पंजाब के फाजिल्का जिले स्थित जलालाबाद में पुलिस स्टेशन की सीमा के पास हुए हैंड ग्रेनेड विस्फोट मामले में फरार चल रहे मुख्य आरोपी कुलवंत सिंह को सुरक्षा एजेंसियों ने हिरासत में ले लिया है। इस गिरफ्तारी के साथ ही सुरक्षा तंत्र ने सीमा पार से संचालित होने वाले एक संगठित मॉड्यूल की जड़ों तक पहुंचने की प्रक्रिया तेज कर दी है। जांच के दौरान सामने आए विवरणों के अनुसार, कुलवंत के संबंध पाकिस्तान में बैठे शहजाद भट्टी और उमर चाचा नाम के कथित हैंडलर से जुड़े पाए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार यह नेटवर्क केवल विस्फोटक हमलों तक सीमित नहीं था, बल्कि सीमा पार से नशीले पदार्थों की तस्करी तथा हथियारों के अवैध प्रवाह के व्यापक तंत्र का हिस्सा बनकर काम कर रहा था। राजस्थान के श्रीगंगानगर में पाकिस्तान सीमा से भेजी गई करीब 8 किलो आरडीएक्स की बरामदगी में भी कुलवंत का नाम सामने आया है, जिससे जांच एजेंसियों के सामने अंतरराज्यीय और सीमा पार नेटवर्क के पूरे ढांचे को उजागर करने का बड़ा आधार मिला है।
जलालाबाद पुलिस स्टेशन के पास हुआ था देर रात धमाका
जलालाबाद सिटी पुलिस स्टेशन की सीमा के पास 13 सितंबर 2026 की देर रात करीब 1 बजकर 46 मिनट पर अचानक एक हैंड ग्रेनेड फेंका गया था। इस अप्रत्याशित हमले के तुरंत बाद स्थानीय पुलिस ने सतर्कता बरतते हुए एफआईआर संख्या 177 के तहत गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया। मामले की शुरुआती पड़ताल में पुलिस ने तेजी दिखाते हुए गुरप्रीत उर्फ गोरी और मनप्रीत सिंह उर्फ मनी को गिरफ्तार किया था। इन दोनों से मिली जानकारियों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाते हुए 16 सितंबर को रामनदीप कौर और गुरप्रीत सिंह उर्फ विक्की को भी पुलिस ने अपनी गिरफ्त में ले लिया। आगे की पूछताछ में गिरोह के अन्य सहयोगियों सुखविंदर उर्फ सुखा और लखविंदर उर्फ लाड़ी के नाम सामने आए। इन सभी कड़ियों के बीच हमले की पूरी योजना में कुलवंत सिंह की मुख्य भूमिका उभरकर सामने आई थी, जिसकी तलाश में एजेंसियां लगातार दबिश दे रही थीं।
उमर चाचा और शहजाद भट्टी के कथित लिंक की पड़ताल
सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े इनपुट के मुताबिक इस पूरे नेटवर्क के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े कथित हैंडलर उमर चाचा की भूमिका सामने आ रही है। जांच विवरणों में बताया गया है कि उमर चाचा सीमा पार बैठकर भारत में मौजूद गुर्गों से सीधा संपर्क साधता था और उन्हें मादक पदार्थों व विस्फोटकों की आपूर्ति के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश देता था। सुरक्षा हलकों में इस जांच कार्रवाई को 'ऑपरेशन उमर चाचा डी' का संदर्भ दिया गया है, हालांकि अधिकारी अभी इस कथित हैंडलर की वास्तविक पहचान और संगठन में उसके सटीक पद की आधिकारिक पुष्टि के प्रयास कर रहे हैं। दूसरी ओर, पाकिस्तान में मौजूद बताए जा रहे शहजाद भट्टी का नेटवर्क भी इस जांच के केंद्र में है। भारत सरकार द्वारा भट्टी के विरुद्ध गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी यूएपीए के अंतर्गत कार्रवाई किए जाने के बाद से उसके नेटवर्क पर दबाव काफी बढ़ा हुआ है। कुलवंत के जरिए सुरक्षा बल यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि स्थानीय अपराधियों का उपयोग कर सीमा पार से आने वाले सामान की खेप और पैसों का लेन-देन किस प्रकार नियंत्रित किया जा रहा था।
राजस्थान में 8 किलो आरडीएक्स बरामदगी से जुड़ती कड़ियां
इस पूरे प्रकरण का दूसरा अत्यंत संवेदनशील पहलू राजस्थान के सीमावर्ती इलाके से जुड़ा हुआ है। राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के अंतर्गत रावला पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 210/26 के तहत करीब 8 किलो आरडीएक्स बरामद किया गया था। इस मामले में भी कुलवंत सिंह वांछित था और लखविंदर उर्फ लाड़ी का नाम भी इसी जांच में सामने आया था। जांच एजेंसियों के पास उपलब्ध इनपुट के अनुसार विस्फोटकों की यह भारी खेप सीधे पाकिस्तान से भारतीय सीमा में धकेली गई थी। सुरक्षा अधिकारी अब इस पहलू की तकनीकी व भौतिक समीक्षा कर रहे हैं कि श्रीगंगानगर में पकड़े गए आरडीएक्स और जलालाबाद में प्रयुक्त हैंड ग्रेनेड के बीच क्या कोई साझा आपूर्ति श्रृंखला थी। इसके साथ ही राजस्थान में रेलवे ट्रैक पर हुए एक कथित ब्लास्ट से संभावित संबंध के इनपुट भी मिले हैं, यद्यपि इस विशिष्ट कड़ी के संबंध में आधिकारिक व विस्तृत पुष्टि आना अभी शेष है।
आपराधिक अतीत और बठिंडा जेल का नेटवर्क
पंजाब के फिरोजपुर जिले के अलीके गांव का निवासी कुलवंत सिंह पुत्र हरमेश सिंह पहले से ही कानून की नजरों में एक आदतन अपराधी रहा है। राज्य के विभिन्न थानों में उसके खिलाफ 10 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से अधिकांश मुकदमे नशीले पदार्थों की अवैध खरीद और बिक्री से संबंधित हैं। कुलवंत लगभग आठ महीने तक बठिंडा जेल में बंद रहा था और अगस्त 2026 में ही रिहा होकर बाहर आया था। जांचकर्ताओं का मानना है कि बठिंडा जेल में बंद रहने के दौरान ही कुलवंत का संपर्क सीमा पार शहजाद भट्टी के सिंडिकेट से जुड़े लोगों के साथ हुआ था। जेल से रिहा होने के तुरंत बाद वह भूमिगत गतिविधियों में पूरी तरह सक्रिय हो गया और कुछ ही सप्ताह के भीतर जलालाबाद की घटना घटित हो गई।
कड़ी धाराओं में केस दर्ज, आगे की जांच का रुख
सुरक्षा एजेंसियों ने दोनों प्रमुख मामलों में अत्यंत कठोर कानूनी धाराएं लागू की हैं। जलालाबाद विस्फोट मामले में विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 3, 4 और 5 तथा यूएपीए की धारा 15, 16, 18, 18बी और 20 के तहत अभियोग दर्ज हैं। इसके अतिरिक्त सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम और आर्म्स एक्ट की धाराएं भी शामिल की गई हैं। वहीं राजस्थान के रावला थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 210/26 में भी विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और यूएपीए की सख्त धाराओं का समावेश है। कुलवंत सिंह की हिरासत के बाद पुलिस का मुख्य ध्यान नार्को-टेरर गठजोड़ के वित्तीय तंत्र को ध्वस्त करने पर है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि ड्रग्स के अवैध कारोबार से जुटाया गया धन किस प्रकार विस्फोटकों की खरीद और आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने में लगाया जा रहा था।





















