राम की नगरी अयोध्या में इस साल आयोजित होने जा रहे दसवें दीपोत्सव के लिए भव्य तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। इस बार पूरे शहर को सतरंगी रोशनी और आधुनिक सजावट से पाटने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। श्रद्धालुओं के लिए आयोजन को और अधिक यादगार बनाने हेतु मुख्य मार्गों, चौराहों और सभी महत्वपूर्ण स्थलों पर खास विद्युत झालरों का जाल बिछाया जा रहा है। इस भव्य आयोजन का मुख्य उद्देश्य पर्यटकों और श्रद्धालुओं को त्रेता युग के उस स्वर्णिम काल की जीवंत अनुभूति कराना है, जब भगवान श्री राम अयोध्या लौटे थे।
दिन-रात जुटे हैं साठ से अधिक कारीगर
इस विशाल आयोजन को सफल बनाने के लिए साठ से अधिक कुशल कारीगर पिछले एक महीने से लगातार दिन-रात पसीना बहा रहे हैं। उनकी इस कड़ी मेहनत का परिणाम है कि शहर का हर कोना एक अलग ही रंग में रंगता नजर आ रहा है। साकेत पेट्रोल पंप से लेकर सीधे राम मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार तक कई भव्य और आकर्षक तोरण द्वार खड़े किए जा रहे हैं। इन द्वारों पर विशेष प्रकार की लाइटों का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे रामनगरी की सीमा में कदम रखते ही हर श्रद्धालु को उत्सव की अलौकिक दिव्यता का अहसास हो सके।
रोशनी के जरिए जीवंत होंगे रामायण के प्रसंग
सजावट को केवल रोशनी तक सीमित न रखते हुए इसे तकनीकी रूप से भी बेहद उन्नत बनाया जा रहा है। शहर के अलग-अलग चुनिंदा स्थानों पर बड़ी एलसीडी स्क्रीन लगाई जा रही हैं, जिन पर प्रभु श्रीराम की जीवनलीला और रामायण के विभिन्न प्रसंगों का सजीव प्रसारण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त भगवान श्री राम, माता जानकी, लक्ष्मण जी और पवनपुत्र हनुमान की मनमोहक आकृतियों को आकर्षक प्रकाश व्यवस्था के माध्यम से उकेरा जा रहा है। लाइटिंग का काम देखने वाले कारीगर बाबा ने बताया कि सजावट के हर एक हिस्से पर बारीकी से काम किया जा रहा है ताकि आने वाले हर भक्त को पौराणिक युग का साक्षात अहसास मिल सके।
भीड़ प्रबंधन और सुविधा के लिए आधुनिक तकनीक
लाखों की संख्या में जुटने वाली भीड़ को ध्यान में रखते हुए इस बार प्रशासनिक और तकनीकी सुविधाओं पर भी पूरा जोर दिया जा रहा है। शहर के लगभग दस प्रमुख स्थानों पर विशेष रूप से थीम आधारित वे-फाइंडर लगाए जा रहे हैं। ये वे-फाइंडर मुख्य प्रवेश मार्गों, व्यस्त चौराहों और आयोजन स्थलों के पास स्थापित होंगे, जिससे आगंतुकों को दिशा-निर्देश और सटीक जानकारी आसानी से मिल सकेगी। इसके अलावा जगह-जगह वर्टिकल स्क्रीन भी लगाई जाएंगी जिन पर जरूरी सूचनाएं प्रदर्शित होती रहेंगी। परंपरा और आधुनिक तकनीक के इस अनूठे संगम से अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत को एक नया और भव्य स्वरूप प्रदान किया जा रहा है।

















