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मतदाता सूची पुनरीक्षण और सॉफ्टवेयर पर उठे सवाल, मल्लिकार्जुन खरगे ने मतपत्र से चुनाव कराने पर दिया जोरभारत
26 अक्तू॰ 2026, 3:42 pm (20 मिनट पहले)· 0

मतदाता सूची पुनरीक्षण और सॉफ्टवेयर पर उठे सवाल, मल्लिकार्जुन खरगे ने मतपत्र से चुनाव कराने पर दिया जोर

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे और मतपत्र से मतदान की मांग उठाई है।

मतदाता सूचियों की शुद्धता और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 26 अक्टूबर को केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ियों के कई मामले सामने आने के बाद भी केंद्र सरकार मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का बचाव कर रही है। इसके साथ ही उन्होंने विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की ओर से दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को होने वाली महारैली में नागरिकों से बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया।

सॉफ्टवेयर पर जानकारी छुपाने का आरोप

कांग्रेस अध्यक्ष ने सोशल मीडिया मंच X पर अपनी बात रखते हुए मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि जब एसआईआर प्रक्रिया में उपयोग में लाए जा रहे सॉफ्टवेयर के संबंध में सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत विवरण मांगा गया, तब निर्वाचन आयोग ने ‘ट्रेड सीक्रेट्स’ का तर्क देकर जानकारी साझा करने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रियाओं में इस्तेमाल होने वाले तकनीकी साधनों को सार्वजनिक जांच से दूर रखना कई आशंकाओं को जन्म देता है।

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उत्तर प्रदेश में मतदाता आवेदनों की विसंगतियां

उत्तर प्रदेश के चुनावी आंकड़ों का हवाला देते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने रेखांकित किया कि राज्य में मतदाता पंजीकरण से जुड़े 16.18 लाख ‘फॉर्म-6’ आवेदनों का विवरण सार्वजनिक पटल पर नहीं रखा गया। इसके अलावा, पीलीभीत जिले का विशेष उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि वहां 10,470 मतदाता रिकॉर्ड्स में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। खरगे के अनुसार, इन खुलासों के सामने आने के बाद ही अधिकारियों को समूचे उत्तर प्रदेश में फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 की गहन जांच के निर्देश जारी करने के लिए बाध्य होना पड़ा है।

विपक्षी गठबंधन की तीन मुख्य मांगें और मतपत्र की वकालत

सत्तारूढ़ दल और चुनाव संस्था के बीच साठगांठ का आरोप लगाते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने विपक्षी मोर्चे की तीन स्पष्ट मांगें सामने रखीं। पहली मांग के तहत उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और निर्वाचन आयुक्तों के चयन व संरक्षण से जुड़े 2023 के कानून को निरस्त करने पर जोर दिया। इसके अलावा, उन्होंने वर्तमान एसआईआर प्रक्रिया को तुरंत रोकने तथा कथित तौर पर गलत तरीके से हटाए गए वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची में दोबारा शामिल करने की बात कही। मल्लिकार्जुन खरगे ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के स्थान पर पुराने मतपत्रों के जरिए चुनाव कराने की जोरदार वकालत की। उन्होंने कहा कि यह केवल वोट बचाने की लड़ाई नहीं, संविधान और लोकतंत्र बचाने का जनसंघर्ष है।

सवाल-जवाब

मल्लिकार्जुन खरगे ने निर्वाचन आयोग को लेकर क्या मुख्य आरोप लगाए हैं?
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मुख्य निर्वाचन आयुक्त का बचाव कर रही है और आयोग ने मतदाता सूची पुनरीक्षण सॉफ्टवेयर की आरटीआई जानकारी ट्रेड सीक्रेट्स का हवाला देकर रोक दी।
उत्तर प्रदेश से जुड़े किन आंकड़ों का उल्लेख किया गया है?
खरगे ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में 16.18 लाख फॉर्म-6 आवेदनों का ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया और पीलीभीत में 10,470 मतदाता रिकॉर्ड्स में विसंगतियां मिलीं।
विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की प्रमुख मांगें क्या हैं?
गठबंधन मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, 2023 के संबंधित कानून को रद्द करने, मतदाता सूची पुनरीक्षण रोकने और मतपत्रों से मतदान कराने की मांग कर रहा है।
विपक्षी गठबंधन की आगामी रैली कब और कहां आयोजित होगी?
‘इंडिया’ गठबंधन की यह रैली 1 नवंबर को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में प्रस्तावित है।
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