अक्टूबर की शुरुआत के साथ ही पूरे भारत में मौसमी गतिविधियों में बड़ा फेरबदल दर्ज किया जा रहा है। एक तरफ जहां उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत के बड़े हिस्से से दक्षिण-पश्चिम मानसून तेजी से विदा हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ प्रायद्वीपीय दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के राज्यों में बादलों का भारी जमावड़ा देखने को मिल रहा है। इन दोनों छोरों पर हवा के दबाव और स्थानीय मौसमी तंत्र की सक्रियता के कारण अलग-अलग राज्यों में हालात पूरी तरह भिन्न बने हुए हैं। मैदानी भागों में जहां धूप और शुष्क हवाएं लोगों को सामान्य गर्मी का अहसास करा रही हैं, वहीं तटीय व पहाड़ी क्षेत्रों में मूसलाधार पानी गिरने और तेज आंधी चलने के आसार बन रहे हैं।
दक्षिण भारत के राज्यों में तेज आंधी और भारी वर्षा की चेतावनी
प्रायद्वीपीय भारत में मौसमी परिस्थितियां काफी उग्र रूप ले चुकी हैं। केरल और माहे के तटीय व आंतरिक इलाकों में 1 अक्टूबर को भारी से बहुत भारी वर्षा दर्ज किए जाने की गंभीर चेतावनी सामने आई है। इस दौरान वायुमंडल में अचानक अस्थिरता पैदा होने से 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज गति से हवा के झोंके चलने की संभावना है। बादलों की भीषण गड़गड़ाहट और आकाशीय बिजली गिरने का जोखिम भी काफी अधिक रहेगा। त्रिवेंद्रम, कोच्चि, कोझिकोड और आलप्पुषा जैसे प्रमुख केंद्रों पर जनजीवन प्रभावित हो सकता है। मौसम की इस तीव्रता को ध्यान में रखते हुए आपदा प्रबंधन और स्थानीय सुरक्षा तंत्र को हाई अलर्ट पर रखा गया है, जबकि काश्तकारों से अपील की गई है कि वे खेतों में रुके पानी की तत्काल निकासी सुनिश्चित करें ताकि उनकी खड़ी फसलों को गलने से बचाया जा सके।
इसी तरह तमिलनाडु, पुदुचेरी और कराईकल के विस्तृत भूभाग में भी 1 अक्टूबर के दौरान भारी बारिश का संकट बना हुआ है। वायुमंडलीय दबाव के चलते यहां 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंके वाली हवाएं चलने और तीव्र तड़ित झंझावात उत्पन्न होने का अनुमान लगाया गया है। राजधानी चेन्नई के अलावा मदुरै, कोयंबटूर और त्रिची के वायुमंडल में घने बादल मंडराते रहेंगे और रुक-रुक कर जोरदार फुहारें गिरेंगी। कृषि जानकारों ने किसानों को सतर्क करते हुए सुझाव दिया है कि धान और अन्य संवेदनशील फसलों की रक्षा के लिए जलभराव न होने दें और जो फसलें काटी जा चुकी हैं, उन्हें खुले आसमान से हटाकर सूखे गोदामों में पहुंचाएं।
कर्नाटक के समुद्री तटीय हिस्सों तथा दक्षिणी भीतरी जनपदों में भी 1 अक्टूबर को व्यापक स्तर पर बौछारें पड़ने की बात कही गई है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि कई क्षेत्रों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तूफानी हवाएं बहेंगी। बेंगलुरु, मैसूर, मंगलुरु और उडुपी में अचानक मूसलाधार पानी बरसने से सड़कों पर पानी जमा हो सकता है। प्रशासनिक अधिकारियों ने निचले आवासीय मोहल्लों में पानी के भराव से बचाव के पुख्ता इंतजाम करने और कृषि उपज को सुरक्षित रखने के विशेष दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
तटीय आंध्र प्रदेश और यनम के तटीय गलियारों में 1 अक्टूबर को बादलों के बीच छिटपुट बारिश होने का अनुमान है। हालांकि, यहां 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली तेज सतही हवाएं लोगों की परेशानी बढ़ा सकती हैं। विशाखापत्तनम, विजयवाड़ा, काकीनाडा और मछलीपट्टनम जैसे शहरों में आकाश में गर्जना के साथ बौछारें गिरेंगी। कृषि कार्यों से जुड़े ग्रामीण समुदाय को बदलते परिवेश को देखते हुए खेत-खलिहान में विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।
पूर्वोत्तर के राज्यों में बादलों का डेरा, जनजीवन पर असर
पूर्वोत्तर भारत की भौगोलिक सीमाओं में मौसमी हलचल चरम पर रहने वाली है। अरुणाचल प्रदेश की हरी-भरी वादियों में 1 अक्टूबर को अनेक स्थानों पर मध्यम दर्जे की वर्षा और कुछ चुनिंदा स्थानों पर बेहद भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान आकाशीय बिजली चमकने और आंधी की तेज लहरें उठने की आशंका है। ईटानगर, तवांग, पासीघाट और जिरा के क्षेत्रों में मौसम काफी प्रतिकूल रहेगा। स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों और सैलानियों को सतर्कता बरतने की नसीहत दी है, साथ ही मक्का एवं सब्जी की पैदावार को नुकसान से बचाने हेतु खेतों में सुरक्षा उपाय करने को कहा है।
असम और मेघालय के पर्वतीय व घाटी वाले इलाकों में भी 1 अक्टूबर को छिटपुट ठिकानों पर जोरदार वर्षा और वज्रपात की आशंका जताई गई है। गुवाहाटी, सिलचर, डिब्रूगढ़ और शिलांग के आकाश में काले-घने बादलों का पहरा रहेगा, जिससे दिन के समय भी अंधेरा छा सकता है और कुछ इलाकों में तेज बारिश का दौर शुरू हो सकता है। लगातार पानी गिरने से खेतों में जल जमाव की समस्या गंभीर हो सकती है, इसलिए किसानों को जलनिकासी का उचित प्रबंध तुरंत करने की सलाह दी गई है।
नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के पर्वतीय राज्यों में 1 अक्टूबर को मौसम का मिजाज काफी बिगड़ा हुआ नजर आएगा। चुनिंदा हिस्सों में मूसलाधार बारिश के साथ तेज आंधी और आकाशीय बिजली कड़कने की घटनाएं सामने आ सकती हैं। कोहिमा, इम्फाल, आइजोल और अगरतला में हवा के झोंकों के साथ पानी बरसने से तापमान में अच्छी-खासी गिरावट देखी जाएगी। बागवानी और फल-फूल की खेती करने वाले काश्तकारों को अपनी तैयार उपज की सुरक्षा के लिए एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के ऊंचे व तराई इलाकों में 1 अक्टूबर के दिन मौसम की तल्खी बनी रहेगी। दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, गंगटोक और सिलीगुड़ी जैसे सुरम्य शहरों में गरज-चमक के साथ छिटपुट बौछारें गिर सकती हैं। इस पर्वतीय अंचल में हवाओं का बहाव सामान्य से तेज रहेगा, जिसके चलते पारे में गिरावट आने से हल्की ठंडक महसूस होगी।
पूर्वी भारत और द्वीप समूहों में मौसमी गतिविधियां
ओडिशा के तटीय और आंतरिक क्षेत्रों में 1 अक्टूबर को गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम श्रेणी की वर्षा होने के आसार जताए गए हैं। इस दौरान तटीय हिस्सों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं। भुवनेश्वर, कटक, पुरी और राउरकेला में उमस भरा माहौल बना रहेगा, लेकिन बीच-बीच में अचानक उठने वाले बादलों के चलते तेज हवाओं के साथ बारिश की बौछारें लोगों को उमस से राहत दिलाएंगी।
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के जलक्षेत्र और द्वीपों पर 1 अक्टूबर को बादलों की गड़गड़ाहट के साथ छिटपुट बौछारें पड़ने का अनुमान लगाया गया है। पोर्ट ब्लेयर सहित अन्य द्वीपीय बस्तियों में आंशिक बादल छाए रहेंगे और कुछ जगहों पर मध्यम दर्जे का पानी बरस सकता है। गहरे समुद्र में तेज हलचल और लहरों के उफान को देखते हुए मछुआरों व समुद्र तट के समीप रहने वाले लोगों को खुले पानी में न जाने की हिदायत दी गई है।
मध्य और पश्चिमी भारत का हाल: नमी और गरज-चमक का मिलाजुला दौर
महाराष्ट्र के कोंकण, गोवा और मध्य महाराष्ट्र के क्षेत्रों में 1 अक्टूबर को गरज-चमक के साथ छिटपुट बौछारें गिरने और बिजली कड़कने की संभावना बनी हुई है। मुंबई, पुणे, ठाणे और पणजी में बादलों का डेरा रहेगा और हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की जा सकती है। समुद्र के नजदीक होने के कारण तटीय पट्टियों में भारी नमी रहेगी, जिससे दिनभर चिपचिपी उमस का सामना करना पड़ेगा।
गुजरात के मुख्य भूभाग और सौराष्ट्र-कच्छ के क्षेत्रों में 1 अक्टूबर को छिटपुट स्तर पर पानी गिरने का पूर्वानुमान है। अहमदाबाद, राजकोट, सूरत और वडोदरा में उमस भरी गर्मी का असर रहेगा, हालांकि दोपहर बाद कुछ इलाकों में बादलों की गर्जना के साथ हल्की बारिश हो सकती है जिससे वातावरण में क्षणिक ठंडक आएगी।
मध्य प्रदेश के पूर्वी अंचल में 1 अक्टूबर को बादलों की आवाजाही के बीच बिजली गिरने और हल्की वर्षा होने की चेतावनी दी गई है। जबलपुर, सागर, रीवा और सतना में आंशिक बादलों के बीच फुहारें पड़ सकती हैं। इससे अधिकतम तापमान में मामूली नरमी आएगी और हवाओं के चलने से मौसम सुहावना बना रहेगा।
छत्तीसगढ़ में आगामी समय में विशेषकर 1 अक्टूबर के उपरांत मौसमी तंत्र में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। शुरुआती चरण में कुछ स्थानों पर छिटपुट वर्षा और बादलों की गर्जना देखने को मिल सकती है। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और राजनांदगांव में आसमान साफ से लेकर आंशिक बादलों से घिरा रहेगा और हल्की हवाएं चलती रहेंगी।
उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत: मानसून की विदाई और शुष्क मौसम
पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में 1 अक्टूबर को पर्वतीय और तराई जिलों में मौसम में अचानक बदलाव की संभावना है। देहरादून, नैनीताल, चमोली और पिथौरागढ़ में छिटपुट जगहों पर गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं और सर्द हवाएं बहेंगी। पहाड़ी रास्तों पर यात्रा करने वाले सैलानियों और स्थानीय लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
इसके विपरीत, दिल्ली-एनसीआर में 2 अक्टूबर को मौसम पूरी तरह शुष्क और साफ रहेगा। दिनभर तेज धूप खिली रहेगी और बारिश का कोई अनुमान नहीं है। उत्तर-पश्चिमी हवाओं के चलने से अधिकतम तापमान 33 से 35 डिग्री और न्यूनतम तापमान 21 से 24 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की उम्मीद है। उत्तर प्रदेश, पंजाब और बिहार में भी दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की प्रक्रिया जोर पकड़ रही है, जिससे इन राज्यों में बारिश की संभावना न के बराबर है और मौसम आमतौर पर गर्म व धूपदार बना रहेगा।





















