जयपुर में आयोजित डायमंड स्टेट्स समिट राजस्थान के मंच से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल को लेकर एक तीखा बयान दिया है। उन्होंने मांग उठाई है कि ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल के दौरान देश भर में जितने भी चुनाव संपन्न हुए हैं, उन सभी के नतीजों की गहन समीक्षा की जानी चाहिए। पायलट के मुताबिक यह समीक्षा केवल किसी एक विशेष राज्य या किसी एक खास सीट तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन सभी स्थानों के परिणामों का विश्लेषण होना चाहिए जहां पार्टी को जीत मिली है और जहां हार का सामना करना पड़ा है।
राजनीतिक हलकों में इस बयान को चुनाव आयोग की कार्यशैली और व्यवस्था पर उठ रहे सवालों के बीच बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सचिन पायलट ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल शर्त निष्पक्ष चुनाव होना है। चुनावी प्रक्रिया में देश के सभी राजनीतिक दलों को एक समान अवसर मिलना अनिवार्य है। उन्होंने खेल का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि मुकाबले में अंपायर ही निष्पक्ष नहीं होगा, तो खेल निष्पक्ष कैसे हो सकता है। पार्टी हमेशा से एक निष्पक्ष मुकाबले की पक्षधर रही है और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि पूरी चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता बरकरार रहे।
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए सचिन पायलट ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया साल 1952 से चली आ रही है, लेकिन वर्तमान समय में इस पर इतना अधिक विवाद क्यों खड़ा हो रहा है, यह एक स्वाभाविक सवाल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनावी व्यवस्था पूरी तरह निष्पक्ष होनी चाहिए, मगर मौजूदा परिस्थितियों को देखकर ऐसा प्रतीत नहीं होता है। रामलीला मैदान से किस तरह का माहौल तैयार हुआ है, इसका वास्तविक परिणाम आने वाला वक्त ही तय करेगा। इसके साथ ही उन्होंने देश की सर्वोच्च अदालत और न्यायपालिका में अपनी गहरी आस्था व्यक्त की और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अपनी ताकत का प्रदर्शन करने का अहंकार उचित नहीं है, और इसका परिणाम देश की जनता के सामने अवश्य आएगा।
विरोध प्रदर्शनों और पुलिस कार्रवाई पर भी खड़े किए सवाल
डायमंड स्टेट्स समिट के दौरान सचिन पायलट ने आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों के समय पुलिस प्रशासन द्वारा अपनाई जाने वाली कार्रवाई पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि प्रदर्शनकारियों पर पुलिस का लाठीचार्ज पूरी तरह से बंद होना चाहिए और किसी भी स्थिति में पैलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए आपसी संवाद बेहद आवश्यक है और इस संवाद को कायम रखने की पहली जिम्मेदारी देश की सरकार की होती है। पायलट ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज के मौजूदा हालात की वजह से देश के युवाओं के मन में असुरक्षा का भाव घर करता जा रहा है।
उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता पक्ष हर छोटी-बड़ी चीज़ पर अपना पूर्ण नियंत्रण स्थापित करना चाहता है, जिसका विरोध विपक्षी दल कर रहे हैं। कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी भी इसी बड़ी चुनौती का डटकर सामना कर रहे हैं। पायलट ने जोर देकर कहा कि देश की तमाम संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा और मर्यादा हमेशा बरकरार रहनी चाहिए। अतीत में क्या सही हुआ और क्या गलत निर्णय लिए गए, उन तमाम बातों से सबक लेकर ही आगे बढ़ने की जरूरत है। उनके अनुसार, किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के भीतर संस्थाओं की निष्पक्षता और जनता का अटूट भरोसा ही सबसे ज्यादा मायने रखता है।


















