मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में अवैध शराब की बरामदगी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रामपुर कलां थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांवों में पुलिस की कार्रवाई पर सवालिया निशान लग गए हैं क्योंकि पकड़ी गई शराब की वास्तविक मात्रा और थाने में दर्ज आंकड़ों के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। पूरे घटनाक्रम में कथित तौर पर शराब ठेकेदार के लोगों की भूमिका और जब्ती के बाद एक मोटरसाइकिल को छोड़े जाने की चर्चा ने इस मामले को तूल दे दिया है।
एक ही रात दो गांवों में हुई छापेमारी
रामपुर कलां थाना क्षेत्र के सेमना और जोंसिल गांवों में एक ही रात अवैध शराब के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की बात सामने आई थी। शुरुआती दावों के अनुसार सेमना से 7 पेटी और जोंसिल से लगभग 30 पेटी अवैध शराब पकड़ी गई थी। हालांकि जब पुलिस के आधिकारिक दस्तावेजों की जांच की गई तो स्थिति बिल्कुल अलग नजर आई। पुलिस रिकॉर्ड में केवल जोंसिल से बरामद 25 पेटी शराब के आधार पर ही आबकारी एक्ट की धारा 34(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस की कार्रवाई और ट्रैक्टर की तलाशी
पुलिस के अनुसार इस पूरी कार्रवाई को एक मुखबिर की पुख्ता सूचना के आधार पर अंजाम दिया गया था। अधिकारियों ने बताया कि जोंसिल गांव में एक नीले रंग के स्वराज ट्रैक्टर की तलाशी ली गई जिसके भीतर से 25 पेटी अवैध शराब बरामद हुई। इस मामले में पुलिस ने मौके से दो आरोपियों को अपनी गिरफ्त में ले लिया जबकि एक अन्य आरोपी मौके से फरार होने में कामयाब रहा जिसकी तलाश की जा रही है।
मध्य प्रदेश से जुड़े ऐसे मामलों में स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता को लेकर अक्सर चर्चा होती रहती है, और इस घटना ने प्रशासनिक अमले की कार्यप्रणाली पर नए सिरे से बहस छेड़ दी है।
वीडियो फुटेज से खुले राज और गायब शराब का रहस्य
इस पूरे प्रकरण के सामने आने के बाद कुछ वीडियो फुटेज भी वायरल हुए हैं जिन्होंने पुलिस की थ्योरी पर पानी फेर दिया है। इन वीडियो में कथित तौर पर शराब ठेकेदार के निजी लोग कार्रवाई को अंजाम देते और शराब पकड़ते हुए नजर आ रहे हैं, जबकि मौके पर पुलिस बल की मौजूदगी नहीं दिखाई दे रही है। इससे यह अंदेशा लगाया जा रहा है कि पहले निजी लोगों ने शराब को पकड़ा और उसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।
सेमना गांव में राकेश कुशवाहा के ठिकाने से 7 पेटी शराब मिलने और आरोपी के फरार होने की बात भी सामने आ रही है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस विशिष्ट मामले में अब तक कोई औपचारिक प्रकरण दर्ज नहीं किया गया है। यही वह बिंदु है जहां से 'गायब 7 पेटी' का रहस्य गहराता जा रहा है और जनता के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
मोटरसाइकिल छोड़े जाने के आरोप और जांच की मांग
इस पूरे विवाद का सबसे संवेदनशील हिस्सा जोंसिल गांव से थाने लाई गई एक स्प्लेंडर बाइक से जुड़ा हुआ है। स्थानीय स्तर पर यह गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं कि शराब के साथ ही थाने लाई गई इस मोटरसाइकिल को उसी गुप्त रात के दौरान बिना किसी उचित प्रक्रिया के छोड़ दिया गया। यदि यह वाहन वास्तव में जब्ती का हिस्सा था और पुलिस इसे थाने लेकर आई थी, तो इसे किस वरिष्ठ अधिकारी के आदेश पर छोड़ा गया और क्या इसका कोई आधिकारिक उल्लेख थाने के रोजनामचे या जब्ती रजिस्टर में दर्ज है, इन तमामप्रश्नों के उत्तर मांगे जा रहे हैं।
अब जनता और स्थानीय लोग इस बात का जवाब चाहते हैं कि क्या यह पूरी कार्रवाई वास्तव में पुलिस ने अपनी स्वतंत्र क्षमता से की थी या इसमें ठेकेदार के कारिंदों का दखल था। 32 पेटी शराब पकड़े जाने के दावे के बावजूद केवल 25 पेटी पर ही केस दर्ज होना और बाकी शराब का रिकॉर्ड से गायब होना बड़े प्रशासनिक भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। इन सभी अनसुलझे सवालों ने रामपुर कलां थाना पुलिस की निष्पक्षता और कार्यशैली को कठघरे में ला खड़ा कर दिया है।



















