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जमशेदपुर की सड़कों पर तांगा लेकर निकलते हैं फिरोज, घोड़े शेरा संग अटूट रिश्ते ने खींचा शहर का ध्यानझारखंड
24 सित॰ 2026, 10:17 am (21 घंटे पहले)· 1

जमशेदपुर की सड़कों पर तांगा लेकर निकलते हैं फिरोज, घोड़े शेरा संग अटूट रिश्ते ने खींचा शहर का ध्यान

उत्तर प्रदेश से करीब चार साल पहले जमशेदपुर लाया गया घोड़ा शेरा अब फिरोज का सिर्फ काम का जरिया नहीं, बल्कि एक पारिवारिक साथी और शहर की खास पहचान बन चुका है.

जमशेदपुर के रास्तों पर जब एक तांगा गुजरता है, तो राहगीरों की नजरें खुद-ब-खुद उस पर जाकर टिक जाती हैं. आम तौर पर दो इंसानों के आपसी तालमेल और वफादारी की मिसालें तो खूब दी जाती हैं, मगर यहां एक इंसान और बेजुबान जानवर के बीच पनपे अनोखे रिश्ते ने हर किसी को विस्मय में डाल दिया है. यह दास्तान है तांगा संचालक फिरोज और उनके घोड़े शेरा की, जिनका आपसी तालमेल आज पूरे शहर में खासा लोकप्रिय हो चुका है. फिरोज जहां भी शेरा के साथ पहुंचते हैं, वहां लोग इस जोड़ी को निहारने के लिए कुछ पल जरूर ठहरते हैं. खास पहलू यह है कि फिरोज केवल शेरा के मालिक या संचालक भर नहीं हैं, बल्कि दोनों के बीच एक बेहद गहरा भावनात्मक रिश्ता कायम हो चुका है.

उत्तर प्रदेश से जमशेदपुर तक का सफर और पहचान का बनना

इस अटूट रिश्ते की नींव आज से करीब चार साल पहले पड़ी थी. फिरोज बताते हैं कि वह शेरा को उत्तर प्रदेश से अपने साथ लेकर जमशेदपुर आए थे. उस वक्त फिरोज ने खुद भी यह कल्पना नहीं की होगी कि यह घोड़ा आने वाले समय में उनके जीवन और पहचान का इतना अहम हिस्सा बन जाएगा. शुरुआती दौर में शेरा के साथ वक्त गुजारना और उसकी देखभाल करना उनके रोज के काम-काज का एक सामान्य हिस्सा मात्र था. मगर जैसे-जैसे दिन बीतते गए, दोनों के बीच का आत्मीय जुड़ाव लगातार मजबूत होता गया. आज स्थिति यह है कि शेरा अपने साथी फिरोज की हर पुकार, आवाज के उतार-चढ़ाव और हाथ के सूक्ष्म इशारों को बिना किसी झिझक के आसानी से भांप लेता है.

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खानपान, आराम और दिनचर्या से उपजा गहरा भरोसा

जानवरों के पालन-पोषण को लेकर फिरोज का फलसफा काफी स्पष्ट और मानवीय है. फिरोज का कहना है कि किसी घोड़े को पालने का अर्थ केवल उसे पेट भरने के लिए दाना-पानी मुहैया कराना भर नहीं होता. उसकी सेहत, उचित खानपान, जरूरी आराम और शारीरिक देखभाल की हर छोटी-बड़ी जरूरत को संजीदगी से समझना पड़ता है. वह शेरा के साथ प्रतिदिन एक अच्छा खासा वक्त गुजारते हैं और उसकी शारीरिक स्थिति व जरूरतों पर बारीकी से नजर रखते हैं. यही नियमित देखरेख और स्नेह भरी दिनचर्या दोनों को एक-दूसरे के बेहद करीब ले आई है. जब भी फिरोज उसे नाम से पुकारते हैं, शेरा तुरंत उनकी दिशा में मुड़कर देखता है और दिए जाने वाले हर संकेत को समझने की कोशिश में जुट जाता है.

सड़क पर उमड़ता कौतूहल और बच्चों का आकर्षण

जब भी फिरोज अपने तांगे को लेकर जमशेदपुर के बाजारों और मुहल्लों से गुजरते हैं, तो शेरा को देखने के लिए अक्सर लोग अपनी रफ्तार थाम लेते हैं. खासकर छोटे बच्चों में शेरा को नजदीक से देखने और सहलाने का जबरदस्त उत्साह नजर आता है. कई स्थानीय नागरिक और बच्चे तो रुककर उसके साथ यादगार तस्वीरें भी खिंचवाते हैं. फिरोज इस बात को खुलकर स्वीकार करते हैं कि शेरा से उनका ताल्लुक अब रोजी-रोटी या पेशे तक महदूद नहीं रहा है. वह शेरा को किसी मवेशी की तरह रखने के बजाय अपने ही परिवार के एक अभिन्न सदस्य की तरह मान-सम्मान और देखभाल देते हैं. यही आत्मीयता इस जोड़ी को पूरे शहर में चर्चा और कौतूहल का केंद्र बनाए रखती है.

जमशेदपुर की घुड़सवारी परंपरा में एक अलग अध्याय

जमशेदपुर में घोड़ों को पालने और पारंपरिक घुड़सवारी का पुराना इतिहास और चलन रहा है. यहां के वैवाहिक आयोजनों, बारात और अन्य सामाजिक समारोहों में अरसे से घोड़े-घोड़ियों की मांग बनी रहती है. लेकिन फिरोज और शेरा का यह मामला उन पारंपरिक कामकाजी दायरों से बिल्कुल जुदा है. यहां सवाल केवल तांगा खींचने या सवारी ढोने का नहीं है, बल्कि उस संवेदनशील बंधन का है जो एक इंसान और जानवर के बीच विश्वास के दम पर तैयार हुआ है. इस रिश्ते को प्रत्यक्ष देखने वाले लोग स्वाभाविक रूप से कह उठते हैं कि सच्ची वफादारी और दोस्ती केवल इंसानों तक सीमित नहीं होती, बल्कि बेजुबान भी प्यार की जुबान को बखूबी समझते हैं.

सवाल-जवाब

फिरोज और शेरा कौन हैं और वे क्यों चर्चा में हैं?
फिरोज जमशेदपुर के एक तांगा संचालक हैं और शेरा उनका घोड़ा है, जिनकी अनोखी और गहरी दोस्ती पूरे शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है.
फिरोज शेरा को जमशेदपुर कब और कहां से लेकर आए थे?
फिरोज करीब चार साल पहले शेरा को उत्तर प्रदेश से अपने साथ जमशेदपुर लेकर आए थे.
शेरा और फिरोज के बीच आपसी तालमेल कैसा है?
शेरा फिरोज की आवाज और हाथ के इशारों को आसानी से समझ लेता है और उनके पुकारते ही उनकी ओर ध्यान देने लगता है.
सड़क पर निकलते वक्त इस जोड़ी को देखकर लोगों की क्या प्रतिक्रिया होती है?
जमशेदपुर की सड़कों पर लोग शेरा को देखने के लिए रुक जाते हैं और बच्चे उत्साहपूर्वक उसके साथ तस्वीरें खिंचवाते हैं.
फिरोज शेरा की देखभाल किस तरह करते हैं?
फिरोज उसके खानपान, आराम और स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखते हैं और उसे केवल काम का जानवर न मानकर परिवार के सदस्य की तरह रखते हैं.
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टिप्पणियाँ 5

Arshdeep Ahluwalia@arshdeep-ahluwalia·19 घंटे पहले

इंसान और जानवर के बीच का ऐसा प्यार देखकर दिल खुश हो गया, वाकई बहुत प्यारी जोड़ी है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·19 घंटे पहले

जमशेदपुर की सड़कों पर तांगे वाले फिरोज और उनके घोड़े शेरा को देखकर मुझे अपने बचपन के वे दिन याद आ गए जब हमारे मोहल्ले में अक्सर ऐसा नज़ारा दिखता था। अब तो शहर बदल गए हैं और ऐसे साथी बहुत कम ही देखने को मिलते हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·19 घंटे पहले

अरे अर्जुन भाई, सच कहा आपने! आजकल ऐसे नज़ारे वाकई कम दिखते हैं। क्या फिरोज भाई आज भी उत्तर प्रदेश के अपने पुराने गांव के संपर्क में हैं?

Karan Malhotra@karan-malhotra·20 घंटे पहले

इंसान और जानवर के बीच ऐसा प्यार देखकर वाकई दिल खुश हो जाता है, पर मेरे मन में बस एक बात आई कि फिरोज भाई ने शेरा का नाम शेरा ही क्यों रखा और अगर कभी ऐसा दिन आया जब फिरोज भाई तांगा चलाना छोड़ देंगे, तो फिर वो शेरा की देखभाल कैसे करेंगे?

Rohan Verma@rohan-verma·20 घंटे पहले

करण भाई, नाम तो हर कोई रख लेता है, पर बात सिर्फ देखभाल की नहीं है। जो घोड़ा चार साल से शहर की भागदौड़ में साथ है, वो आगे क्या करेगा, ये सोचने वाली बात है।

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