राजनीतिक मंचों पर महिला सशक्तिकरण और आरक्षण के मुद्दों को लेकर अक्सर बहस देखने को मिलती है, और ऐसा ही नजारा हाल ही में एक बड़े मीडिया मंच पर भी सामने आया। न्यूज18 इंडिया के डायमंड स्टेट समिट के दौरान राजस्थान में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और आरक्षण जैसे अहम विषयों पर कांग्रेस और बीजेपी की महिला नेत्रियों के बीच तीखी बहस छिड़ गई। इस चर्चा के दौरान दोनों दलों की तरफ से अपने राजनीतिक इतिहास और भविष्य की नीतियों को लेकर दावे किए गए, जिससे राज्य की राजनीति में महिला प्रतिनिधित्व पर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।
कांग्रेस का दावा, पार्टी ने हमेशा दी महिलाओं को प्राथमिकता
राजस्थान महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सारिका सिंह चौधरी ने मंच से बोलते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने हमेशा से महिलाओं को संगठन और सत्ता में प्राथमिकता दी है। उन्होंने अपनी बात के समर्थन में स्थानीय निकायों का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस ने पंचायतों में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देकर उन्हें राजनीति की मुख्यधारा में आगे बढ़ने का मजबूत अवसर प्रदान किया। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि अब विधानसभा और लोकसभा के चुनावों में भी महिलाओं की भागीदारी इसी तर्ज पर बढ़ाई जानी चाहिए।
सारिका सिंह चौधरी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का जिक्र करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस मूल रूप से नारी शक्ति के सम्मान में पूरा विश्वास रखती है, लेकिन जिस तरह से मौजूदा सरकार इसे लागू करना चाहती है, पार्टी उसी तौर-तरीके के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि महिला अधिकारों के नाम पर केवल दिखावा नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए, जिसके लिए कांग्रेस लगातार मुखर होकर अपनी बात रखती आई है।
बीजेपी का पलटवार, तात्कालिक नहीं बल्कि दूरगामी सोच पर जोर
कांग्रेस के इन बयानों का कड़ा जवाब देते हुए राजस्थान बीजेपी महिला मोर्चा की अध्यक्ष राखी राठौड़ ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी किसी भी फैसले को तात्कालिक राजनीतिक लाभ के चश्मे से नहीं देखती है। पार्टी हमेशा दूरगामी सोच और ठोस नीतियों के साथ आगे बढ़ने में विश्वास रखती है, ताकि समाज के हर वर्ग को स्थाई और वास्तविक फायदा मिल सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं को उनके हक और अधिकार जरूर मिलेंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता से जो भी वादे किए हैं, उन्हें पूरी प्रतिबद्धता के साथ पूरा किया जा रहा है।
चर्चा के दौरान राजनीतिक माहौल तब और गर्मा गया जब राखी राठौड़ ने प्रियंका गांधी पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें तो अपने ही घर के भीतर राजनीतिक संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है। समिट के इस मंच पर दोनों दलों की नेताओं के बीच हुए इस आमने-सामने के संवाद से यह साफ हो गया कि आने वाले दिनों में महिला आरक्षण और महिला मतदाताओं को साधने का मुद्दा राजनीतिक दलों के बीच बहस का एक बड़ा केंद्र बना रहेगा।

















