विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर बड़ी बात कही. उन्होंने कहा कि आज की आपस में जुड़ी दुनिया में कहीं भी छिड़ने वाला संकट या संघर्ष सिर्फ उसी इलाके तक सीमित नहीं रहता, उसका असर दूर बैठे आम आदमी की जेब तक भी पहुंच जाता है. भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ते रणनीतिक व आर्थिक रिश्तों की बात करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को मिलकर वैश्विक संकटों का सामना करना होगा, क्योंकि आज के दौर में कोई भी देश अकेले इनसे नहीं निपट सकता.
सप्लाई चेन पर एक ही स्रोत की निर्भरता क्यों है खतरनाक
जयशंकर ने कहा कि दुनिया की अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए मजबूत और लचीली सप्लाई चेन का होना बेहद जरूरी है, लेकिन फिलहाल दुनिया कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स, तकनीक और सप्लाई चेन के मोर्चे पर कई मुश्किलों से जूझ रही है. उन्होंने खास तौर पर आगाह किया कि अगर उत्पादन के लिए दुनिया सीमित या सिर्फ एक ही स्रोत पर निर्भर रहती है, तो यह पूरी वैश्विक व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन सकता है. यानी अगर कोई एक देश या क्षेत्र किसी जरूरी चीज़ की सप्लाई में अड़चन डाल दे, तो पूरी दुनिया को उसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है.
- वैकल्पिक स्रोत जरूरी: जयशंकर के मुताबिक अब समय आ गया है कि दुनिया भर में आपूर्ति के नए और भरोसेमंद विकल्प खड़े किए जाएं, ताकि किसी भी संकट के वक्त अंतरराष्ट्रीय बाजार में अफरा-तफरी न मचे.
- जोखिम घटाने की जरूरत: उन्होंने कहा कि भारत और उसके वैश्विक साझेदारों को मिलकर ऐसी ठोस नीतियां बनानी होंगी जो तकनीक और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में किसी एक की मोनोपॉली को रोक सकें.
यूक्रेन से लेकर मिडल ईस्ट तक, जंग का असर आपकी थाली और जेब पर
जयशंकर ने भू-राजनीतिक तनावों का जिक्र करते हुए कहा कि वैश्वीकरण के इस दौर में कोई भी जंग या सैन्य टकराव सिर्फ स्थानीय मसला नहीं रह जाता. उन्होंने यूक्रेन युद्ध, खाड़ी देशों में अशांति, अफ्रीका और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते तनाव का उदाहरण देते हुए समझाया कि इन सबका सीधा असर वैश्विक व्यापार, ईंधन की कीमतों और खाद्य सुरक्षा पर पड़ता है. उनका कहना था कि दुनिया के एक कोने में छिड़ी लड़ाई दूसरे कोने में बैठे आम इंसान की जिंदगी बदल सकती है, और इसका असर कई बार इतने अप्रत्याशित तरीकों से सामने आता है कि पहले से किसी ने उसकी कल्पना तक नहीं की होती. यही वजह है कि आज संकटों के इस दौर में देशों के बीच गहरा राजनीतिक तालमेल और रणनीतिक सहयोग सिर्फ एक अच्छा विकल्प नहीं बल्कि जरूरी मजबूरी बन गया है.
भारत-यूरोपीय संघ की साझेदारी को बताया स्थिरता का स्तंभ
जयशंकर ने जोर देकर कहा कि मौजूदा चुनौतीपूर्ण दौर में भारत और यूरोपीय संघ जैसे भरोसेमंद साझेदारों के बीच रणनीतिक सहयोग सिर्फ दोनों पक्षों के फायदे की बात नहीं, बल्कि यह पूरी दुनिया की स्थिरता के लिए भी एक मजबूत खंभा साबित होगा. उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, साइबर सुरक्षा और समुद्री सुरक्षा जैसे मुद्दों पर मिलकर काम करके ही दुनिया को सुरक्षित और स्थिर भविष्य दिया जा सकता है. उनके मुताबिक वैश्विक जोखिमों को घटाने के लिए बहुपक्षीय बातचीत और मजबूत आर्थिक साझेदारी के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है.











