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मंडी के मेडिकल कॉलेज में हटाए गए आउटसोर्स वार्ड बॉय ने उठाया आत्मघाती कदम, ठेकेदार पर लगाया प्रताड़ना का आरोपहिमाचल प्रदेश
6 अक्तू॰ 2026, 2:02 pm (31 दिन पहले)· 1

मंडी के मेडिकल कॉलेज में हटाए गए आउटसोर्स वार्ड बॉय ने उठाया आत्मघाती कदम, ठेकेदार पर लगाया प्रताड़ना का आरोप

नेरचौक मेडिकल कॉलेज से निकाले गए करीब 13 आउटसोर्स कर्मियों में शामिल बलवंत सिंह ने अत्यधिक दवाइयां खाकर जान देने की कोशिश की। पीड़ित ने नौकरी छिनने के बाद परिवार पर भुखमरी का संकट आने और अधिकारियों द्वारा उपेक्षा का आरोप लगाया है।

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में स्थित प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान श्री लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नेरचौक में कार्यरत एक आउटसोर्स कर्मचारी ने नौकरी जाने के सदमे में अत्यधिक दवाइयां निगल लीं। आउटसोर्स व्यवस्था के तहत अस्पताल में वार्ड बॉय के पद पर तैनात रहे इस कर्मचारी को गंभीर हालत में उसी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका सघन उपचार चल रहा है। इस घटना ने स्वास्थ्य संस्थान में आउटसोर्स कर्मचारियों की कार्यदशाओं और अचानक की जाने वाली छंटनी को लेकर गहरा विवाद खड़ा कर दिया है।

किराए के मकान में दवा खाकर बिगड़ी तबीयत, पत्नी को दी जानकारी

आत्मघाती कदम उठाने वाले इस कर्मचारी की पहचान घींऊधार, रिवालसर के निवासी बलवंत सिंह के रूप में हुई है। बलवंत सिंह अपने परिवार के साथ भंगरोटू में किराए का कमरा लेकर रह रहे थे और नेरचौक स्थित मेडिकल कॉलेज में सेवाएं दे रहे थे। सोमवार की शाम उन्होंने अचानक भारी मात्रा में दवाइयों का सेवन कर लिया। जब शरीर पर दवाइयों का दुष्प्रभाव होने लगा और तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी, तब उन्होंने अपनी पत्नी को इस बात से अवगत कराया। इसके तुरंत बाद घबराए परिजन उन्हें उपचार के लिए तुरंत श्री लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नेरचौक लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने तुरंत उनका इलाज शुरू किया।

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जेब से मिला सुसाइड नोट, 13 कर्मचारियों को निकालने की बात सामने आई

अस्पताल प्रशासन और परिजनों से घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय पुलिस की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और जांच का दायरा बढ़ाया। तलाशी के दौरान पुलिस को बलवंत सिंह की जेब से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है, जिसमें उन्होंने नौकरी से निकाले जाने से उपजे मानसिक तनाव और विवशता का साफ उल्लेख किया है। अस्पताल से जुड़े शुरुआती विवरण के अनुसार, संबंधित आउटसोर्स एजेंसी के जरिए सेवाएं दे रहे लगभग 13 कर्मचारियों को हाल ही में काम से बाहर का रास्ता दिखाया गया था, जिससे कई परिवार गंभीर संकट में आ गए थे।

ठेकेदार और सुपरवाइजर पर उत्पीड़न के आरोप, प्रशासन की बेरुखी पर फूटा दर्द

उपचाराधीन बलवंत सिंह ने अपनी व्यथा साझा करते हुए संबंधित आउटसोर्स कंपनी के ठेकेदार तथा सुपरवाइजर पर लगातार प्रताड़ित करने के संगीन आरोप लगाए हैं। पीड़ित का कहना है कि उन्हें पिछले करीब एक महीने से लगातार परेशान किया जा रहा था। अचानक नौकरी छीने जाने की वजह से घर की आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा गई है और नौबत यहां तक आ पहुंची है कि पूरे परिवार को कई बार भूखे पेट ही सोना पड़ रहा है। पीड़ित ने दुख जताया कि जब इस अन्याय के खिलाफ प्रशासन से गुहार लगाई गई, तो अधिकारियों ने उनकी परेशानी को पूरी तरह दरकिनार कर दिया। उधर, मंडी के पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार ने पुष्टि की है कि पुलिस विभाग को घटना की सूचना प्राप्त हो चुकी है और नियमानुसार पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच अमल में लाई जा रही है।

सवाल-जवाब

नेरचौक मेडिकल कॉलेज में किस कर्मचारी ने आत्महत्या का प्रयास किया?
घींऊधार, रिवालसर के रहने वाले बलवंत सिंह ने, जो नेरचौक मेडिकल कॉलेज में आउटसोर्स पर वार्ड बॉय के रूप में कार्यरत थे, आत्महत्या का प्रयास किया।
बलवंत सिंह की वर्तमान स्थिति क्या है और उनका इलाज कहां हो रहा है?
उनका उपचार श्री लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नेरचौक में चल रहा है, जहां परिजनों द्वारा समय पर पहुंचाए जाने के बाद डॉक्टरों ने उनकी देखभाल शुरू की।
कर्मचारी ने अपनी जान देने की कोशिश क्यों की?
नौकरी से हटाए जाने के तनाव, ठेकेदार और सुपरवाइजर द्वारा कथित प्रताड़ना तथा परिवार के सामने आए भुखमरी के संकट के कारण उन्होंने यह कदम उठाया।
अस्पताल में कितने आउटसोर्स कर्मियों को काम से हटाया गया था?
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, अस्पताल में आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से कार्यरत करीब 13 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया था।
पुलिस जांच में क्या सुबूत बरामद हुआ है?
पुलिस को बलवंत सिंह की जेब से एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें नौकरी से हटाए जाने का स्पष्ट रूप से जिक्र किया गया है।
मंडी पुलिस प्रशासन का इस मामले पर क्या कहना है?
मंडी के पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार ने पुष्टि की है कि पुलिस को सूचना मिल चुकी है और नियमानुसार पूरे मामले की जांच की जा रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Aisha Khan@aisha-khan·30 दिन पहले

नौकरी जाते ही इंसान का इस तरह टूट जाना वाकई दिल दहला देने वाला है। इन ठेकेदारों की मनमानी पर रोक लगाने वाला कोई क्यों नहीं है? सोच रही हूँ कि उन बाकी बारह लोगों का क्या हाल होगा जिन्हें साथ में निकाला गया है?

Arjun Mehta@arjun-mehta·30 दिन पहले

अचानक नौकरी से निकालना और उस पर ठेकेदार की प्रताड़ना, इंसान को किस हद तक तोड़ देती है, यह इस घटना से साफ दिखता है। क्या अस्पताल प्रशासन को इस बात की कोई खबर नहीं थी कि इतने सारे कर्मचारियों को एक साथ हटाया जा रहा है?

Ravikash Gupta@ravikash·30 दिन पहले

अर्जुन जी, कॉर्पोरेट या ठेकेदारी प्रथा में लेबर लॉस की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बिना नोटिस छंटनी से परिवार बर्बाद हो जाते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·30 दिन पहले

अचानक नौकरी से निकालना और ऊपर से ठेकेदार की प्रताड़ना, इंसान को किस हद तक तोड़ देती है इसकी बानगी है ये। बलवंत सिंह के पास सुसाइड नोट मिलना और 13 लोगों का अचानक बेरोजगार होना सीधे तौर पर लेबर लॉ और आउटसोرسिंग कंपनियों की मनमानी पर सवाल खड़े करता है। उम्मीद है पुलिस इस मामले में सिर्फ खानापूर्ति नहीं करेगी।

Rohan Verma@rohan-verma·30 दिन पहले

करण भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। ठेकेदारों की इन मनचली हरकतों पर लगाम कसना बेहद जरूरी हो गया है, वरना ऐसे गरीब अपनी जान गंवाते रहेंगे।

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