भारत के एक विशाल हिस्से पर इस समय मानसूनी बारिश आफत बनकर टूट पड़ी है। देश के 17 से अधिक राज्यों में भारी वर्षा, भूस्खलन, बिजली गिरने और जलभराव का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। उत्तर से लेकर दक्षिण और पूर्वोत्तर से लेकर पश्चिमी राज्यों तक नदियां उफान पर हैं और सड़कें जलमग्न हो चुकी हैं। इस साल अल नीनो प्रभाव के बावजूद मानसून की अत्यधिक सक्रियता देखने को मिल रही है। केरल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात, असम, पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे राज्यों में निरंतर मूसलाधार बारिश से आम जिंदगी पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कई इलाकों के लिए आपदा चेतावनी जारी करते हुए प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
असम में बाढ़ का कहर और भारी तबाही
पूर्वोत्तर भारत के प्रवेश द्वार असम में इस सीजन की सबसे विनाशकारी मानसूनी आपदा आई है। ब्रह्मपुत्र नदी और उसकी तमाम सहायक नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे राज्य का विशाल भूभाग पानी में डूब गया है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, इस मानसूनी सीजन में असम में जान गंवाने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 82 हो गई है। राज्य के लगभग 1 लाख 92 हजार से अधिक नागरिक इस विकराल जल प्रलय से सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। संकट को देखते हुए स्थानीय मौसम केंद्र ने राज्य के 8 क्षेत्रों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जबकि 7 प्रमुख जिलों में बाढ़ को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
असम के तिनसुकिया, धेमाजी, लखीमपुर, चराईदेव, शिवसागर, जोरहाट और गोलाघाट जिलों में स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। इसके अलावा गोलाघाट, शिवसागर, चराईदेव, बजाली, धेमाजी, शोणितपुर और जोरहाट जिलों को मिलाकर कुल 349 गांव पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। प्रभावित जिलों में चराईदेव सबसे ज्यादा झुलसा है, जहां अकेले 75,199 लोग बाढ़ से जूझ रहे हैं। वहीं शिवसागर जिले में 58,824 नागरिक इस आपदा की चपेट में हैं। पानी के तेज बहाव के कारण 394 से अधिक परिवारों के मकान पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। किसानों की लहलहाती फसलें और खेत पानी में डूबकर बर्बाद हो चुके हैं। हालांकि कुछ इलाकों में पानी का स्तर धीरे-धीरे घट रहा है, लेकिन मकान रहने लायक न बचने की वजह से लोग अब भी राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं।
राहत अभियानों में तेजी और रिलायंस फाउंडेशन का सहयोग
आपदा से घिरे इलाकों में राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर चलाए जा रहे हैं। संकटग्रस्त नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए NDRF, SDRF और भारतीय सेना की टुकड़ियां दिन-रात जुटी हुई हैं। जिन इलाकों का जमीनी संपर्क पूरी तरह टूट चुका है, वहां सेना के हेलीकॉप्टर और मोटरबोट्स के जरिए खाद्य सामग्री और जीवनरक्षक दवाएं पहुंचाई जा रही हैं। हजारों लोगों को अब तक सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है।
इस विकट परिस्थिति में मदद का हाथ बढ़ाते हुए रिलायंस फाउंडेशन ने असम के मुख्यमंत्री राहत कोष में 21 करोड़ रुपये का वित्तीय योगदान दिया है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस सहायता के लिए रिलायंस फाउंडेशन और उसकी फाउंडर व चेयरपर्सन नीता अंबानी का सार्वजनिक रूप से आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर अपने संदेश में कहा कि रिलायंस फाउंडेशन हमेशा असम के संकट में साथ खड़ा रहा है, जैसा कि COVID-19 महामारी के समय भी देखा गया था। 21 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद के साथ-साथ फाउंडेशन की ग्राउंड टीम प्रभावित क्षेत्रों में भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं, आपातकालीन आश्रय और मवेशियों की देखभाल जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने में जुटी हुई है।
जमीन पर उतरे अभिनेता रणदीप हुड्डा
आपदा के इस कठिन समय में बॉलीवुड अभिनेता रणदीप हुड्डा ने भी आगे आकर मिसाल पेश की है। पर्दे की चकाचौंध से दूर हटकर रणदीप हुड्डा खुद बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री बांटने पहुंचे। उन्होंने असम के सबसे गंभीर रूप से प्रभावित ऊपरी इलाकों, विशेषकर शिवसागर और चराईदेव जिलों में खुद नौका संभालकर राहत कार्य किया।
रणदीप हुड्डा ने अंतरराष्ट्रीय सामाजिक संगठन 'ग्लोबल सिख' के स्वयंसेवकों के साथ मिलकर जलभराव वाले इलाकों का दौरा किया। जहां सड़कें पूरी तरह बह चुकी थीं, वहां उन्होंने नावों के सहारे सफर तय करके घुटनों तक भरे गंदे पानी के बीच फंसे परिवारों को सूखा राशन, पीने का साफ पानी, तिरपाल और दवाएं बांटीं। उनके इस मानवीय प्रयास की स्थानीय लोग काफी सराहना कर रहे हैं।
गुजरात में भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त
दूसरी तरफ पश्चिमी भारत के औद्योगिक राज्य गुजरात में भी मानसून विकराल रूप धारण कर चुका है। राजस्थान से सटे इलाकों में बने कम दबाव के क्षेत्र और अरब सागर से आ रही अत्यधिक नमी के कारण राज्य के एक बड़े हिस्से में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। गुजरात में अब तक बारिश और बाढ़ से जुड़ी अलग-अलग घटनाओं में 35 लोगों की मौत हो चुकी है। राज्य प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए अब तक 42 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाया है, जहां उनके रहने और खाने का प्रबंध किया जा रहा है।


















