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पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर योगी आदित्यनाथ ने दी श्रद्धांजलि, अंत्योदय और एकात्म मानववाद के विचार को किया यादनेता जी
25 सित॰ 2026, 6:30 am (1 घंटे पहले)· 0

पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर योगी आदित्यनाथ ने दी श्रद्धांजलि, अंत्योदय और एकात्म मानववाद के विचार को किया याद

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर उन्हें नमन करते हुए अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक विकास पहुंचाने के उनके चिंतन को रेखांकित किया।

भारतीय जनसंघ के प्रमुख संस्थापक सदस्य और एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर उन्हें देशभर में श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जा रहा है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर संदेश साझा करते हुए पंडित दीनदयाल उपाध्याय को एक प्रखर राष्ट्रचिंतक बताते हुए नमन किया और सामाजिक उत्थान में उनके योगदान को रेखांकित किया।

योगी आदित्यनाथ का संदेश और विचार दर्शन

योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में कहा कि श्रद्धेय पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों पर आधारित प्रगति की एक स्पष्ट अवधारणा देश के सामने रखी। उन्होंने रेखांकित किया कि दीनदयाल उपाध्याय का संपूर्ण जीवन दर्शन समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की भलाई और सम्मान को समर्पित रहा। उनके द्वारा प्रतिपादित अंत्योदय की सोच वास्तव में अंतिम छोर पर खड़े नागरिक तक शासन और विकास के लाभ सुनिश्चित करने का संकल्प प्रस्तुत करती है।

कौन थे पंडित दीनदयाल उपाध्याय

पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ विचारक और कुशल संगठनकर्ता थे। वे भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे और बाद में संगठन के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी संभाली। उन्होंने सनातन परंपरा के शाश्वत मूल्यों को आधुनिक युग की जरूरतों के अनुरूप व्याख्यायित करते हुए 'एकात्म मानववाद' का अनूठा दर्शन प्रस्तुत किया। वे एक सशक्त, स्वावलंबी और समावेशी राष्ट्र निर्माण के प्रबल पक्षधर थे, जिसमें विकास के केंद्र में केवल आर्थिक आंकड़े नहीं बल्कि मानव कल्याण प्रमुख स्थान रखता है।

राजनीतिक और सामाजिक कार्यों के साथ-साथ पंडित दीनदयाल उपाध्याय का साहित्य एवं लेखन से भी गहरा जुड़ाव था। उन्होंने हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में कई गंभीर वैचारिक लेख, पुस्तकें और टिप्पणियां लिखीं, जो उस समय की प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित हुईं। उनका जीवन सादगी, बौद्धिक निष्ठा और राष्ट्र सेवा का एक जीवंत उदाहरण माना जाता है।

अंत्योदय और एकात्म मानववाद की प्रासंगिकता

दीनदयाल उपाध्याय द्वारा प्रस्तुत अंत्योदय का सिद्धांत बताता है कि किसी भी देश की आर्थिक संपन्नता और प्रगति का पैमाना उसके सबसे संपन्न वर्ग से नहीं, बल्कि समाज के सबसे निर्धन और वंचित व्यक्ति के जीवन स्तर से तय होना चाहिए। उनके अनुसार पूंजीवाद और साम्यवाद दोनों ही मानव जीवन के संपूर्ण स्वरूप को संबोधित करने में असमर्थ रहे हैं, जबकि एकात्म मानववाद शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा के समन्वित विकास की बात करता है। आज भी विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं की रूपरेखा तय करते समय उनके इसी दर्शन को प्रेरणास्रोत माना जाता है।

जनता की प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री के इस संदेश पर नागरिकों ने बड़े पैमाने पर अपनी प्रतिक्रियाएं साझा कीं। कई लोगों ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को नमन करते हुए उनके आदर्शों को वास्तविक शासन प्रणाली में उतारने पर बल दिया। वहीं कुछ नागरिकों ने इस अवसर पर जनसमस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित कराते हुए ग्रामीण अंचलों में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित कराने और प्रशासनिक निगरानी मजबूत करने की मांग भी उठाई।

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सवाल-जवाब

योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया पर क्या संदेश दिया?
योगी आदित्यनाथ ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर उन्हें नमन करते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने के उनके विचार को याद किया।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय कौन थे?
वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चिंतक, संगठनकर्ता और भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य व अध्यक्ष थे।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय का प्रमुख दार्शनिक विचार क्या था?
उन्होंने 'एकात्म मानववाद' और 'अंत्योदय' का सिद्धांत दिया, जिसमें मनुष्य के समग्र विकास और अंतिम पंक्ति के व्यक्ति के कल्याण पर बल दिया गया है।
साहित्य के क्षेत्र में उनका क्या योगदान रहा?
उन्होंने हिंदी और अंग्रेजी में कई गंभीर वैचारिक लेख और पुस्तकें लिखीं, जो विभिन्न प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित हुईं।
मुख्यमंत्री की पोस्ट पर लोगों की क्या प्रतिक्रिया रही?
नागरिकों ने पंडित जी को श्रद्धांजलि अर्पित की, वहीं कुछ लोगों ने ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती जैसी जनसमस्याओं के समाधान की मांग की।
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टिप्पणियाँ 5

Karan Malhotra@karan-malhotra·14 मिनट पहले

दीनदयाल जी के अंत्योदय और एकात्म मानववाद के विचार आज भी समाज के आखिरी इंसान तक मदद पहुंचाने की राह दिखाते हैं।

Sophie Laurent@sophie-laurent·37 मिनट पहले

नेताओं की तरफ से ऐसे विचार याद करना ठीक है, पर ज़मीन पर अंतिम व्यक्ति तक योजनाएं पहुंचते-पहुंचते बीच में ही कितनी रुकावटें आ जाती हैं, यह कोई नहीं बताता। बस कागज़ों पर बातें अच्छी लगती हैं।

Neha Verma@neha-verma·37 मिनट पहले

सोफी, बात तो सही है आपकी, लेकिन कागज़ों पर बनी योजनाएं भी अगर न हों तो ज़मीन पर कुछ नहीं पहुंचेगा। कम से कम सोच तो अच्छी है।

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·55 मिनट पहले

दीनदयाल जी के एकात्म मानववाद और अंत्योदय की बातें सुनने में अच्छी लगती हैं, पर ज़मीनी हक़ीक़त में योजनाओं का फ़ायदा आज भी हर अंतिम व्यक्ति तक पूरी तरह नहीं पहुँच पा रहा है। सिर्फ़ विचारों को याद करने से काम नहीं चलेगा।

Arshdeep Ahluwalia@arshdeep-ahluwalia·55 मिनट पहले

लक्ष्मी जी, आपकी बात बिल्कुल सही है कि ज़मीन पर बहुत काम होना बाक़ी है, लेकिन क्या आपको लगता है कि प्रशासन को योजनाओं की पहुँच जाँचने के लिए किसी नए मैकेनिज्म की ज़रूरत है?

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