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दिल्ली के दो प्रमुख विभागों में पूर्व अग्निवीरों को मिलेगा 20% क्षैतिज आरक्षण, उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू ने दी मंजूरीदिल्ली
14 अग॰ 2026, 8:44 am (32 दिन पहले)· 0

दिल्ली के दो प्रमुख विभागों में पूर्व अग्निवीरों को मिलेगा 20% क्षैतिज आरक्षण, उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू ने दी मंजूरी

दिल्ली सरकार के गृह विभाग ने पूर्व अग्निवीरों को दिल्ली फायर सर्विस और जेल विभाग की सीधी भर्तियों में 20% क्षैतिज आरक्षण देने की अधिसूचना जारी कर दी है। उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू द्वारा मंजूर इस फैसले के तहत अभ्यर्थियों को आयु सीमा और शारीरिक दक्षता परीक्षा में भी विशेष राहत मिलेगी।

सेना से चार साल की सेवा पूरी करके निकलने वाले पूर्व अग्निवीरों के पुनर्वास और सम्मानजनक रोजगार के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू ने राज्य सरकार के दो महत्वपूर्ण विभागों में होने वाली सीधी भर्तियों के दौरान पूर्व अग्निवीरों को 20 प्रतिशत क्षैतिज (हॉरिजॉन्टल) आरक्षण देने के प्रस्ताव को अपनी प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है। इस महत्वपूर्ण फैसले के अमल में आने से दिल्ली फायर सर्विस और जेल विभाग में निकलने वाले रोजगार के अवसरों में पूर्व अग्निवीरों के लिए स्थायी सरकारी नौकरी पाने का मार्ग काफी आसान हो जाएगा। केंद्र सरकार की पूर्व अग्निवीर पुनर्वास नीति के तहत यह कदम उठाया गया है, जिसकी औपचारिक अधिसूचना दिल्ली सरकार के गृह विभाग द्वारा जारी कर दी गई है।

किन पदों पर लागू होगा 20% आरक्षण और कैसे हुआ नियम संशोधन

दिल्ली सरकार द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, 20 प्रतिशत का यह हॉरिजॉन्टल कोटा दो विशिष्ट विभागों के प्रमुख पदों पर लागू किया जाएगा। इसमें पहला विभाग दिल्ली फायर सर्विस (डीएफएस) है, जहां फायर ऑपरेटर के पदों पर सीधी भर्ती में यह आरक्षण मिलेगा। वहीं दूसरा विभाग जेल विभाग है, जहां वॉर्डर और मैट्रन के पदों पर होने वाली सीधी नियुक्तियों में पूर्व अग्निवीरों को इस कोटे का लाभ प्राप्त होगा। उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत प्राप्त अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए इन दोनों विभागों के संबंधित भर्ती नियमों में आवश्यक संशोधन किए हैं। इस फैसले के बाद भर्ती बोर्ड को इन पदों के विज्ञापनों में पूर्व अग्निवीरों के लिए पद आरक्षित रखने होंगे।

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आयु सीमा में 3 से 5 वर्ष की विशेष छूट का प्रावधान

आरक्षित सीटों के अलावा, पूर्व अग्निवीरों को सरकारी नौकरियों में आवेदन के लिए निर्धारित अधिकतम आयु सीमा में भी महत्वपूर्ण राहत प्रदान की गई है। सामान्य प्रावधानों के तहत, सभी पूर्व अग्निवीरों को सीधी भर्ती के नियमों में तय की गई ऊपरी आयु सीमा में 3 वर्ष की अतिरिक्त छूट दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, अग्निवीर योजना के शुरुआती यानी प्रथम बैच से बाहर आने वाले युवाओं के लिए यह राहत और भी अधिक होगी, जिन्हें अधिकतम आयु सीमा में 5 वर्ष तक की छूट दी जाएगी। आयु सीमा में इस राहत से उन अभ्यर्थियों को बड़ा फायदा मिलेगा, जिनकी उम्र सामान्य वर्ग की तय सीमा को पार कर चुकी होगी।

शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी) और खाली सीटों के नियम

फायर ब्रिगेड और कारागार सेवाओं की प्रकृति को देखते हुए शारीरिक योग्यता अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। हालांकि, पूर्व अग्निवीरों के सैन्य प्रशिक्षण और अनुभव को ध्यान में रखते हुए शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी) के मानकों में छूट देने की व्यवस्था की गई है। आदेश के अनुसार, पीईटी के मापदंडों में पूर्व अग्निवीरों को कितनी और किस प्रकार की ढील दी जाएगी, इसका अंतिम निर्णय संबंधित विभाग स्वयं अपनी आवश्यकताओं के अनुसार तय करेंगे। इसके अलावा, यदि किसी भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित योग्यता पूरी करने वाले पूर्व अग्निवीर पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं होते हैं, तो उन रिक्तियों को भारत सरकार की हॉरिजॉन्टल आरक्षण संबंधी गाइडलाइंस के अनुरूप भरा जाएगा।

केंद्रीय सशस्त्र बलों के पैटर्न पर दिल्ली में मजबूत सुरक्षा कवच

दिल्ली प्रशासन का यह निर्णय केंद्र सरकार के उस व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है, जिसके माध्यम से पूर्व अग्निवीरों को देश के विभिन्न अर्धसैनिक बलों, राज्य पुलिस बलों और आपातकालीन सेवाओं में समायोजित किया जा रहा है। इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 25 मार्च 2026 को एक आधिकारिक पत्र भेजकर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पूर्व अग्निवीरों के पुनर्वास के निर्देश दिए थे। भारत सरकार पहले ही केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) और असम राइफल्स में कांस्टेबल (जनरल ड्यूटी) तथा राइफलमैन के 50 प्रतिशत पदों को पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षित कर चुकी है। अब राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में लागू किए गए इस 20 प्रतिशत कोटे से युवाओं को सैन्य सेवा के बाद एक सुरक्षित और सम्मानजनक करियर का विकल्प उपलब्ध होगा।

सवाल-जवाब

दिल्ली सरकार के किन विभागों में पूर्व अग्निवीरों को 20% आरक्षण दिया गया है?
उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू ने दिल्ली फायर सर्विस और जेल विभाग की सीधी भर्तियों में पूर्व अग्निवीरों के लिए 20% क्षैतिज आरक्षण को मंजूरी दी है।
20% हॉरिजॉन्टल कोटा किन-किन विशिष्ट पदों पर लागू होगा?
यह आरक्षण दिल्ली फायर सर्विस में फायर ऑपरेटर तथा जेल विभाग में वॉर्डर और मैट्रन के पदों पर होने वाली सीधी नियुक्तियों में लागू होगा।
पूर्व अग्निवीरों को सरकारी नौकरी की ऊपरी आयु सीमा में कितनी छूट मिलेगी?
सामान्य तौर पर पूर्व अग्निवीरों को अधिकतम आयु सीमा में 3 वर्ष की छूट मिलेगी, जबकि अग्निवीर योजना के पहले बैच के युवाओं को 5 वर्ष तक की छूट दी जाएगी।
शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी) के नियमों में क्या ढील दी जाएगी?
पूर्व अग्निवीरों के लिए शारीरिक दक्षता परीक्षा के मापदंडों में कितनी छूट दी जाएगी, इसका निर्णय संबंधित विभाग अपनी आवश्यकताओं के अनुसार तय करेंगे।
यदि पर्याप्त संख्या में योग्य पूर्व अग्निवीर उपलब्ध नहीं होते हैं तो क्या होगा?
यदि किसी भर्ती प्रक्रिया में पर्याप्त योग्य पूर्व अग्निवीर नहीं मिलते हैं, तो उन सीटों को भारत सरकार की हॉरिजॉन्टल आरक्षण गाइडलाइंस के अनुसार भरा जाएगा।
केंद्रीय बलों में पूर्व अग्निवीरों के लिए कितना कोटा पहले से निर्धारित है?
केंद्र सरकार ने सीएपीएफ और असम राइफल्स में कांस्टेबल (जनरल ड्यूटी) और राइफलमैन के 50% पदों को पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षित कर रखा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Priya Sharma@priya-sharma·31 दिन पहले

यह नीतिगत निर्णय पूर्व अग्निवीरों के मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक समायोजन की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। सैन्य सेवा से लौटने वाले युवाओं के लिए सुरक्षित भविष्य और नियमित आजीविका का यह अवसर उनके व्यक्तित्व विकास और आत्मसम्मान को मजबूत करेगा। वेलनेस और आधुनिक जीवनशैली के दृष्टिकोण से, यह पुनर्वास युवाओं को नागरिक समाज में एक स्थिर और तनावमुक्त जीवन जीने का अवसर प्रदान करता है, जिससे उनकी सामाजिक सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·31 दिन पहले

दिल्ली प्रशासन द्वारा पूर्व अग्निवीरों के लिए फायर सर्विस और जेल विभाग में बीस प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का यह निर्णय सैन्य से नागरिक जीवन में संक्रमण को सुगम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण नीतिगत कदम है। अनुच्छेद तीन सौ नौ के तहत किए गए इन संशोधनों और आयु सीमा में तीन से पांच वर्ष की छूट से यह स्पष्ट है कि सरकार इन युवाओं के रक्षा क्षेत्र में प्राप्त अनुशासन और प्रशिक्षण का प्रशासनिक और सुरक्षा ढांचा सुदृढ़ करने में प्रभावी उपयोग करना चाहती है। आगामी समय में अन्य राज्य सरकारें भी इस मॉडल को अपना सकती हैं।

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·31 दिन पहले

अर्जुन के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, अमेरिका और कई अन्य लोकतांत्रिक देशों में भी दिग्गजों के पुनर्वास के लिए समान प्राथमिकता नीतियां अपनाई जाती हैं। दिल्ली सरकार का यह कदम चार साल की सेवा के बाद प्रशिक्षित कर्मियों को खोने के जोखिम को कम करता है और आपातकालीन सेवाओं की रीढ़ को मजबूत करता है। यदि अन्य राज्य भी अग्निवीर कोटे को अपनाते हैं, तो यह राष्ट्रीय स्तर पर एक सुदृढ़ कार्यबल तैयार करेगा।

Rohan Verma@rohan-verma·31 दिन पहले

अग्निवीरों के पुनर्वास की दिशा में यह प्रशासनिक कदम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं को अधिक अनुशासित बल प्रदान करेगा। दिल्ली फायर सर्विस और जेल विभाग जैसे शारीरिक श्रम वाले क्षेत्रों में पूर्व सैनिकों के शामिल होने से कार्यकुशलता बढ़ेगी। उत्तर प्रदेश जैसे अन्य राज्यों में भी इसी तरह की नीतियों पर काम चल रहा है, जिससे भविष्य में क्षेत्रीय स्तर पर भी रोजगार के ऐसे और विकल्प खुलने की उम्मीद है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·31 दिन पहले

अपराध और कानून-व्यवस्था की दृष्टि से देखें तो यह प्रशासनिक निर्णय न केवल पूर्व सैनिकों के पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि जेल प्रशासन और आपातकालीन सेवाओं में एक अनुशासित कार्यबल तैयार करने में भी मददगार साबित होगा। अनुच्छेद 309 के तहत सेवा नियमों में किए गए इस संशोधन से आपराधिक न्याय प्रणाली के अंतर्गत आने वाले कारागार प्रबंधन में सुरक्षा मानकों को और अधिक सुदृढ़ करने का अवसर मिलेगा।

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