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गुवाहाटी में आईपीएल सट्टेबाजी से जुड़े धनशोधन मामले में दीपेश बजोरिया को ईडी ने पकड़ाअसम
21 सित॰ 2026, 6:20 pm (10 दिन पहले)· 1

गुवाहाटी में आईपीएल सट्टेबाजी से जुड़े धनशोधन मामले में दीपेश बजोरिया को ईडी ने पकड़ा

प्रवर्तन निदेशालय ने असम और पूर्वोत्तर में क्रिकेट सट्टेबाजी सिंडिकेट चलाने और 28 करोड़ रुपये से अधिक की हेराफेरी के आरोप में गुवाहाटी के कारोबारी दीपेश बजोरिया को गिरफ्तार किया है।

प्रवर्तन निदेशालय की गुवाहाटी जोनल यूनिट ने क्रिकेट सट्टेबाजी और वित्तीय धोखाधड़ी के एक बड़े नेटवर्क पर कानूनी शिकंजा कसते हुए स्थानीय निवासी दीपेश बजोरिया को हिरासत में लिया है। यह कानूनी कार्रवाई असम समेत समूचे पूर्वोत्तर क्षेत्र में इंडियन प्रीमियर लीग के मुकाबलों के दौरान चलाए जाने वाले गैरकानूनी सट्टेबाजी तंत्र की व्यापक पड़ताल के सिलसिले में की गई है। संघीय जांच एजेंसी ने दीपेश बजोरिया को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 की धारा 19(1) के तहत 19 सितंबर को आधिकारिक रूप से गिरफ्तार किया।

असम पुलिस की एफआईआर से शुरू हुई थी जांच

केंद्रीय जांच एजेंसी का यह पूरा मामला गुवाहाटी जोनल ऑफिस द्वारा 30 मार्च 2023 को दर्ज किए गए ईसीआईआर/जीडब्ल्यूजेडओ-आई/06/2023 पर आधारित है। इस जांच की आधारशिला अक्टूबर 2021 में गुवाहाटी क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज की गई शुरुआती एफआईआर थी। इसके अतिरिक्त तिनसुकिया पुलिस और पानबाजार पुलिस थानों में दर्ज संबंधित मुकदमों को भी इस जांच का हिस्सा बनाया गया। पुलिस द्वारा दर्ज इन मामलों में भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 406 और 420 के साथ असम गेम एंड बेटिंग एक्ट, 1970 के कई कड़े प्रावधान शामिल किए गए थे, जो एक सुनियोजित अवैध क्रिकेट सट्टेबाजी गिरोह की गतिविधियों से जुड़े थे।

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सट्टेबाजी के डिजिटल प्लेटफॉर्म और बुकी का नेटवर्क

जांच एजेंसी के अनुसार दीपेश बजोरिया इस पूरे आपराधिक नेटवर्क में मुख्य बुकी की भूमिका निभा रहा था। दांव लगाने, सट्टे के सौदे स्वीकार करने और वित्तीय लेन-देन के निपटारे के लिए उसने कई ऑनलाइन सट्टेबाजी पोर्टलों और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया। इन गतिविधियों के लिए विशेष रूप से www.skyexchange.com और www.winner7.io जैसी वेबसाइटों की मदद ली गई थी। इन गुप्त माध्यमों के जरिए खिलाड़ियों और मैचों पर बड़ी रकम के दांव लगवाए जाते थे और फिर फंड का आदान-प्रदान किया जाता था।

फर्म के बैंक खातों से 28 करोड़ रुपये की आवाजाही

सट्टेबाजी से अर्जित अवैध कमाई को छिपाने और उसे बैंकिंग प्रणाली में खपाने के लिए एक साझेदारी फर्म का सहारा लिया गया। मेसर्स डीआरएम कोक नामक इस फर्म में दीपेश बजोरिया खुद एक पार्टनर है। इस कंपनी के बैंक खाते का इस्तेमाल मुख्य तौर पर सट्टेबाजी के अवैध धन को घुमाने के लिए किया जा रहा था। वित्तीय रिकॉर्ड की समीक्षा से पता चला कि 19 अप्रैल 2022 से 15 मई 2026 के बीच इस खाते में लगभग 28.12 करोड़ रुपये जमा किए गए, जबकि करीब 28.03 करोड़ रुपये की निकासी दर्ज की गई।

छापेमारी में संपत्तियों के दस्तावेज और लग्जरी गाड़ियां जब्त

इससे पूर्व धनशोधन निवारण अधिनियम की धारा 17 के तहत 26 मई को बजोरिया से जुड़े ठिकानों पर सघन तलाशी अभियान चलाया गया था। इस दौरान जांच अधिकारियों ने कई अचल संपत्तियों के कागजात और महंगी लग्जरी गाड़ियों के रिकॉर्ड बरामद किए। इसके साथ ही आरोपी के मोबाइल फोन और ईमेल खातों से जुड़ा डिजिटल डेटा भी जब्त कर उसकी क्लोनिंग की गई थी। जुटाए गए भौतिक साक्ष्यों और पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी अपराध से अर्जित धन के अधिग्रहण, कब्जे, हस्तांतरण और उसे वैध संपत्ति के रूप में दिखाने की साजिश में पूरी तरह लिप्त था।

अदालत ने छह दिनों की रिमांड पर सौंपा

वित्तीय लेनदेन के संबंध में आरोपी द्वारा दी गई दलीलों और बाद में एकत्र किए गए ठोस सबूतों के बीच भारी विसंगतियां पाई गईं। जांच एजेंसी अब इस अवैध पूंजी के अंतिम स्रोत, विभिन्न माध्यमों से इसके प्रवाह, उपयोग और वास्तविक लाभार्थियों का पता लगाने में जुटी है। गिरफ्तारी के पश्चात दीपेश बजोरिया को विशेष पीएमएलए अदालत के रूप में नामित गुवाहाटी की सीबीआई अदालत संख्या 3 के समक्ष पेश किया गया। अदालत ने मामले की तह तक जाने के लिए आरोपी को छह दिनों की प्रवर्तन निदेशालय हिरासत में भेजने का आदेश दिया।

सवाल-जवाब

प्रवर्तन निदेशालय ने दीपेश बजोरिया को किस मामले में गिरफ्तार किया है?
उन्हें असम और पूर्वोत्तर में आईपीएल मैचों के दौरान अवैध क्रिकेट सट्टेबाजी सिंडिकेट चलाने और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया गया है।
दीपेश बजोरिया की गिरफ्तारी किस कानून और धारा के तहत हुई?
उनकी गिरफ्तारी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 की धारा 19(1) के तहत 19 सितंबर को की गई।
सट्टेबाजी नेटवर्क किन वेबसाइटों का इस्तेमाल कर रहा था?
यह नेटवर्क मुख्य रूप से www.skyexchange.com और www.winner7.io जैसी सट्टेबाजी साइटों और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग का इस्तेमाल करता था।
सट्टेबाजी के पैसे को किस फर्म के खाते से घुमाया गया था?
अवैध धन को मेसर्स डीआरएम कोक नामक साझेदारी फर्म के बैंक खाते के जरिए रूट किया गया था, जिसमें बजोरिया एक भागीदार हैं।
उस बैंक खाते में कितने रुपये का वित्तीय लेन-देन दर्ज हुआ था?
19 अप्रैल 2022 से 15 मई 2026 के बीच उस खाते में लगभग 28.12 करोड़ रुपये जमा और 28.03 करोड़ रुपये की निकासी हुई थी।
तलाशी के दौरान जांच अधिकारियों को क्या बरामद हुआ था?
26 मई की तलाशी में संपत्ति के दस्तावेज, लग्जरी गाड़ियों के रिकॉर्ड और मोबाइल फोन व ईमेल से डिजिटल डेटा जब्त किया गया था।
अदालत ने आरोपी को कितने दिनों की रिमांड पर भेजा है?
गुवाहाटी की सीबीआई अदालत संख्या 3 (विशेष पीएमएलए कोर्ट) ने आरोपी को छह दिनों की ईडी हिरासत में भेजा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Arshdeep Ahluwalia@arshdeep-ahluwalia·9 दिन पहले

यह मामला रेखांकित करता है कि कैसे क्षेत्रीय स्तर के सट्टेबाजी सिंडिकेट अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और मुखौटा फर्मों का उपयोग कर वित्तीय अपराधों को अंजाम दे रहे हैं। 28 करोड़ से अधिक की हेराफेरी यह दर्शाती है कि अवैध गेमिंग नेटवर्क उत्तर पूर्व में किस हद तक फैल चुके हैं। आगामी जांच में यह सामने आना बाकी है कि इस वित्तीय तंत्र से जुड़े अन्य स्थानीय और राष्ट्रीय चेहरे कौन हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·9 दिन पहले

यह मामला सिर्फ़ सट्टेबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वित्तीय प्रणाली में संगठित अपराध की घुसपैठ को उजागर करता है। शेल फर्मों और डिजिटल प्लेटफॉर्मों के जरिए करोड़ों रुपये की हेराफेरी यह संकेत देती है कि जांच का दायरा अब पूर्वोत्तर के अन्य संभावित वित्तीय सहयोगियों तक भी फैल सकता है।

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·9 दिन पहले

यह मामला डिजिटल युग में संगठित अपराध और अवैध वित्तीय तंत्र के खतरनाक गठजोड़ को बेनकाब करता है। एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स और शेल फर्मों के जरिए करोड़ों की हेराफेरी यह दर्शाती है कि क्षेत्रीय अपराध अब अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क्स से जुड़ रहे हैं। जांच एजेंसियों के लिए यह बड़ी चुनौती है कि वे केवल एक मुख्य आरोपी तक सीमित न रहें, बल्कि इस पूरे सिंडिकेट के वित्तीय स्रोतों और डिजिटल पदचिन्हों को पूरी तरह से ध्वस्त करें, ताकि इस तरह के अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·9 दिन पहले

यह मामला साफ दर्शाता है कि कैसे अवैध सट्टेबाजी सिंडिकेट अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म और शेल फर्मों के जरिए वित्तीय व्यवस्था में सेंध लगा रहे हैं। आने वाले दिनों में ईडी इस नेटवर्क से जुड़े अन्य बुकीज़ और हवाला ऑपरेटरों की संपत्तियां कुर्क करने की दिशा में बड़े कदम उठा सकती है।

Ravikash Gupta@ravikash·9 दिन पहले

यह प्रकरण स्पष्ट करता है कि किस प्रकार अवैध सट्टेबाजी अब परिष्कृत वित्तीय अपराध का रूप ले चुकी है, जहाँ साझेदारी फर्मों और डिजिटल एसेट्स के माध्यम से बड़े पैमाने पर काले धन को वैध बनाने का प्रयास किया जाता है। वित्तीय खुफिया इकाइयों और प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा ऐसे मामलों में शेल कंपनियों और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स की गहरी जाँच से यह बात सामने आ रही है कि पारंपरिक अपराध अब आधुनिक तकनीकी और बैंकिंग तंत्र का किस हद तक दुरुपयोग कर रहे हैं। आने वाले समय में इस तरह के सिंडिकेट्स के खिलाफ कड़े विनियामक कदम उठाए जाने की पूरी संभावना है।

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