असम के श्रीभूमि जिले में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान कलाकारों पर हुए हमले के मामले में पुलिस की कार्रवाई लगातार तेज बनी हुई है। इस सनसनीखेज मामले में अधिकारियों ने चार और नए लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसके बाद अब तक कुल 17 लोगों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी साझा करते हुए बताया कि ये ताजा गिरफ्तारियां रविवार की रात को की गईं। इस कार्रवाई से यह साफ होता है कि स्थानीय प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से ले रहा है और दोषियों को पकड़ने के लिए किस तरह से लगातार दबिश दी जा रही है।
रात की गई गिरफ्तारियां और आरोपियों की पहचान
रविवार देर रात की गई इन ताजा छापों के दौरान पुलिस ने चार संदिग्धों को दबोचने में सफलता हासिल की। पकड़े गए इन आरोपियों की पहचान सुमित कुमार दास, अरुण कुमार रॉय, प्रियांशु पाल और प्रियांशु दास के रूप में हुई है। इनसे पहले श्रीभूमि पुलिस ने इस पूरे मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए 13 अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया था। रविवार की रात हुई इन चार नई गिरफ्तारियों के बाद पुलिस महकमे ने अपनी जांच का दायरा और अधिक व्यापक कर दिया है ताकि घटना में शामिल अन्य चेहरों को भी जल्द से जल्द बेनकाब किया जा सके।
दुर्गा पूजा विसर्जन के दौरान हुआ था विवाद
यह पूरा घटनाक्रम दुर्गा पूजा की मूर्ति विसर्जन से जुड़े एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान सामने आया था। श्रीभूमि जिले में स्थित हिंदुस्तान क्लब की ओर से अंतिम मूर्ति विसर्जन जुलूस के सिलसिले में एक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस समारोह में प्रस्तुति देने के लिए एक बिहू मंडली को विशेष तौर पर आमंत्रित किया गया था। प्रारंभिक रिपोर्टों से यह बात सामने आई है कि जब बिहू कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे थे, तभी वहां मौजूद कुछ लोगों के एक समूह ने इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया।
असमिया गानों को लेकर भड़का था विवाद
जांच में यह बात भी सामने आई है कि हमलावरों ने कार्यक्रम के दौरान बजाए जा रहे असमिया गानों पर आपत्ति जताई थी। बराक घाटी के इस इलाके में असमिया गीतों के बजाए जाने को लेकर कुछ लोगों ने कलाकारों के साथ तीखी बहस शुरू कर दी। यह विवाद धीरे-धीरे इतना बढ़ गया कि उसने हिंसक रूप ले लिया और भीड़ ने कलाकारों पर कथित तौर पर हमला बोल दिया। इस अचानक हुए हमले में मंडली के सभी सदस्यों को गंभीर चोटें आईं। इसके अलावा हमलावरों ने बिहू नृत्य में इस्तेमाल होने वाले कई पारंपरिक वाद्ययंत्रों को भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया और कुछ वाद्ययंत्रों को अपने साथ उठाकर भी ले गए।
शीर्ष अधिकारियों की निगरानी और पुलिस का बयान
इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक हरमीत सिंह ने पहले ही 13 लोगों की गिरफ्तारी की पुष्टि कर दी थी। उन्होंने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया था कि श्रीभूमि पुलिस स्टेशन में इस संबंध में एक औपचारिक मामला दर्ज कर लिया गया है और सभी गिरफ्तार आरोपियों को अदालत के समक्ष पेश किया जा चुका है। श्रीभूमि पुलिस ने अपने एक आधिकारिक बयान में यह भी स्पष्ट किया है कि इस घटना की आगे की जांच अभी सक्रिय रूप से जारी है। पुलिस ने दोहराया है कि कानून का पालन कराने, नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने तथा क्षेत्र में शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए उनका प्रशासन पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा पर उठी चिंताएं
इस अप्रत्याशित और निंदनीय घटना ने असम की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा और कलाकारों की व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना के बाद से राज्यभर के सांस्कृतिक प्रेमियों और संगठनों में गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है। ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन यानी आसू के अध्यक्ष उत्पल शर्मा ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बिहू जैसी लोक कला का प्रदर्शन करने वाले कलाकारों पर हमला करना और ढोल तथा पेपा जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों को तोड़ना पूरी तरह से अक्षम्य अपराध है। कलाकारों को बिना किसी डर या भय के अपनी कला का प्रदर्शन करने का अधिकार मिलना चाहिए और इस तरह की हिंसा के लिए समाज में कोई जगह नहीं होनी चाहिए।



















