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झारखंड की नेहा ने यूट्यूब से सीखकर खड़ा किया पेपर आर्ट का बिजनेस, अब इंस्टाग्राम से कर रही हैं कमाईझारखंड
18 सित॰ 2026, 11:44 am (7 दिन पहले)· 0

झारखंड की नेहा ने यूट्यूब से सीखकर खड़ा किया पेपर आर्ट का बिजनेस, अब इंस्टाग्राम से कर रही हैं कमाई

बोकारो की रहने वाली 19 वर्षीय नेहा बरनवाल क्विलिंग आर्ट के जरिए पेपर से खूबसूरत कलाकृतियां और हैंडीक्राफ्ट आइटम बनाती हैं। वह सोशल मीडिया और स्थानीय स्टॉल के माध्यम से अपने इस हुनर को कारोबार में बदल चुकी हैं।

झारखंड के बोकारो सेक्टर-4 की रहने वाली 19 वर्षीय नेहा बरनवाल आज अपनी मेहनत और हुनर के दम पर एक सफल उद्यमी बन चुकी हैं। वह क्विलिंग आर्ट तैयार करती हैं, जिसमें रंग-बिरंगे कागजों की बेहद पतली पट्टियों को करीने से मोड़कर आकर्षक कलाकृतियां बनाई जाती हैं। अपनी इस कला को केवल शौक तक सीमित न रखते हुए उन्होंने इसे एक полноцен कारोबार का रूप दे दिया है और इंस्टाग्राम के माध्यम से अपने उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री कर रही हैं। इसके साथ ही, वह समाज की अन्य महिलाओं के लिए भी एक मिसाल पेश कर रही हैं और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

कोरोना काल में पड़ी क्विलिंग आर्ट की नींव

नेहा ने एक बातचीत के दौरान साझा किया कि उन्हें इस अनोखी कला से जुड़ने का अवसर साल 2020 में मिला था, जब वह मात्र 13 वर्ष की थीं। उस समय कोविड-19 महामारी के कारण देश भर में लॉकडाउन लगा हुआ था और घर में रहते हुए उन्होंने यूट्यूब के माध्यम से क्विलिंग आर्ट सीखने का फैसला किया। शुरुआती दिनों में उन्होंने इस कला पर खूब प्रयोग किए और विभिन्न डिज़ाइनों का अभ्यास किया। उन्होंने सबसे पहले भगवान गणेश की एक मनमोहक कलाकृति तैयार की थी, जिसे उनके परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और परिचितों ने बेहद सराहा। इस शुरुआती सफलता और प्रोत्साहन ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया, जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और नए-नए डिज़ाइनों पर काम करना शुरू कर दिया।

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भगवान की मूर्तियों से लेकर कार्टून कैरेक्टर तक का सफर

आज नेहा क्विलिंग आर्ट के जरिए विभिन्न प्रकार की शानदार कलाकृतियां बना रही हैं, जिनमें भगवान गणेश, भगवान जगन्नाथ और लोकप्रिय कार्टून कैरेक्टर प्रमुख रूप से शामिल हैं। जब उनकी इन कलाकृतियों को लोगों से व्यापक सराहना मिलने लगी, तो उन्होंने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अमेज़न के जरिए भी अपने उत्पादों को बेचना शुरू किया था। उनके अनुसार, उन्होंने एक वर्ष के भीतर लगभग 2 लाख रुपये का कारोबार किया था, लेकिन कुछ तकनीकी समस्याओं के चलते उन्हें उस प्लेटफॉर्म पर अपना काम बंद करना पड़ा। हालांकि, इससे उनके हौसले पर कोई असर नहीं पड़ा और अब वह इंस्टाग्राम के आधिकारिक माध्यम से देश भर के ग्राहकों तक अपने बेहतरीन डिज़ाइन पहुंचा रही हैं।

300 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक की किफायती रेंज

वर्तमान में नेहा इंस्टाग्राम के जरिए अपने हैंडीक्राफ्ट उत्पादों की बिक्री पूरे देश में कर रही हैं। उनके पास ग्राहकों के लिए 300 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक की कीमत के विभिन्न प्रकार के आकर्षक डिज़ाइन उपलब्ध हैं। इनमें बच्चों और युवाओं को लुभाने वाली डॉल्स और कार्टून कैरेक्टर वाले डिज़ाइन विशेष रूप से लोकप्रिय हैं। इसके अलावा, वह महिलाओं के लिए कागज से बनी खूबसूरत सनफ्लावर ईयररिंग्स भी तैयार करती हैं, जो बाजार में काफी पसंद की जा रही हैं। इन ईयररिंग्स की सबसे बड़ी खूबी यह है कि कागज से बने होने के कारण ये बेहद हल्की और पर्यावरण के अनुकूल यानी इको-फ्रेंडली होती हैं।

पढ़ाई के साथ संतुलन और हर महीने सैकड़ों ऑर्डर

अपनी कम उम्र के बावजूद नेहा अपनी शैक्षणिक पढ़ाई और व्यावसायिक कामकाज के बीच बेहतरीन तालमेल बिठाकर चल रही हैं। उन्हें क्विलिंग आर्ट के लिए लगातार नए ऑर्डर मिलते रहते हैं और मौजूदा समय में उन्हें हर महीने लगभग 100 ऑर्डर प्राप्त होते हैं। इन सभी उत्पादों में धार्मिक आस्था से जुड़े आर्टवर्क यानी भगवान गणेश और भगवान जगन्नाथ की कलाकृतियों की मांग सबसे अधिक बनी रहती है, जिन्हें लोग बहुत चाव से खरीदते हैं।

बोकारो में लगता है विशेष स्टॉल

ऑनलाइन माध्यमों के अलावा नेहा अपने शहर बोकारो के स्थानीय ग्राहकों तक भी अपने उत्पाद आसानी से पहुंचाती हैं। वह शहर के एक प्रमुख मॉल के सामने बुधवार, गुरुवार और शनिवार-रविवार की शाम को अपना विशेष स्टॉल लगाती हैं। इस स्टॉल पर आकर स्थानीय ग्राहक उनके हाथों से बने विभिन्न हैंडीक्राफ्ट आइटम को सीधे अपनी आंखों से देख सकते हैं और अपनी पसंद के अनुसार खरीद सकते हैं।

भविष्य के बड़े सपने और बुलंद इरादे

नेहा का अगला लक्ष्य आने वाले समय में अपने इस रचनात्मक काम को एक विशाल और स्थापित बिजनेस में बदलने का है। वह भविष्य में एक कामयाब बिजनेस वुमन बनने की इच्छा रखती हैं और अपने इस हस्तशिल्प कारोबार को और अधिक बड़े स्तर तक ले जाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही हैं।

सवाल-जवाब

नेहा बरनवाल कौन हैं और वह क्या काम करती हैं?
नेहा बरनवाल झारखंड के बोकारो की रहने वाली 19 वर्षीय युवती हैं, जो क्विलिंग आर्ट के जरिए पेपर से खूबसूरत कलाकृतियां और हैंडीक्राफ्ट आइटम बनाती हैं।
नेहा ने क्विलिंग आर्ट कहां से सीखी थी?
नेहा ने साल 2020 में कोरोना काल के दौरान यूट्यूब के माध्यम से क्विलिंग आर्ट बनाना सीखा था।
नेहा अपने बनाए प्रोडक्ट्स की बिक्री कहां करती हैं?
वह वर्तमान में इंस्टाग्राम के माध्यम से देश भर में अपने उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री करती हैं और बोकारो में मॉल के सामने स्टॉल भी लगाती हैं।
नेहा के बनाए उत्पादों की कीमत क्या है?
उनके हैंडीक्राफ्ट आइटम की कीमत 300 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक है।
उनके कौन से उत्पादों की सबसे ज्यादा मांग है?
भगवान गणेश और भगवान जगन्नाथ से जुड़े आर्टवर्क की मांग सबसे ज्यादा रहती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Rohan Gupta@rohan-gupta·6 दिन पहले

यह रिपोर्ट भारत के छोटे शहरों में सोशल कॉमर्स और डिजिटल क्रिएटर इकॉनमी के उभार को रेखांकित करती है। यूट्यूब जैसे वीडियो प्लेटफॉर्म्स से हुनर सीखने के बाद इंस्टाग्राम के जरिए सीधे ग्राहकों तक पहुँच बनाना पारंपरिक ई-कॉमर्स की तकनीकी जटिलताओं का एक कारगर विकल्प बन रहा है। यह मामला दर्शाता है कि टियर-2 और टियर-3 शहरों के माइक्रो-उद्यमी बिना किसी बड़े शुरुआती बुनियादी ढांचे के डिजिटल टूल्स के दम पर डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) मॉडल को सफलतापूर्वक अपना रहे हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·6 दिन पहले

यह खबर भारत के छोटे शहरों में सोशल कॉमर्स और डिजिटल माइक्रो-एंटरप्रेन्योरशिप के बढ़ते रुझान को दर्शाती है। यूट्यूब से कौशल सीखकर इंस्टाग्राम के ज़रिए सीधे ग्राहकों तक पहुंचना डी2सी (D2C) मॉडल की ताकत दिखाता है। हालांकि, तकनीकी वजहों से ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से हटना यह संकेत देता है कि टियर-2 और टियर-3 शहरों के युवा उद्यमियों को सही डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और प्लेटफॉर्म ट्रेनिंग की सख्त ज़रूरत है, ताकि उनका बिजनेस केवल सोशल मीडिया ऑर्डर्स तक सीमित न रहकर व्यवस्थित रूप से स्केल कर सके।

Arjun Mehta@arjun-mehta·6 दिन पहले

रविकेश की बात को लोक नीति के दृष्टिकोण से देखें तो यह मामला डिजिटल इंडिया की ज़मीनी क्षमता को दर्शाता है, लेकिन साथ ही संस्थागत सहायता की कमी को भी उजागर करता है। टियर-2 और टियर-3 शहरों के युवा उद्यमी जब डिजिटल बाज़ार में उतरते हैं, तो उन्हें केवल कनेक्टिविटी ही नहीं, बल्कि एमएसएमई (MSME) नीतियों के तहत अनुपालन, लॉजिस्टिक्स और ई-कॉमर्स ट्रेनिंग का ठोस समर्थन मिलना चाहिए। यदि सरकारी और नीतिगत स्तर पर इन सूक्ष्म-उद्यमियों को औपचारिक दिशा-निर्देश और हैंडहोल्डिंग मिले, तो ऐसे प्रयास आत्मनिर्भर भारत के सपने को व्यापक और टिकाऊ आर्थिक विकास में बदल सकते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·6 दिन पहले

डिजिटल माध्यमों से छोटे व्यवसायों का विस्तार जितना सराहनीय है, कानून-व्यवस्था और साइबर सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह नए जोखिम भी लाता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वाले सूक्ष्म उद्यमियों को साइबर धोखाधड़ी, फर्जी ऑर्डर, भुगतान से जुड़ी ठगी और बौद्धिक संपदा अधिकारों के उल्लंघन जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। महिला उद्यमियों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल साक्षरता के साथ-साथ कानूनी जागरूकता और साइबर अपराध रोकथाम तंत्र को मजबूत करना बेहद जरूरी है।

Rohan Verma@rohan-verma·6 दिन पहले

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए छोटे शहरों से उभरती यह उद्यमशीलता बेहद प्रेरणादायक है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ऐसे अनौपचारिक सूक्ष्म उद्योगों को टिकाऊ बनाने के लिए संस्थागत नीतिगत सहयोग की सख्त आवश्यकता है। जब ये उद्यमी बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से हटकर केवल सोशल मीडिया पर निर्भर होते हैं, तो उन्हें एमएसएमई पंजीकरण, वित्तीय साक्षरता और स्थानीय हस्तशिल्प प्रोत्साहन योजनाओं से जोड़ना शासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। छोटे कस्बों में सुरक्षित डिजिटल व्यापार और साइबर सुरक्षा सहायता तंत्र मिलने से ही ऐसी प्रतिभाएं लंबे समय तक आत्मनिर्भर बनी रह सकती हैं।

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