गृह मंत्रालय ने जैश-ए-मोहम्मद के एक बड़े हैंडलर को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के तहत आतंकी घोषित कर दिया है। सुरक्षा एजेंसियों ने इस शख्स की पहचान मोहम्मद मुसादिक के तौर पर की है, जिस पर अयोध्या के राम मंदिर परिसर और नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय की रेकी करवाने का आरोप है।
कौन है मोहम्मद मुसादिक
गृह मंत्रालय के अनुसार मोहम्मद मुसादिक पाकिस्तान का रहने वाला है और उसकी उम्र करीब 38 साल बताई गई है। अपनी असली पहचान छिपाने के लिए वह कई फर्जी नामों का इस्तेमाल करता रहा है, जिनमें डॉक्टर, अब्दुल मनन, सज्जाद, हमजा और वाहिद खान शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि मुसादिक लंबे समय से पाकिस्तान की तरफ से आतंकियों को जम्मू-कश्मीर में घुसाने का काम संभालता रहा है। इसके लिए वह सीमावर्ती इलाकों में आतंकियों और उनके मददगारों की मदद से बनाई गई सुरंगों का सहारा लेता था।
रेकी से लेकर हथियार भेजने की साजिश तक
एजेंसियों के मुताबिक मुसादिक ने अयोध्या के राम मंदिर परिसर के अलावा नागपुर में आरएसएस मुख्यालय और हरियाणा के पानीपत में इंडियन ऑयल यानी आईओसीएल की रिफाइनरी की भी रेकी करवाई थी। इन तीनों जगहों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी उसने पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं तक पहुंचाई। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि जैश-ए-मोहम्मद इन जानकारियों के सहारे भारत में बड़ा आतंकी हमला कराने की योजना बना रहा था। इसी साजिश के तहत ड्रोन के जरिए हथियार और गोला-बारूद भारत भेजने की कोशिश भी की गई थी।
घुसपैठ का कमांडर और सुंजवां हमले से जुड़ाव
मुसादिक को जम्मू-कश्मीर के लसियाकोट सेक्टर का लॉन्चिंग कमांडर भी बताया गया है, यानी घुसपैठ की पूरी योजना और निगरानी की जिम्मेदारी उसी के पास थी। सुरक्षा एजेंसियों ने उसका नाम 22 अप्रैल 2022 को जम्मू के सुंजवां में सुरक्षा बलों पर हुए हमले से भी जोड़ा है। यह हमला जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने अंजाम दिया था।
सोशल मीडिया पर युवाओं को बरगलाने का खेल
एजेंसियों के अनुसार मुसादिक सिर्फ घुसपैठ ही नहीं कराता था, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को बहला-फुसलाकर जैश-ए-मोहम्मद से जोड़ने का काम भी करता था। इसके लिए उसने एक अलग साइबर टीम बना रखी थी, जो इंटरनेट के जरिए नई भर्तियां करने और संगठन का प्रचार फैलाने का काम करती थी।
अब यूएपीए के तहत सख्त कार्रवाई
सरकार ने अब मुसादिक को यूएपीए के तहत आतंकी घोषित कर दिया है। इसका मतलब यह है कि भारतीय एजेंसियां उसके नेटवर्क, पैसों के लेन-देन, मददगारों और उससे जुड़े पूरे तंत्र के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई कर सकेंगी। गृह मंत्रालय ने इसे आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा बताया है। इसी अभियान के तहत जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े कई अन्य लोगों को भी हाल में आतंकी घोषित किया जा चुका है, ताकि भारत विरोधी साजिशें रचने वाले पूरे नेटवर्क पर एक साथ शिकंजा कसा जा सके।













