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हिमाचल के रूपिन दर्रे पर अचानक हिमपात में दबीं 2,000 से अधिक भेड़-बकरियां, राहत दल मौके पर भेजा गयाहिमाचल प्रदेश
1 अक्तू॰ 2026, 3:19 pm (36 दिन पहले)· 0

हिमाचल के रूपिन दर्रे पर अचानक हिमपात में दबीं 2,000 से अधिक भेड़-बकरियां, राहत दल मौके पर भेजा गया

हिमाचल प्रदेश में किन्नौर और शिमला सीमा पर स्थित रूपिन दर्रे पर भारी बर्फबारी के चलते निचले इलाकों की ओर लौट रहे चरवाहों के 2,000 से अधिक मवेशी बर्फ में फंस गए हैं.

हिमाचल प्रदेश के ऊंचे पर्वतीय इलाकों में मौसम के अचानक बदले मिजाज ने खानाबदोश चरवाहों की मुश्किलें बेहद बढ़ा दी हैं. किन्नौर जिले के सांगला और शिमला जिले के डोडरा-क्वार क्षेत्र को आपस में जोड़ने वाले रूपिन दर्रा क्षेत्र में 26 सितंबर को हुए तेज हिमपात के बाद 2,000 से ज्यादा भेड़-बकरियों के मोटी बर्फ की चादर के नीचे दब जाने की गंभीर आशंका सामने आई है. सर्दियों की दस्तक से पहले अपने मवेशियों को लेकर निचले गर्म इलाकों की तरफ उतर रहे गद्दी चरवाहे इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में आ गए, जिससे उनका भारी नुकसान हुआ है.

सर्दियों के प्रवास के दौरान अचानक हुआ भारी हिमपात

किन्नौर और उसके आस-पास की ऊंची चोटियों पर पिछले दिनों भारी वर्षा के साथ अचानक तेज बर्फबारी शुरू हो गई थी. उस दौरान पारंपरिक गद्दी चरवाहे अपने पूरे रेवड़ के साथ रूपिन दर्रे के संकरे रास्तों से होकर निचले सुरक्षित क्षेत्रों की ओर बढ़ रहे थे. दर्रे की ऊंचाई पर पहुंचते ही एकाएक भारी बर्फबारी शुरू हो गई, जिससे पूरा इलाका सफेद चादर में लिपट गया और जानवरों का आगे बढ़ना पूरी तरह नामुमकिन हो गया. कई चरवाहे जो पीछे थे वे तो समय रहते सुरक्षित लौटने में कामयाब रहे, मगर जो दल दर्रे के मुख्य हिस्से तक पहुंच चुके थे, उनके लिए न तो आगे बढ़ना संभव रहा और न ही वहां से तुरंत नीचे उतरना आसान था.

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प्रशासन ने गठित किया संयुक्त बचाव दल

घटना की जानकारी सामने आते ही प्रशासन तुरंत हरकत में आया. राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने डोडरा-क्वार के उप-मंडलीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) को फौरन संयुक्त बचाव दल तैयार करने के निर्देश जारी किए. इस विशेष राहत अभियान में स्थानीय चरवाहों, होमगार्ड के जवानों, पुलिस बल और राजस्व विभाग के कर्मियों को शामिल किया गया है. यह बचाव टीम बुधवार को रूपिन दर्रे के सबसे ऊंचे हिस्से तक पहुंचने में सफल रही. दल के सदस्य सैटेलाइट फोन के जरिए लगातार जिला प्रशासन के संपर्क में बने हुए हैं और जमीनी स्थिति की ताजा जानकारी साझा कर रहे हैं.

तीन फीट से अधिक बर्फ, सिर्फ बड़े मवेशियों के सींग नजर आ रहे

राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि रूपिन दर्रा क्षेत्र में तीन फुट से अधिक मोटी बर्फ जमा हो चुकी है. चरवाहों की ओर से दी गई सूचना के मुताबिक बर्फ के भारी दबाव के कारण लगभग 2,000 छोटे-बड़े जानवर दब चुके हैं. बर्फ के ऊपर केवल कुछ बड़े जानवरों के सींग ही दिखाई दे रहे हैं, जबकि बर्फ में दबी भेड़ों और बकरियों की वास्तविक स्थिति का अभी कोई स्पष्ट सुराग नहीं मिल पा रहा है. राहत की बात यह है कि इस गंभीर आपदा में किसी भी चरवाहे या इंसान की जान जाने की खबर नहीं है, सभी लोग सुरक्षित बताए जा रहे हैं.

बर्फ पिघलने पर होगा वास्तविक नुकसान का आकलन, मिलेगा विशेष पैकेज

राजस्व मंत्री ने आगे जानकारी दी कि संबंधित विभागों के तकनीकी अधिकारियों का एक और दल जल्द ही मौके पर भेजा जाएगा, जो पूरे इलाके में हुए कुल नुकसान का विस्तृत ब्योरा तैयार करेगा. वास्तविक नुकसान की पुष्टि तभी हो पाएगी जब वहां जमी बर्फ पिघलेगी और पशुओं की विधिवत गिनती की जाएगी. सरकार ने प्रभावित पशुपालकों को भरोसा दिलाया है कि नुकसान के सटीक आकलन के तुरंत बाद राहत सहायता राशि वितरित की जाएगी और चरवाहों की आजीविका को सहारा देने के लिए एक विशेष राहत पैकेज की व्यवस्था भी की जाएगी. रूपिन दर्रा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा को जोड़ने वाला एक बेहद अहम और दुर्गम पर्वतीय मार्ग है.

सवाल-जवाब

रूपिन दर्रे पर क्या घटना हुई है?
26 सितंबर को अचानक हुई तीन फीट से अधिक भारी बर्फबारी के कारण रूपिन दर्रे में 2,000 से अधिक भेड़-बकरियां बर्फ के नीचे दब गई हैं.
रूपिन दर्रा किन क्षेत्रों को आपस में जोड़ता है?
यह दर्रा हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के सांगला और शिमला जिले के डोडरा-क्वार क्षेत्र को जोड़ता है, तथा हिमाचल और उत्तराखंड की सीमा पर स्थित है.
क्या इस प्राकृतिक आपदा में कोई जनहानि हुई है?
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी के अनुसार सभी चरवाहे सुरक्षित हैं और किसी भी इंसान के हताहत होने की कोई सूचना नहीं है.
बचाव अभियान में कौन-कौन से विभाग शामिल हैं?
डोडरा-क्वार एसडीएम के निर्देश पर स्थानीय चरवाहों, होमगार्ड, पुलिस और राजस्व विभाग के कर्मियों को मिलाकर एक संयुक्त बचाव दल मौके पर भेजा गया है.
प्रभावित चरवाहों को सरकार किस प्रकार मदद देगी?
बर्फ पिघलने के बाद नुकसान का विस्तृत सर्वेक्षण कराया जाएगा और सरकार प्रभावित पशुपालकों को एक विशेष राहत पैकेज के जरिए सहायता प्रदान करेगी.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·35 दिन पहले

इतनी भारी बर्फबारी में दो हजार बेजुबान जानवरों का फंसना डरावना है। गनीमत है कि इंसान सुरक्षित हैं, पर उम्मीद है बचाव दल जल्द से जल्द बाकी मवेशियों को भी सुरक्षित निकाल लेगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·35 दिन पहले

अचानक मौसम बदलने से इन गद्दी चरवाहों की साल भर की कमाई दांव पर लग गई है। राहत दल पहुंच गया है और गनीमत है कि इंसानों की जान बच गई, वरना इतनी ऊंचाई पर सर्दियों से पहले मुश्किलें और बढ़ जातीं।

Ravikash Gupta@ravikash·35 दिन पहले

अर्जुन भाई, सच कहा आपने। जब मैं एक बार किन्नौर गया था, तो अचानक मौसम बदलते देखा था, वहां की ठंड वाकई डरावनी हो जाती है।

Rohan Verma@rohan-verma·35 दिन पहले

तीन फीट बर्फ में सिर्फ सींग दिखाई देना वाकई डरावना है। गद्दी चरवाहों की इतनी मेहनत और उनके मवेशियों का इस तरह फंस जाना बहुत बुरा हुआ, ऊपर वाले से दुआ है कि जानवर सुरक्षित निकल आएं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·35 दिन पहले

रोहन भाई, सच कह रहे हो। जब मैं पिछली बार किन्नौर गया था, वहां इन गद्दी चरवाहों की जिंदगी बहुत करीब से देखी थी, ऐसे मौसम में उनकी जान पर भी बन आती है।

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