जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद पर लगाम कसने के लिए भारत सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। भारतीय गृह मंत्रालय ने पाकिस्तान में बैठकर भारत विरोधी साजिशें रचने वाले एक कुख्यात आतंकी का चेहरा बेनकाब किया है, जिसकी पहचान मुफ्ती मोहम्मद असगर खान के रूप में हुई है। यही वह शख्स है, जिसने जम्मू के नगरोटा में भारतीय सेना के कैंप पर हुए हमले की साजिश रची थी और अब पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी PoK में बैठकर आतंकी ट्रेनिंग कैंप चला रहा है। आतंक की दुनिया में उसे अबू साद और साद जिमी के नाम से भी जाना जाता है।
कौन है मुफ्ती मोहम्मद असगर खान
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक असगर खान प्रतिबंधित संगठन जैश-ए-मोहम्मद का सक्रिय सदस्य है और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में रहकर संगठन के लिए काम करता है। वह वहां जैश-ए-मोहम्मद का अमीर होने के साथ-साथ संगठन के टेरर विंग का चीफ भी है, यानी संगठन के भीतर उसकी पकड़ काफी मजबूत मानी जाती है। एजेंसियों का कहना है कि नए लड़ाकों की भर्ती करने, उन्हें हथियार चलाने की ट्रेनिंग देने और भारत के खिलाफ नई-नई साजिशें रचने में उसकी सीधी भूमिका रही है। जांच में यह भी पता चला है कि वह मुजफ्फराबाद में एक आतंकी प्रशिक्षण कैंप भी संचालित करता है, जहां नए भर्ती हुए लड़ाकों को तैयार किया जाता है।
PoK के कैंपों में क्या सिखाया जाता है
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, असगर खान जैसे कमांडरों के संरक्षण में चल रहे इन कैंपों में आतंकियों को सिर्फ कट्टरपंथी विचारधारा ही नहीं घोंटी जाती, बल्कि उन्हें हथियार चलाने, विस्फोटक तैयार करने और सीमा पार कर भारत में घुसपैठ करने की बाकायदा ट्रेनिंग भी दी जाती है। एजेंसियों का मानना है कि इन्हीं कैंपों से निकलने वाले आतंकियों को बाद में भारत में बड़ी वारदातों को अंजाम देने के लिए भेजा जाता रहा है, जिससे यह साफ होता है कि सीमा पार आतंकी ढांचा किस तरह से सुनियोजित तरीके से काम करता है।
नगरोटा हमले की साजिश में सीधी भूमिका
मुफ्ती मोहम्मद असगर खान का नाम जम्मू के नगरोटा में भारतीय सेना के कैंप पर हुए आतंकी हमले के मुख्य साजिशकर्ताओं में शुमार है। जांच एजेंसियों के मुताबिक उसने इस हमले की योजना बनाने से लेकर हमलावर आतंकियों को हर तरह की मदद पहुंचाने तक में अहम भूमिका निभाई थी। यही वजह है कि वह लंबे अरसे से भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर बना हुआ है। खुफिया एजेंसियों का यह भी कहना है कि असगर खान सिर्फ हमलों की साजिश रचने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह जैश-ए-मोहम्मद के नेटवर्क को मजबूत बनाने के साथ-साथ संगठन को आर्थिक मदद पहुंचाने का काम भी करता है, जिससे संगठन की जड़ें और गहरी होती जा रही हैं।
गृह मंत्रालय ने खोले 23 आतंकियों के नाम
गृह मंत्रालय ने साफ किया है कि आतंकवाद को लेकर उसकी नीति जीरो टॉलरेंस की है और सुरक्षा एजेंसियां लगातार सीमा पार से सक्रिय आतंकी नेटवर्क पर नजर रखे हुए हैं। इसी नीति के तहत इन आतंकी संगठनों को जड़ से खत्म करने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए मंत्रालय ने ऐसे आतंकियों की पहचान सार्वजनिक करनी शुरू की है। मुफ्ती मोहम्मद असगर खान के साथ ही मंत्रालय ने कुल 23 अन्य आतंकियों के नाम और चेहरे भी उजागर किए हैं। इस सूची में मसूद इलियास कश्मीरी और मोहम्मद मुसादिक के नाम भी शामिल हैं, जिनका आतंकी रिकॉर्ड भी कम खतरनाक नहीं है।
मसूद इलियास कश्मीरी और मोहम्मद मुसादिक कौन हैं
मसूद इलियास कश्मीरी वही आतंकी है, जिसने अप्रैल 2022 में जम्मू के संजवान इलाके में पीडीपी कार्यालय के पास तैनात नाका पार्टी पर हमला किया था। वहीं मोहम्मद मुसादिक को लसिंयाकोट सेक्टर का लॉन्चिंग कमांडर बताया गया है, जो सीमा पर बनी सुरंगों के जरिए आतंकियों की घुसपैठ कराता रहा है। एजेंसियों के मुताबिक वह ड्रोन के जरिए हथियारों और गोला-बारूद की खेप भारत भेजने में भी शामिल रहा है। इतना ही नहीं, मोहम्मद मुसादिक अयोध्या स्थित रामजन्मभूमि मंदिर परिसर, नागपुर में आरएसएस मुख्यालय और पानीपत की आईओसीएल रिफाइनरी जैसी संवेदनशील जगहों की रेकी करने में भी संलिप्त रहा है, जो दिखाता है कि आतंकी संगठन कितने बड़े स्तर पर भारत में हमलों की योजना बना रहे थे।











