प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 से 8 जुलाई तक इंडोनेशिया की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे. यह यात्रा इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के निमंत्रण पर हो रही है और इसी के साथ पीएम मोदी अपने इंडो-पैसिफिक मिशन की शुरुआत भी करेंगे. इस दौरे को भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों, खासकर ऊर्जा और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में सहयोग को नई रफ्तार देने वाला माना जा रहा है. दौरे के दौरान पीएम मोदी इंडोनेशिया में रह रहे भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगे.
इंडोनेशिया में बसे भारतीय समुदाय में उत्साह
जकर्ता में बिहार कम्युनिटी के अध्यक्ष और पीटी एएमएमएएन मिनिरल इंटरनेशनल के डायरेक्टर नवीन चंद्र लाल ने बताया कि वहां बसा भारतीय समुदाय पीएम मोदी का बेसब्री से इंतजार कर रहा है. उन्होंने कहा कि पिछली बार भी समुदाय के लोग पीएम मोदी के स्वागत में पहुंचे थे और इस बार भी पूरी तैयारी की जा रही है. नवीन चंद्र लाल के मुताबिक सबसे अहम बात यह है कि भारत और इंडोनेशिया के रिश्ते फिलहाल बेहद मजबूत स्थिति में हैं. उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में पहले से ही अच्छा खासा सहयोग चल रहा है और सामान व संसाधनों का लेनदेन बड़े पैमाने पर होता है. उदाहरण के तौर पर कोयला खनन के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच काफी काम हो रहा है.
निकेल कॉपर पर आगे बढ़ सकता है सहयोग
नवीन चंद्र लाल ने आगे बताया कि निकेल, कॉपर और दूसरे क्रिटिकल मिनरल्स के मामले में भारत और इंडोनेशिया मिलकर काफी आगे बढ़ सकते हैं. उनके मुताबिक मौजूदा दौर में भारत को क्रिटिकल मिनरल्स की सख्त जरूरत है और इंडोनेशिया एक भरोसेमंद पार्टनर के तौर पर यह जरूरत पूरी कर सकता है. इंडोनेशिया के पास निकेल का बड़ा भंडार मौजूद है और इसी निकेल का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बैटरी बनाने में बड़े पैमाने पर होता है, इसलिए यह साझेदारी दोनों देशों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकती है.
कोविड संकट के दौर से निखरी भारत की छवि
वहीं शिव दवे ने कहा कि जब से प्रधानमंत्री मोदी ने देश की कमान संभाली है, तब से भारत की गरिमा और अंतरराष्ट्रीय साख काफी ऊपर उठी है. उन्होंने बताया कि इससे पहले देश की छवि उतनी मजबूत नहीं मानी जाती थी. शिव दवे के मुताबिक जिस तरह पीएम मोदी ने देश की छवि को संभाला और जिस तरह भारत ने कोविड जैसे संकट के दौर को संभाला, वह इंडोनेशिया समेत बाकी दुनिया के लिए भी एक बड़ी सीख बनकर सामने आया.
व्यापार से लेकर सामरिक रिश्तों तक बढ़ती नजदीकी
शिव दवे ने बताया कि भारत और इंडोनेशिया धीरे-धीरे एक दूसरे के काफी करीब आए हैं. उनके मुताबिक इसके पीछे व्यापार तो मुख्य वजह है ही, साथ ही दोनों देशों के बीच बना रणनीतिक रिश्ता भी बड़ा कारण है. उन्होंने बताया कि आज दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग और निर्यात को लेकर चर्चाएं चल रही हैं और ऑफ रोड माइनिंग इक्विपमेंट को लेकर भी बातचीत आगे बढ़ी है. शिव दवे के अनुसार इंडोनेशिया लंबे समय से भारत को कोयला और पाम ऑयल की सप्लाई करता आ रहा है, जबकि भारत की तरफ से भी कई रणनीतिक चीजों का निर्यात इंडोनेशिया को होता है. उनके मुताबिक यह व्यापारिक रिश्ता पिछले कई सालों से लगातार मजबूत होता आया है और पीएम मोदी का यह दौरा इसे और आगे ले जाने का मौका बन सकता है.











