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हरिद्वार की हर की पैड़ी का सूखा हाल, पानी रुकते ही सामने आया कचरे और पुराने कपड़ों का बड़ा ढेरउत्तराखंड
22 अक्तू॰ 2026, 5:53 pm (15 दिन पहले)· 7

हरिद्वार की हर की पैड़ी का सूखा हाल, पानी रुकते ही सामने आया कचरे और पुराने कपड़ों का बड़ा ढेर

हरिद्वार की हर की पैड़ी पर गंगनहर का पानी रुकने के बाद सूखी तलहटी में भारी कचरा और कपड़े नजर आने लगे हैं। सालाना मरम्मत और आगामी महाकुंभ की तैयारियों के चलते 7 नवंबर की मध्यरात्रि तक जलापूर्ति बंद रखी गई है।

अक्टूबर के सुहाने मौसम में यदि आपकी योजना धर्मनगरी हरिद्वार पहुंचकर हर की पैड़ी के पवित्र जल में डुबकी लगाने की है, तो अपनी यात्रा को थोड़ा टालना बेहतर होगा। इस समय इस प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र की वास्तविक स्थिति किसी को भी हैरान कर सकती है। गंगा की निरंतर बहने वाली धारा इस वक्त नजर नहीं आ रही है, और उसकी जगह घाटों तथा सूखी जमीन पर केवल पुराने कपड़ों के ढेर, फटे हुए जूते, प्लास्टिक थैलियां और बदबूदार कचरा फैला हुआ है। जिस स्थान पर रोजाना हजारों श्रद्धालु पूरी आस्था के साथ सिर झुकाते थे, वहां अब लोग कीचड़ और रेत के बीच पैसे तलाशते दिखाई दे रहे हैं।

गंगनहर में बहाव रुकने से खुला हकीकत का पन्ना

गंगनहर में जल का प्रवाह थमने के बाद नदी की सतह का जो दृश्य सामने आया है, वह न केवल मन को आहत करने वाला है बल्कि व्यवस्था पर बड़े सवाल भी खड़े करता है। हर की पौड़ी के प्रसिद्ध घाट इन दिनों किसी कचरा घर की भांति प्रतीत हो रहे हैं। गंगा के तटों और सुरक्षा रेलिंगों पर भक्तों द्वारा छोड़े गए पुराने वस्त्र लटके हुए साफ देखे जा सकते हैं। जलस्तर घटने के बाद सूखी हुई तलहटी में भारी तादाद में चप्पलें और पॉलीथीन के पैकेट जमा हो गए हैं। इस बदहाली के बीच स्थानीय निवासी और बच्चे सूखी जमीन पर उतरकर उन सिक्कों और धातुओं को ढूंढ रहे हैं जिन्हें श्रद्धालुओं ने पूजा के दौरान अर्पित किया था। एक तरफ जहां दूर-दूर से आने वाले तीर्थयात्री पानी न मिलने से निराश लौट रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ यह दृश्य प्रशासन और जनता दोनों के लिए सोचने पर मजबूर करता है।

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सालाना रखरखाव और कुंभ कार्यों के लिए रोकी गई आपूर्ति

हर की पैड़ी पर जल प्रवाह के थमने के पीछे गंगनहर की वार्षिक बंदी मुख्य कारण है। प्रत्येक वर्ष दशहरे से लेकर दीपावली के बीच 18 दिनों के लिए नहर के पानी को रोक दिया जाता है, ताकि इसकी साफ-सफाई और मरम्मत का नियमित काम पूरा किया जा सके। इस समयावधि में नहर के भीतर जमी सिल्ट और कचरे को बाहर निकाला जाता है। प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, आगामी 7 नवंबर की मध्यरात्रि को गंगनहर में फिर से पानी छोड़ा जाएगा, जिसके पश्चात ही यहां का जल प्रवाह पूर्ववत हो पाएगा। इस बार की बंदी केवल सामान्य रखरखाव तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वर्ष 2027 में हरिद्वार में होने वाले अर्धकुंभ और आगामी महाकुंभ को ध्यान में रखते हुए बड़े पैमाने पर जीर्णोद्धार कार्य भी किए जा रहे हैं। विशाल जनसैलाब की संभावना को देखते हुए घाटों की मजबूती, सीढ़ियों की मरम्मत और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने का अभियान तेजी से चल रहा है।

पर्यटन सीजन और श्रद्धालुओं की निराशा

इन दिनों हरिद्वार में पश्चिम बंगाल से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं का विशेष सत्र चल रहा है। काफी दूरदराज के क्षेत्रों से यहां पहुंचे यात्रियों को जब यह मालूम होता है कि स्नान के लिए जल ही उपलब्ध नहीं है, तो उनकी सारी उम्मीदें धरी की धरी रह जाती हैं। कई लोग बिना स्नान किए ही केवल आचमन करके और थोड़ा सा गंगाजल छिड़ककर अपनी तीर्थयात्रा को समाप्त कर रहे हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 7 नवंबर के बाद हालात पूरी तरह सामान्य हो जाएंगे और भक्तजन एक बार फिर हर की पौड़ी पर आसानी से स्नान का लाभ उठा सकेंगे।

सवाल-जवाब

हर की पैड़ी पर पानी क्यों रोका गया है?
गंगनहर की वार्षिक सफाई, मरम्मत और महाकुंभ की तैयारियों के चलते पानी रोका गया है।
हर की पैड़ी पर दोबारा पानी कब आएगा?
प्रशासन के अनुसार 7 नवंबर की मध्यरात्रि को गंगनहर में पानी दोबारा छोड़ा जाएगा।
इस दौरान हर की पैड़ी पर क्या स्थिति नजर आ रही है?
पानी हटने के बाद सूखी सतह पर पुराने कपड़े, जूते और कचरे का बड़ा ढेर दिखाई दे रहा है।
किन श्रद्धालुओं को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है?
इस समय बंगाल से आने वाले पर्यटकों और दूरदराज के तीर्थयात्रियों को स्नान न हो पाने के कारण निराशा हो रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Riya Menon@riya-menon·14 दिन पहले

हरिद्वार में पानी सूखने पर कचरे और कपड़ों का ऐसा ढेर देखकर बहुत दुख हुआ। हम सब खाने-पीने की चीजें और पैकेजिंग तो ले जाते हैं, पर अपनी आस्था की जगह को साफ रखना भूल जाते हैं। महाकुंभ से पहले इस गंदगी को देखकर लगता है कि हमें अपनी नागरिक जिम्मेदारियों पर बहुत काम करने की जरूरत है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·14 दिन पहले

पिछली बार जब मैं वहाँ गया था, पानी के नीचे का हाल देखने का मौका नहीं मिला था। गंगनहर सूखने पर जो कचरा और कपड़े निकलते हैं, वह देखकर हैरानी होती है कि हम अपनी आस्था के नाम पर कितनी गंदगी छोड़ जाते हैं। प्रशासन मरम्मत करा रहा है, पर हमारी आदतें कब सुधरेंगी?

Ravikash Gupta@ravikash·14 दिन पहले

अर्जुन, बिल्कुल सही कहा। क्या अगली बार पानी आने से पहले सच में सारा कचरा साफ हो पाएगा?

Karan Malhotra@karan-malhotra·14 दिन पहले

हर साल सफाई के लिए नहर बंद होती है, फिर भी इतना कचरा और पुराने कपड़े हर बार कैसे निकल आते हैं जब लोग खुद नियम जानते हैं? क्या प्रशासन सिर्फ अपील करने के अलावा कभी कोई ठोस जुर्माना या कार्रवाई नहीं करेगा?

Rohan Verma@rohan-verma·14 दिन पहले

करण भाई, जुर्माना तो ठीक है पर लोग खुद कपड़े और प्लास्टिक फेंकना कब बंद करेंगे? प्रशासन कितना भी सख्ती कर ले जब तक हमारी आदत नहीं सुधरेगी, यही हाल रहेगा।

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