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हिमाचल की सीमा कुमारी ने 10 हजार मीटर दौड़ में कांस्य जीतकर रचा इतिहास, सरकार देगी एक करोड़ रुपये का नकद पुरस्कारहिमाचल प्रदेश
25 सित॰ 2026, 3:16 pm (42 दिन पहले)· 0

हिमाचल की सीमा कुमारी ने 10 हजार मीटर दौड़ में कांस्य जीतकर रचा इतिहास, सरकार देगी एक करोड़ रुपये का नकद पुरस्कार

चंबा के रेटा गांव की रहने वाली सीमा कुमारी ने जापान में आयोजित एशियन गेम्स में 10 हजार मीटर स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल कर भारत का 16 साल का इंतजार समाप्त कर दिया।

जापान में चल रहे एशियाई खेलों के ट्रैक से भारत के लिए एक बेहद सुखद और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। हिमाचल प्रदेश के एक सुदूर गांव की रहने वाली धाविका सीमा कुमारी ने महिलाओं की 10,000 मीटर स्पर्धा में तीसरा स्थान हासिल कर कांस्य पदक अपने नाम किया। इस जीत के साथ ही देश ने लगभग 16 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद इस विशिष्ट स्पर्धा में एशियाई मंच पर पदक का सूखा समाप्त किया है। साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिरंगा लहराने वाली इस एथलीट को राज्य की खेल नीति के प्रावधानों के अनुसार सरकार से 1 करोड़ रुपये की सम्मान राशि प्रदान की जाएगी।

कठिन हालात और आर्थिक तंगी के बीच बीता बचपन

चंबा जिले के दुर्गम रेटा गांव से ताल्लुक रखने वाली सीमा की यह यात्रा आसान नहीं रही। छह बच्चों के परिवार में वे सबसे छोटी संतान हैं। साल 2012 में उनके पिता का देहांत हो गया था, जिसके बाद पूरे घर के भरण-पोषण की जिम्मेदारी उनकी मां केसरी देवी के कंधों पर आ गई। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि शुरुआती दौर में सीमा के पास अभ्यास के लिए बुनियादी रनिंग शूज तक उपलब्ध नहीं थे। इन तमाम रुकावटों के बावजूद उनका खेल के प्रति लगाव कभी कम नहीं हुआ। खेल को गंभीरता से अपनाने के लिए उन्होंने कक्षा सात में ही अपना गांव छोड़ दिया और बेहतर माहौल तथा कोचिंग सुविधाओं के लिए धर्मशाला स्थित साई हॉस्टल का रुख किया।

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मां के अटूट भरोसे ने दी सपनों को उड़ान

सीमा की खेल यात्रा में उनकी मां का त्याग बेहद निर्णायक साबित हुआ। वर्ष 2017 में जब उनका चयन थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में आयोजित एशियन यूथ चैंपियनशिप के लिए हुआ, तब यात्रा और प्रतियोगिता के खर्च जुटाने के पैसे नहीं थे। ऐसी विषम परिस्थिति में मां केसरी देवी ने अपनी जमापूंजी, यानी फिक्स्ड डिपॉजिट तुड़वाकर अपनी बेटी को विदेश भेजा। सीमा ने भी मां के इस भरोसे को टूटने नहीं दिया और वहां कांस्य पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। गुरुवार को जब जापान में सीमा का मुकाबला चल रहा था, तब उनकी मां अपने घर पर टकटकी लगाए टेलीविजन स्क्रीन पर बेटी के हर कदम को देख रही थीं।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार शानदार प्रदर्शन

वर्ष 2018 में सीमा खेलो इंडिया कार्यक्रम का हिस्सा बनीं, जिससे उनके खेल को नई दिशा मिली। वे चार बार की राष्ट्रीय चैंपियन रह चुकी हैं और विश्व एथलेटिक्स के रिकॉर्ड में उनका नाम एशियन यूथ ओलंपिक की रजत पदक विजेता के तौर पर भी दर्ज है। वर्ष 2024 में हांगकांग में आयोजित 17वीं एशियन क्रॉस कंट्री चैंपियनशिप में उन्होंने 10,000 मीटर वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल किया था। वर्तमान एशियाड में उतरने से पहले उन्होंने इसी साल 10,000 मीटर में 32:02.43 का अपना सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत समय दर्ज कराया था, जो भारतीय एथलेटिक्स महासंघ और वैश्विक एथलेटिक्स रिकॉर्ड्स में उनका पर्सनल बेस्ट मार्क है।

सीएम सुक्खू और दिग्गज खिलाड़ियों ने दी बधाई

सीमा की इस ऐतिहासिक जीत के बाद उन्हें देश भर से सराहना मिल रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस गौरवशाली उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा,

"चंबा जिला के रेटा गांव की बेटी सीमा कुमारी जी ने एशियाई खेलों में 10,000 मीटर दौड़ में कांस्य जीतकर पूरे देश का मान बढ़ाया है।"
मुख्यमंत्री ने इसके साथ ही उनकी आगामी 5,000 मीटर प्रतियोगिता के लिए भी अपनी शुभकामनाएं दीं। राज्य की वर्तमान खेल नीति के तहत सरकार एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक विजेता को 5 करोड़, रजत पदक विजेता को 3 करोड़ और कांस्य पदक विजेता को 1 करोड़ रुपये का पुरस्कार देती है। वहीं भारतीय कबड्डी टीम के पूर्व कप्तान तथा पुलिस उपाधीक्षक अजय ठाकुर ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से सीमा की लगन और ऐतिहासिक प्रदर्शन की जमकर तारीफ की।

सवाल-जवाब

एशियन गेम्स में सीमा कुमारी ने कौन सा पदक जीता है?
सीमा कुमारी ने जापान में आयोजित एशियन गेम्स की 10,000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक हासिल किया है।
इस स्पर्धा में भारत को कितने समय बाद पदक मिला है?
भारत ने करीब 16 साल के लंबे इंतजार के बाद महिलाओं की 10,000 मीटर स्पर्धा में यह पदक जीता है।
हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा उन्हें कितना नकद पुरस्कार दिया जाएगा?
राज्य की खेल नीति के अनुसार कांस्य पदक विजेता होने के नाते उन्हें 1 करोड़ रुपये की सम्मान राशि मिलेगी।
सीमा कुमारी हिमाचल प्रदेश के किस जिले और गांव की निवासी हैं?
वे हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के सुदूर रेटा गांव की रहने वाली हैं।
10,000 मीटर में सीमा का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय क्या है?
इस स्पर्धा में उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय 32:02.43 है, जो आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज है।
शुरुआती दौर में उन्होंने खेल प्रशिक्षण कहां से हासिल किया?
उन्होंने कक्षा सात में अपना गांव छोड़ दिया था और धर्मशाला स्थित साई हॉस्टल से खेल का प्रशिक्षण लिया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·41 दिन पहले

सीमा की यह कहानी रोंगटे खड़े कर देती है। बिना जूतों के दौड़ने से लेकर एशियन गेम्स में मेडल जीतने तक का सफर वाकई अविश्वसनीय है। संघर्ष के ऐसे दिन देखकर लगता है कि कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता।

Ravikash Gupta@ravikash·41 दिन पहले

चंबा के छोटे से गांव से निकलकर एशियन गेम्स में मेडल लाना और वो भी तब जब जूतों के भी लाले थे, गजब जज्बा है! एक करोड़ का इनाम इस संघर्ष के आगे बहुत छोटा लगता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·41 दिन पहले

रविकेश, आपकी बात बिल्कुल सही है! पर क्या सच में राज्य सरकार का एक करोड़ का यह इनाम उसे समय पर मिल भी जाएगा?

Rohan Verma@rohan-verma·41 दिन पहले

सीमा की यह जीत वाकई रोंगटे खड़े कर देती है। जिस लड़की के पास कभी जूते खरीदने के पैसे नहीं थे, उसने आज एशियन गेम्स में देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। मां का संघर्ष और बेटी की जिद दोनों सलाम के काबिल हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·41 दिन पहले

रोहन जी, संघर्ष की ऐसी कहानियां अक्सर थानों की फाइलों या गुमशुदा मामलों में ही दबकर रह जाती हैं, इसलिए सीमा की यह सफलता और भी खास है।

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