारें खड़ी कर लेंटर के स्तर तक काम पहुंचा दिया। लेकिन इसके बाद उनका वित्तीय बैकअप पूरी तरह समाप्त हो गया। दिनेश ठाकुर का कहना है कि करीब डेढ़ साल का लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी दूसरी किस्त उनके खाते में ट्रांसफर नहीं की गई है। इस समय बारिश के मौसम में छत न होने के कारण वे अपने नए मकान में शिफ्ट नहीं हो पा रहे हैं और भारी खर्च उठाकर किराए के कमरे में रहने को विवश हैं। जब तक अगली किस्तें जारी नहीं होतीं, उनका मकान इसी तरह अधूरा पड़ा रहेगा।

टीन शेड के नीचे दिन गुजार रहे परेशान लाभार्थी

गांव की ही रहने वाली श्रीमती और भूरा नामक एक युवक ने भी अपनी व्यथा साझा की। श्रीमती ने बताया कि वर्ष 2025 में आवास योजना का फॉर्म भरा गया था और उसके बाद 1 लाख रुपये की पहली किस्त खाते में आ गई थी। लेकिन अब 1 साल से ज्यादा समय बीत चुका है और दूसरी किस्त का इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। श्रीमती के अनुसार, उनका मकान अभी केवल डीपीसी (डीपीसी लेयर) स्तर तक ही बन पाया है। पैसे के अभाव में वे निर्माण कार्य आगे बढ़ाने में असमर्थ हैं। स्थिति यह है कि उनके परिवार के पास खाने तक के पैसे जुटाना मुश्किल हो रहा है, ऐसे में वे घर बनाने में अतिरिक्त पैसे कहां से लगाएं। उनका कहना है कि योजना के नाम पर केवल उम्मीद का एक खिलौना पकड़ा दिया गया है, जिसे बजाकर वे अगली किस्तों का इंतजार कर रहे हैं। लाभार्थियों को अब यह डर सताने लगा है कि शायद दूसरी और तीसरी किस्त कभी आएगी ही नहीं।

आवास योजना के नाम पर अवैध वसूली और भ्रष्टाचार के आरोप

महोली में केवल किस्तों की देरी ही एक मात्र समस्या नहीं है, बल्कि योजना के क्रियान्वयन में व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार के आरोप भी सामने आ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि आवास योजना का लाभ दिलाने और किस्तों को स्वीकृत कराने के नाम पर गरीबों से 20,000 रुपये से लेकर 50,000 रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है। एक तरफ जहां गरीब लाभार्थी अपनी दूसरी किस्त के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ दलालों और भ्रष्ट तंत्र द्वारा की जा रही इस वसूली ने उनकी स्थिति को और अधिक दयनीय बना दिया है।

सवाल-जवाब

मथुरा के महोली गांव में लाभार्थियों को क्या समस्या आ रही है?
लाभार्थियों को प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली किस्त (1 लाख रुपये) मिलने के बाद 1 साल से अधिक समय से दूसरी किस्त नहीं मिली है, जिससे उनके मकान अधूरे पड़े हैं।
महोली में लाभार्थियों के मकान किस स्थिति में हैं?
कई लाभार्थियों के मकान लेंटर या डीपीसी स्तर तक ही बने हैं। किस्त न मिलने से लोग टीन शेड या किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं।
मथुरा में इस योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी किस विभाग की है?
मथुरा में प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन और लाभार्थियों की सूची तैयार करने की जिम्मेदारी डूडा (जिला नगरीय विकास अभिकरण) विभाग की है।
योजना के क्रियान्वयन को लेकर ग्रामीणों ने क्या आरोप लगाए हैं?
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि आवास योजना के नाम पर उनसे 20,000 रुपये से लेकर 50,000 रुपये तक की अवैध वसूली और रिश्वत मांगी जा रही है।
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