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झारखंड को-ऑपरेटिव बैंक घोटाला मामला: कारोबारी संजय कुमार डालमिया के ठिकानों पर ईडी की बड़ी छापेमारीझारखंड
18 सित॰ 2026, 11:14 am (7 दिन पहले)· 1

झारखंड को-ऑपरेटिव बैंक घोटाला मामला: कारोबारी संजय कुमार डालमिया के ठिकानों पर ईडी की बड़ी छापेमारी

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने झारखंड स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक के वित्तीय घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में झारखंड और ओडिशा के कुल सात ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई कारोबारी संजय कुमार डालमिया और बैंक अधिकारियों की कथित मिलीभगत से जुड़े धोखाधड़ी के मामले में की जा रही है।

रांची में प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने झारखंड स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक से जुड़े कथित वित्तीय घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। जांच एजेंसी की रांची इकाई ने झारखंड और ओडिशा राज्यों में फैले कुल सात अलग-अलग ठिकानों पर तलाशी और जब्ती अभियान शुरू किया है। इस पूरी कार्रवाई को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की धारा सत्रह के प्रावधानों के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है। मूल मामला बैंक की सरायकेला शाखा में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर हुई धोखाधड़ी और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है।

कारोबारी संजय कुमार डालमिया की भूमिका पर नजर

विस्तृत जांच के दौरान इस पूरे प्रकरण में व्यवसायी संजय कुमार डालमिया का नाम प्रमुखता से सामने आया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, उन पर यह गंभीर आरोप है कि उन्होंने बैंक के उस समय के जिम्मेदार अधिकारियों के साथ मिलकर कथित रूप से सांठगांठ की। इस कथित मिलीभगत के जरिए बैंक को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया, जिसकी तह तक जाने के लिए अब केंद्रीय एजेंसी की टीमें सक्रिय हो गई हैं।

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दस्तावेजों की जांच और साक्ष्यों की तलाश

छापेमारी की इस लंबी कार्रवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय की टीमें मौके से जुड़े तमाम अहम दस्तावेजों, वित्तीय कागजातों और अन्य पुख्ता सबूतों की बारीकी से जांच कर रही हैं। आवश्यकता पड़ने पर इन संदिग्ध दस्तावेजों को कानूनी प्रक्रिया के तहत जब्त भी किया जा रहा है ताकि वित्तीय अनियमितताओं के पुख्ता प्रमाण जुटाए जा सकें। जांच एजेंसी इस बात का भी गहराई से पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस कथित धोखाधड़ी के जरिए जुटाई गई भारी-भरकम रकम का इस्तेमाल किस प्रकार किया गया और इसका लेनदेन किन खातों तथा माध्यमों से हुआ।

सवाल-जवाब

प्रवर्तन निदेशालय ने यह कार्रवाई किस मामले में की है?
प्रवर्तन निदेशालय ने झारखंड स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक के कथित वित्तीय घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में यह कार्रवाई की है।
छापेमारी की यह कार्रवाई किन राज्यों में चल रही है?
यह सर्च और सीजर ऑपरेशन झारखंड और ओडिशा राज्यों में कुल सात ठिकानों पर चलाया जा रहा है।
इस मामले में किस कारोबारी का नाम प्रमुखता से आया है?
जांच के दौरान कारोबारी संजय कुमार डालमिया का नाम सामने आया है जिन पर बैंक अधिकारियों के साथ मिलीभगत का आरोप है।
यह मामला बैंक की किस शाखा से जुड़ा हुआ है?
यह पूरा मामला झारखंड स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक की सरायकेला शाखा में हुई कथित धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है।
यह कार्रवाई कानून के किस प्रावधान के तहत की जा रही है?
यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की धारा सत्रह के तहत की जा रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·6 दिन पहले

सहकारी बैंकों में वित्तीय अनियमितताओं के मामले अक्सर स्थानीय स्तर पर अधिकारियों और कारोबारियों की सांठगांठ की परतें खोलते हैं। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धारा 17 के तहत की जा रही इस तरह की छापेमारी का मुख्य मकसद केवल दस्तावेज जुटाना नहीं, बल्कि अवैध कमाई से बनाई गई संपत्तियों की पहचान कर उन्हें कुर्क करने का आधार तैयार करना होता है। इस मामले में जांच एजेंसी के लिए सबसे बड़ी चुनौती फंड ट्रेल (पैसे की आवाजाही) को साबित करना होगी। आने वाले दिनों में फॉरेंसिक ऑडिट की रिपोर्ट और आरोपी अधिकारियों की पूछताछ से बैंक के आंतरिक ऑडिट सिस्टम की नाकामी भी उजागर हो सकती है, जो अदालत में केस को मजबूती देने के लिए बेहद अहम साबित होगी।

Rohan Verma@rohan-verma·6 दिन पहले

सहकारी बैंकों में होने वाले घोटाले केवल आर्थिक अपराध नहीं हैं, बल्कि ये ग्रामीण और क्षेत्रीय बैंकिंग व्यवस्था में जनता के विश्वास को गहरा धक्का पहुँचाते हैं। झारखंड और ओडिशा जैसे दो राज्यों में फैले इस नेटवर्क की जाँच में ईडी की कार्रवाई यह स्पष्ट करती है कि वित्तीय धोखाधड़ी के तार अंतरराज्यीय स्तर पर जुड़े हो सकते हैं। करण की बात को आगे बढ़ाते हुए, इस मामले में असली परीक्षा यह होगी कि क्या सहकारिता विभाग और प्रशासनिक स्तर पर निगरानी तंत्र की खामियों को सुधारा जाता है या नहीं, क्योंकि जब तक संस्थागत ढिलाई रहेगी, तब तक केवल केंद्रीय एजेंसियों की छापेमारी से ऐसे वित्तीय अपराधों पर पूरी तरह लगाम लगाना संभव नहीं होगा।

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