दिवाली और उसके तुरंत बाद आने वाले छठ महापर्व को लेकर अपने घरों की तरफ लौटने वाले प्रवासियों के लिए सफर एक बड़ी चुनौती बन गया है। काम और रोजगार के सिलसिले में दूसरे राज्यों में रहने वाले लोग जब त्योहार मनाने अपने गृह राज्य बिहार जाने की कोशिश कर रहे हैं, तो उन्हें सीटों की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। जिन्होंने पहले से रिजर्वेशन करा भी लिया है, उन्हें भी अपनी सीट तक पहुंचने के लिए भारी धक्का-मुक्की और भीड़ से जूझना पड़ रहा है।
बेंगलुरू से बिहार जाने वाली स्लीपर बस के बाहर भारी जमावड़ा
बेंगलुरू से बिहार के लिए रवाना होने वाली एक स्लीपर बस के सामने का दृश्य बेहद तनावपूर्ण देखने को मिला। सोशल मीडिया पर सामने आए दृश्यों में साफ दिखा कि पहले से पूरी तरह बुक हो चुकी इस बस के बाहर यात्रियों का ऐसा भारी हुजूम उमड़ पड़ा, जैसा आमतौर पर किसी सामान्य रोडवेज बस स्टैंड पर त्योहारी दिनों में देखने को मिलता है। बस में दाखिल होने को लेकर मुसाफिरों के बीच तीखी नोकझोंक और जुबानी तकरार शुरू हो गई।
भीड़ में खड़े बहुत से यात्री इस उम्मीद में घंटों बस को घेरे रहे कि शायद किसी कंफर्म टिकट वाले यात्री के न आने पर कोई खाली सीट मिल सके। वे मौके पर ही तुरंत पूरा किराया चुकाकर बस में सवार होने की ताक में थे। घर पहुंचने की बेताबी के कारण लोग किसी भी तरह यात्रा पूरी करने के लिए बेबस नजर आए।
ट्रेनों में जगह नहीं, फ्लाइट और निजी बसों के किराए में बेतहाशा उछाल
त्योहारों के इस मौसम में सार्वजनिक और निजी परिवहन दोनों पर जबर्दस्त दबाव बना हुआ है। केवल लंबी दूरी की अंतरराज्यीय बसें ही नहीं, बल्कि अन्य प्रमुख मार्गों पर भी हालात गंभीर हैं। पुणे और नागपुर के बीच यात्रा करने वालों के सामने भी ऐसा ही बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इस रूट पर नियमित ट्रेनों में सीटें पूरी तरह फुल हो चुकी हैं, जिसके चलते लोग अन्य विकल्पों की तलाश कर रहे हैं।
विकल्पों की कमी का फायदा उठाते हुए निजी ट्रैवल ऑपरेटरों और एयरलाइंस ने किराए कई गुना बढ़ा दिए हैं। पुणे से नागपुर के बीच हवाई टिकट का खर्च 19000 रुपये तक पहुंच गया है। वहीं सड़क मार्ग पर लगभग 700 किलोमीटर की दूरी तय करने वाली निजी बसों में एक सीट के लिए 7000 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। अत्यधिक मांग और सीमित साधनों के कारण अपने परिवारों के पास पहुंचने की कोशिश कर रहे आम यात्रियों की जेब पर भारी बोझ पड़ रहा है।

















