देश के एयरपोर्ट पर पैसेंजर्स को लंबी कतारों से राहत देने के मकसद से शुरू की गई डिजी यात्रा सेवा जुड़वा भाई-बहनों के लिए एक नई मुसीबत बनती जा रही है। चेहरा पहचानकर एंट्री और चेक-इन की सुविधा देने वाली यह तकनीक अभी भी एक जैसे दिखने वाले दो चेहरों के बीच फर्क पहचानने में नाकाम साबित हो रही है। ऐसा ही एक ताजा मामला अहमदाबाद एयरपोर्ट से सामने आया है, जहां जुड़वा भाइयों को सिर्फ इसलिए पुरानी, मैनुअल लाइन का सहारा लेना पड़ा क्योंकि सिस्टम उनके चेहरों में कोई अंतर नहीं ढूंढ पाया।
चेहरा पहचानने में क्यों धोखा खा जाता है सिस्टम
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कुछ साल पहले पैसेंजर्स की सहूलियत के लिए डिजी यात्रा योजना शुरू की थी। इसका मकसद यही था कि यात्री बिना कागजी बोर्डिंग पास और आईडी बार-बार दिखाए, सिर्फ चेहरा स्कैन कराकर एयरपोर्ट के अंदर दाखिल हो सकें और सीधे बोर्डिंग गेट तक पहुंच सकें। इस कवायद के तहत अब देश के लगभग सभी बड़े एयरपोर्ट को इस सुविधा से जोड़ा जा चुका है और रोजाना लाखों यात्री इसका इस्तेमाल करके पेपरलेस तरीके से सफर कर रहे हैं। लेकिन जैसे ही मामला जुड़वा भाई-बहनों का आता है, यह पूरा सिस्टम गड़बड़ा जाता है। जुड़वा भाई-बहन जब एक साथ डिजी यात्रा के जरिए एयरपोर्ट में दाखिल होने की कोशिश करते हैं, तो फेशियल रिकग्निशन सिस्टम दोनों में से किसी एक को दूसरे का डुप्लिकेट मानकर रिजेक्ट कर देता है। जिस भाई या बहन को सिस्टम ने रिजेक्ट कर दिया, उसे मजबूरन पुराने तरीके से यानी लंबी लाइन में लगकर एंट्री से लेकर बोर्डिंग तक की पूरी प्रक्रिया दोबारा पूरी करनी पड़ती है। हैरानी की बात यह है कि यह समस्या बार-बार सामने आने के बावजूद डिजी यात्रा की व्यवस्था चलाने वालों की तरफ से अभी तक इसका कोई ठोस हल नहीं निकाला गया है।
छाजेर बंधुओं के साथ 10 जुलाई को क्या हुआ
अहमदाबाद के संजीव और राजीव छाजेर इस समस्या के ताजा उदाहरण हैं। ये दोनों जुड़वा भाई हैं और जब भी साथ हवाई यात्रा करते हैं, डिजी यात्रा इनके लिए परेशानी खड़ी कर देता है। दरअसल डिजी यात्रा का फेशियल ऑथेंटिकेशन सिस्टम दोनों भाइयों के चेहरे में फर्क नहीं पकड़ पाता और दोनों में से एक को फास्ट ट्रैक प्रोसेस से बाहर कर देता है। जिस भाई को बाहर किया जाता है, उसे मैनुअल वैरिफिकेशन के जरिए ही एंट्री, चेक-इन, सिक्योरिटी और बोर्डिंग जैसे सभी चरण पूरे करने पड़ते हैं। 10 जुलाई को संजीव और राजीव इंडिगो की फ्लाइट पकड़कर दिल्ली जाने के लिए अहमदाबाद एयरपोर्ट पहुंचे थे। जैसे ही दोनों ने डिजी यात्रा के जरिए चेक-इन करने की कोशिश की, उन्हें स्क्रीन पर 'टू मेनी एक्सेस' यानी एक से ज्यादा बार एक्सेस की कोशिश का मैसेज दिखने लगा। यहां चौंकाने वाली बात यह रही कि सिस्टम ने दोनों में से किसी एक को नहीं, बल्कि संजीव और राजीव दोनों को ही रिजेक्ट कर दिया। दोनों भाइयों ने किसी तरह मैनुअल तरीके से चेक-इन तो पूरा कर लिया, लेकिन जब वे सिक्योरिटी चेक के लिए पहुंचे तो वहां भी उन्हें वही 'टू मेनी एक्सेस' वाला मैसेज मिला। आखिरकार एयरपोर्ट स्टाफ ने दोनों में से एक भाई को अलग से मैनुअल प्रोसेस पूरा करने के लिए भेजा। इस पूरी परेशानी पर संजीव का कहना है कि डिजी यात्रा पर रजिस्टर करने के पीछे दो ही मकसद होते हैं, एक तो पेपरलेस एंट्री और दूसरा लंबी लाइन से बचना, ताकि समय की बचत हो सके। लेकिन जब साथ यात्रा करते समय एक भाई को डिजी यात्रा और दूसरे को मैनुअल लाइन में लगना पड़े, तो इस पूरी सुविधा का मकसद ही खत्म हो जाता है।
अकेले नहीं हैं छाजेर बंधु, केया-हिया पटेल भी परेशान
डिजी यात्रा की यह दिक्कत सिर्फ संजीव और राजीव तक सीमित नहीं है। अहमदाबाद की 24 साल की जुड़वा बहनें केया और हिया पटेल भी बिल्कुल इसी तरह की समस्या से जूझ चुकी हैं। दोनों बहनों का कहना है कि जब वे अकेले हवाई सफर करती हैं तो डिजी यात्रा में कोई दिक्कत नहीं आती, सबकुछ सामान्य तरीके से चलता है। लेकिन जैसे ही दोनों एक साथ यात्रा करती हैं, फेशियल रिकग्निशन गेट पर उनमें से किसी एक को रोक लिया जाता है। केया और हिया ने बताया कि उन्होंने कई बार अलग-अलग माध्यमों से डिजी यात्रा सिस्टम चलाने वालों तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन अब तक इसका कोई नतीजा नहीं निकला। इसी वजह से अब उन्होंने डिजी यात्रा से किसी सुधार की उम्मीद करना भी छोड़ दिया है। केया और हिया की मां तृप्ति पटेल का कहना है कि हवाई यात्रा के दौरान उनकी दोनों बेटियां ज्यादातर डिजी यात्रा का इस्तेमाल करने से ही परहेज करती हैं, क्योंकि हर बार दोनों में से किसी एक को सिस्टम रोक ही लेता है। नतीजा यह होता है कि आखिर में दोनों बेटियों को मजबूरन मैनुअल लाइन में लगकर अपना सिक्योरिटी वैरिफिकेशन, सिक्योरिटी चेक और बोर्डिंग प्रोसेस पूरा करना पड़ता है।
कारोबारियों ने मंत्रालय को लिखी चिट्ठी
संजीव-राजीव और केया-हिया जैसे जुड़वा भाई-बहनों को हो रही परेशानी को देखते हुए अहमदाबाद के कारोबारियों ने डिजी यात्रा में मौजूद इस खामी को लेकर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय को खत लिखा है। कारोबारियों ने अपनी चिट्ठी में कहा है कि वे यह समझते हैं कि दो एक जैसे दिखने वाले चेहरों को देखकर सिस्टम उन्हें डुप्लिकेट मान सकता है। लेकिन साथ ही यह भी उतना ही सच है कि कोई भी जुड़वा भाई-बहन शत-प्रतिशत एक जैसे नहीं होते, उनके बीच कोई न कोई सूक्ष्म अंतर जरूर मौजूद रहता है। कारोबारियों की मांग है कि डिजी यात्रा का प्रबंधन करने वाली एजेंसी को अपने सिस्टम को सिर्फ मॉडिफाई ही नहीं करना चाहिए, बल्कि उसे इतना सक्षम बनाना चाहिए कि वह चेहरों के बीच मौजूद मामूली से मामूली अंतर को भी पहचान सके। तभी डिजी यात्रा शुरू करने का असली मकसद, यानी सभी यात्रियों को एक जैसी पेपरलेस और तेज सुविधा देना, पूरी तरह से पूरा हो पाएगा।











